मालदीव में राजनीतिक संकट में जोरों पर है, न्यायपालिका और सरकार के बीच छिड़े विवाद में भारत से मदद की मांग की गयी है. ये मांग मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने भारत सरकार से की है लेकिन जो ताजा स्थिति है उसको देखते हुए भारत ने अभी कोई कदम नहीं उठाया है. बता दें कि किसी समय में भारत और मालदीव के बीच रिश्ते काफी अच्छे थे. हालाँकि रिश्ते अभी भी ठीक हैं लेकिन इस समय मालदीव का झुकाव चीन की तरफ ज्यादा है. इसलिए चीन भी इस मुद्दे पर नजर बनाये हुए है. इसी के मद्देनजर चीन ने भारत को इस मामले हस्तपक्षेप करने को लेकर सख्त हिदायत दी है.

मालदीव में फैली हिंसा

NBT की एक खबर के मुताबिक चीन ने भारत को कई बार नसीहत दी है कि वो मालदीव में छिड़े संग्राम से दूर ही रहे. यह नसीहत बीते दिनों की बात थी, लेकिन अब चीन ने भारत को लेकर यहां तक कह दिया है कि “अगर भारत मालदीव में सैन्य हस्तक्षेप करता है तो चीन उसे रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएगा.” जाहिर सी बात है कि चीन का इशारा किसी सैन्य कार्रवाई की तरफ है.

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इस बयान के बाद माना जा रहा है कि डोकलाम विवाद के बाद मालदीव में भी भारत और चीन फिर से आमने-सामने आ सकते हैं. फ़िलहाल चीन के मालदीव में अपने हित हैं इसलिए वो मालदीव पर निगरानी बनाये हुए है.

मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन और पीएम मोदी (फाइल फोटो)

वैसे भारत भी नहीं चाहेगा कि एशिया में चीन का दबदबा बढ़े और मालदीव जैसा देश चीन की झोली में सिमटें, इसलिए भारत की चिंताएं बनी हुई है. अब देखना है कि इस मुद्दे में मोदी सरकार किस तरीके से फैसला लेती है.