फिल्म ‘पद्मावत’ के रिलीज होने को लेकर खूब बवाल मचा, बात सुप्रीम कोर्ट में पहुंची तो सबसे बड़ी अदालत ने निर्देश दिया कि रिलीज पर बैन नहीं. फ़िलहाल फिल्म तो विवादों का सफर करते हुए थिएटरों तक पहुंच गयी. फिल्म को देखने के बाद लोगों ने कहा कि इस फिल्म का नाम ‘पद्मावत’ नहीं बल्कि ‘खिलजी’ होना चाहिए था. क्योंकि इस फिल्म में खिलजी को ही अधिक दमदार दिखाया है. इतना ही नही खिलजी को लेकर लोगों की दिलचस्पी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही, उन्होंने इन्टरनेट पर भी खिलजी को खोजने में खूब दिलचस्पी दिखाई. खिलजी और उसके बारे में पढ़ने के लिए लोग गूगल पर सर्च कर रहे हैं. तो चलिए आज हम भी आपको खिलजी के बारे में कुछ ऐसे तथ्य बताते हैं जो काफी दिलचस्प हैं और नेट पर खूब सर्च किये जा रहे हैं.

पद्मावत फिल्म में रणवीर सिंह खिलजी के रूप में

शुरुआत खिलजी के जन्म से करते हैं

खिलजी वंश का दूसरा शासक अलाउद्दीन खिलजी का जन्म 1266-1267 ई. में बंगाल में हुआ था. इसके पिता का नाम शिहाबुद्दीन मासूद था. अलाउद्दीन के बारे में जाता है कि वो काफी खूंखार शासक था. खिलजी वंश के प्रथम शासक जलालुद्दीन ख़िलजी अलाउद्दीन खिलजी का चाचा था. जब अलाउद्दीन खिलजी का पिता देहांत हो गया तो उसके चाचा ने उसे और उसके भाईयों को अपने साथ दिल्ली ले आये.

पद्मावत फिल्म का एक दृश्य

अलाउद्दीन खिलजी ने अपने ही चाचा की लड़की से की थी शादी 

पिता की मृत्यु के बाद अलाउद्दीन खिलजी को उसके चाचा ने सहारा दिया. बाद में अलाउद्दीन खिलजी ने अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी की बेटी के साथ निकाह कर लिया. इतना ही नहीं अपने चाचा को ही मारकर अलाउद्दीन पहली बार दिल्ली सल्तनत का सुल्तान भी बना.

सांकेतिक

खिलजी के उसके गुलाम काफूर के साथ थे शारीरिक संबंध !

कुछ इतिहासकार बताते हैं कि खिलजी ने गुजरात के बच्चा बाज़ार से एक लड़के को ख़रीदा था, जिसका नाम मालिक काफूर था. इसके बारे में कहा जाता है कि वो खिलजी का काफी विश्वासपात्र गुलाम था. यही नहीं खिलजी और काफूर के बीच शारीरिक संबंध होने की भी बात कई जगह पढ़ने को मिलती है.

खिलजी की मौत

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि रानी पद्मावती की सुन्दरता के बारे में जब खिलजी को पता चला तो वह चित्तौड़ की तरफ बढ़ा. पद्मावती को पाने के लिए खिलजी ने चित्तौड़ के राजा रतन सिंह के साथ दोस्ती करने का षड्यंत्र रचा, और उन्हें बाद में धोखा भी दिया. अंततः जब राजा रतन सिंह नहीं रहे तो रानी पद्मावती ने अन्य रानियों के साथ ‘जौहर’ करने का रास्ता चुना. इतिहासकारों का एक पक्ष कहता है कि जौहर से निकली चीखों से खिलजी पूरी तरीके से पागल हो गया था, और इसी वजह से उसकी मौत हो गयी थी.

अलाउद्दीन खिलजी का मकबरा

दूसरा पक्ष

खिलजी की मौत को लेकर एक दूसरा पक्ष यह भी है कि अलाउद्दीन खिलजी एक बीमारी की वजह से अपना दिमागी संतुलन खो बैठा था. बाद में जनवरी 1316 में दिल्ली में उसकी मौत हो गयी थी. दिल्ली के महरौली में आज भी उसका मक़बरा स्थित है.