1994(उस वक्त लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री थे बिहार के) में राज्य के गुमला, डोरंडा और लोहरदगा, रांची, पटना जैसे कई कोषागारों से फर्ज़ी बिलों के ज़रिए करोड़ों रुपए की कथित अवैध निकासी हुई. ये निकासी पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चारे और पशुओं की दवा आदि की सप्लाई के नाम पर हुई. पोल खुली, तो रातों-रात सरकारी कोषागार और पशुपालन विभाग के कई सौ कर्मचारी गिरफ़्तार कर लिए गए, कुछ ठेकेदारों को भी हिरासत में लिया गया. धीरे धीरे ये मामला राजनीतिक सांठ-गांठ तक पहुंचा, और इसे चारा घोटाला के नाम से जाना जाने लगा. यह घोटाला कितने करोड़ों का है अभी तक पूरी तरह से साफ़ नही हुआ है लेकिन जो तस्वीर सामने आई है उसमें 900 करोड़ रूपये की बात हो रही है.

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इस मामले में शनिवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत छह अन्य को बरी कर दिया लेकिन लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया. उन्हें सजा क्या होगी इसका फैसला 3 जनवरी को होना है लेकिन तबतक उन्हें न्यायिक हिरासत में रहना पड़ेगा और वो रांची के बिरसा मुंडा जेल में हैं. लालू को जेल हुई तो उनका परिवार सदमे में आ गया. ऐसा नही है कि लालू पहली बार जेल गये हैं. इसी मामले में लालू पहले भी जेल जा चुके हैं, लेकिन इस बार जब उन्हें जेल जाना पड़ा तो उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी लालू के जेल जाने से बहुत दुखी हैं. उन्होंने कुछ ऐसा कहा कि है जिनसे उनकी चिंता समझी जा सकती है.

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ज़ी न्यूज़ की खबर के मुताबिक लालू यादव के जेल जाने पर राबड़ी देवी ने कहा कि “साहेब (लालू) की तबियत ठीक नहीं रहती है, इसलिए मुझे उनकी चिंता है. मुझे उनके तबियत की चिंता है. सब जानते हैं कि उनके दिल का ऑपरेशन हुआ है. वे सुबह-शाम दवा खाते हैं. वे खुद दवा भी नहीं खाते हैं, देना पड़ता है. वहां किस तरह से दवाएं लेंगे,” इसके आगे उन्होंने कहा कि “ऊपरवाले ने हमारे साथ कभी भी गलत नहीं किया. पार्टी के कार्यकर्ता और बिहार की जनता ही उनकी ताकत हैं.” हालाँकि राबड़ी देवी साथ में कार्यकर्ताओं से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील करना नहीं भूलती.