“उसका नाम ‘वसीम’ है जिसके सिर पर गोली चलाने का आरोप है, कहा जा रहा है कि अभिषेक गुप्ता उर्फ़ ‘चंदन’ की मौत इसी की वजह से हुई है. वसीम के घर जब तलाशी ली गयी थी तो उसके घर से पिस्टल और देसी बम बरामद किये गये थे.”

कासगंज का चंदन

26 जनवरी के दिन से उत्तर प्रदेश का कासगंज हिंसा की भेंट चढ़ा हुआ है. हालाँकि प्रशासन का कहना है कि अब हालात सामान्य हो चले हैं लेकिन तिरंगा यात्रा को लेकर हुए बवाल के बाद से कासगंज का बड्डूनगर चर्चा का विषय बना हुआ है. टीवी चैनलों पर भी कासगंज की हर एक रिपोर्ट देखने को मिल जायेंगी. हालाँकि टीवी पर इतना सब कुछ चलने के बाद भी कुछ बातें ऐसी भी हैं जो शायद आपको किसी ने नहीं बताई होंगी और वो है मृतक चंदन गुप्ता के बारे में. बता दें कि चन्दन गुप्ता तिरंगा यात्रा में शामिल जरूर थे लेकिन उनके शामिल होने की कहानी भी कुछ अलग तरीके से है. चलिए आपको बताते हैं चन्दन गुप्ता के बारे में कुछ ऐसे तथ्य जो चंदन को समझने में आपकी मदद करेंगे.

बीकॉम फाइनल ईयर का स्टूडेंट ‘चंदन’

22 साल का नौजवान चंदन, जिसे देश के लिए, समाज के लिए काम करने का जुनून सवार रहता था. वो लोगों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता था. पिता सुशील गुप्ता (जोकि एक प्राइवेट हॉस्पिटल में कंपाउंडर हैं) और माँ संगीता बेसुध से हैं कि आखिर लोगों की इतनी सहायता करने वाले बच्चे को हत्यारों ने गोली कैसे मार दी. चंदन बीकॉम फाइनल ईयर का स्टूडेंट था और वो घर में एक भाई और एक बहन से छोटा था. पढ़ाई में ठीक-ठाक रहने वाला चंदन लोगों के सुख-दुःख में भाग लेता था.

तिरंगा यात्रा में कैसे शामिल हुआ चंदन

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक कासगंज में 26 जनवरी को निकलने वाली तिरंगा यात्रा में चंदन सिर्फ इसलिए शामिल हुआ था क्योंकि यह एक सामाजिक और सौहार्द का कार्यक्रम था. लेकिन उसे क्या पता था कि सौहार्द के नाम पर हो रहे इस कार्यक्रम में कुछ लोग पिस्टल से उसका स्वागत करने के लिए इंतजार कर रहे हैं.

चंदन के बारे में उसके पड़ोसियों का कहना है कि…

चंदन के पड़ोसी चंदन के बारे में बताते हैं कि, “चंदन ने कभी फालतू के कामों में ध्यान नहीं दिया. कभी उसके बारे में लड़ाई-झगड़े की कोई बात सामने नहीं आई. वो कई बार रक्तदान कर चुका था और हमेशा लोगों को रक्तदान करने के लिए जागरूक करता था. वो हमारे मोहल्ले की शान था.”

चंदन का एक संगठन भी था ?

सामाजिक कार्यों में आगे रहने वाला चंदन और उसके साथी संकल्प नाम के एक संगठन से काम करते थे. हालाँकि उसके पिता इस बात से इंकार करते हुए कहते हैं कि “वो किसी भी संगठन से अधिकारिक रूप से नहीं जुड़ा था.” चंदन के बारे में एक ऐसा तथ्य जिसे सभी ने माना है, वो ये कि वो धार्मिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था.

 

वैसे सोशल मीडिया पर आपको तमाम ऐसी तस्वीरें मिल जायेंगी जिसमें चंदन सामाजिक कार्य या जरुरतमंदों की मदद करते हुए दिखाई दे रहा है. ऐसे चंदन की मौत पर आज कासगंज और इंसानियत दोनों शर्मिंदा हैं. क्योंकि चंदन का व्यक्तित्व ही ऐसा था कि उसकी मौत पर हर किसी की आंखें नम है.