भारत के बेटे सरबजीत सिंह तो आपको याद ही होंगे? जी वही सरबजीत जो नशे की हालत में पाकिस्तान की सरज़मीं पर पहुँच गए थे. रात का समय था ऊपर से हल्का नशा, ऐसे में इसे सरबजीत जी की  गलती भी क्या ही कहेंगे, लेकिन हमारे आपके लिए जो छोटी सी चूक भर थी वो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा मौका बनकर उभरी. बड़ा मौका अपनी बदनीयती और घटियापन दिखाने का. बेसुध सरबजीत को पाकिस्तान के दरिंदों ने पकड़ा और जेल में डाल दिया. पूरा भारत देश उस वक़्त अंधे-बहरे पाकिस्तान को ये समझाने में जुटा था कि आपने जिस शख्स को जेल में बंद किया है वो बेक़सूर है, लेकिन पाकिस्तान जाहिलों से भरा पड़ा है, उन्हें इंसानी भाषा की बात समझ नहीं आती. ऐसे में भारत की सारी बात अनसुनी कर पूरा मुल्क एक बेक़सूर के पीछे पड़ गया. पीछे पड़ गया उन्हें दोषी साबित करने के लिए.

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सरबजीत को बताया लाहौर , मुल्तान और फैसलाबाद बम धमाकों का आरोपी

वाह रे नीच पाकिस्तान, एक तो एक बेक़सूर को नशे की हालत में बंदी बना लिया उसके ऊपर से अपने गंदे मंसूबों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान ने सरबजीत जी का नाम भी अपने हिसाब से समय-समय पर बदला. सबसे पहले नीच पाकिस्तान ने सरबजीत सिंह का जो पासपोर्ट अपनी अदालत में पेश किया उसमें नाम लिखा था ख़ुशी मोहम्मद लेकिन तस्वीर थी सरबजीत जी की. इसके बाद पाकिस्तान ने एक वीडियो जारी कर ये दावा किया कि सरबजीत ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया है, यानी की पाकिस्तान सही था, हमारे सरबजीत ख़ुशी मोहम्मद थे, हमारे सरबजीत मंजीत सिंह भी थे, हमारे सरबजीत निर्दोषों की हत्या करने वाले बम धमाके के आरोपी भी थे. सरबजीत जी की आखिरी सांस तक उन्हें पाकिस्तान ने मंजीत ही बुलाया था.

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सरबजीत जी के बेबस परिवार का सहारा बने पाकिस्तानी वकील ओवेस शेख

सरबजीत जी की बहन को जिस समय से भनक लगी कि उनके भाई को नीच पाकिस्तानियों ने अपनी जेल में क़ैद कर लिया है उन्होंने कसम खायी कि चाहे कुछ भी हो जाये वो अपने प्यारे वीरे को वापिस अपने वतन लाकर रहेंगी, हालाँकि इसकी उम्मीद बेहद कम थी. सरबजीत जी के परिवार में उनकी बहन, उनकी पत्नी और दो बेटियां थीं. सरबजीत जी की बहन दलबीर कौर ने पंजाब से लेकर दिल्ली तक का शायद ही ऐसा कोई दरवाज़ा ना खटखटाया हो जहाँ से उन्हें अपने भाई को बचाने की रोशिनी मिली. ऐसे में सरबजीत को बचाने की सबसे बड़ी लौ जली पाकिस्तान की तरफ से,  पाकिस्तान से सरबजीत जी को जिंदा और बेक़सूर बचाने का जिम्मा उठाया पाकिस्तानी वकील ओवेस शेख ने.

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ओवेस शेख ने चार बरस तक लड़ा था सरबजीत जी का केस जिसके चलते उनके साथ पाकिस्तान ने…

ओवेस शेख ने सरबजीत जी का केस पूरे 4 सालों तक लड़ा. वो शायद सिर्फ अपना काम ही कर रहे थे, लेकिन पाकिस्तान जाहिल है साहब. उन्हें भला ये कैसे रास आ जाता कि उनका ही कोई बंदा किसी निर्दोष भारतीय को बचा लेता. ऐसे में इस चार साल के समय के दौरान ओवेस शेख ने क्या कुछ नहीं झेला. कभी पाकिस्तान ने उन्हें इस केस से हाथ पीछे खींचने के लिए उनके बेटे को अगवा कर लिया, तो कभी उनकी बेटी की कार पर एसिड भी फेंक दिया, लेकिन जितना अडिग पाकिस्तान था कि वो सरबजीत जी को बेक़सूर साबित नहीं होने देगा उतने ही अडिग ओवेस शेख भी थे, सरबजीत जी को शकुश्ल भारत पहुँचाने के लिए.

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…नहीं रहे ओवेस शेख

हालाँकि पाकिस्तान ने उनका जीना इस कदर दूभर कर दिया था कि सरबजीत जी की मौत के बाद ओवेस शेख ने अपने और अपने परिवार की जान के खातिर अपना मुल्क छोड़ने का फैसला कर लिया. बताया जाता है कि जब सरबजीत जी की मौत हो गयी उस वक़्त अपने परिवार के साथ ओवेस शेख पाकिस्तान छोड़कर स्वीडन जा बसे. इन्हीं दिलेर वकील ओवेस शेख से जुड़ी एक खबर ने भारत को झकझोर कर रख दिया है. दरअसल 19 मार्च, 2018 को स्वीडन से खबर आई कि सरबजीत जी का मसला इतनी शिद्दत से लड़ने वाले ओवेस शेख अब हमारे बीच नहीं रहे. उनका निधन हो गया है. ये जानकारी खुद उनके बेटे शाहरुख़ शेख ने दी है.

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कई बेगुनाह भारतीयों का केस लड़ा था ओवेस शेख ने 

जैसे ही ओवेस शेख के निधन की खबर भारत में आई, हर शख्स की आँखें नम थीं. ओवेस शेख के बारे में कभी फुर्सत से गूगल कीजियेगा तो पता चल जायेगा कि अकेला सरबजीत सिंह का ही मसला इन्होने अपने हाथ में नहीं लिया था बल्कि वो ऐसे कई केस लड़ चुके हैं. केस तो कई लड़े लेकिन सरबजीत जी का मामला थोड़ा ज्यादा संगीन था जिसके लिए ओवेस शेख ने फुलटाइम काम भी किया था. बताया जाता है कि स्वीडन जाने के बाद ओवेस शेख ने पाकिस्तान से रिश्ते बेशक ख़त्म कर दिए थे लेकिन हिंदुस्तान से उनका लगाव कभी ख़त्म नहीं हुआ था.

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हाल ही में 2017 में भी ओवेस शेख भारत आये थे. सरबजीत जी के जीते-जी वो जब भी उनके परिजनों से मिला करते थे उनसे कहते थे कि, “आप लोग चिंता मत कीजिये, सरबजीत भारत आयेंगे. बल्कि मैं खुद उन्हें अमृतसर छोड़ने आऊंगा.” अफ़सोस की बात है कि सरबजीत जी तो भारत आये लेकिन अपने पैरों पर नहीं तिरंगे में लिपट कर और पाकिस्तान की नीचता देखिये कि सरबजीत सिंह को उनके घर छोड़ने का दावा करने वाले ओवेस शेख को भी उन्होने इतना बेबस और लाचार कर दिया था कि वो सरबजीत सिंह को अमृतसर तक छोड़ने भी नहीं आ पाए थे.

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ओवेस शेख थे बंटवारे के खिलाफ़

आज ओवेस शेख तो हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उनसे जुड़ी कई ऐसी बाते हैं जो उन्हें अन्य पाकिस्तानियों से बहुत अलग बनाती हैं और शायद यही वजह है कि उनके निधन की खबर से भारत भी ग़मगीन हुआ है. बताया जाता है कि ओवेस शेख के परिवार वाले साल 1947 में अमृतसर से लाहौर गए थे. ओवेस शेख के पिता भारतीय वॉलीबॉल टीम के वाईस कैप्टेन भी रह चुके हैं. ओवेस शेख को भारत से काफी लगाव था और इसीलिए वो कभी नहीं चाहते थे कि भारत का बंटवारा हो. वो हमेशा अपने बच्चों को अमृतसर के बारे में बताया करते थे.

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सरबजीत जी को 25 बार जेल में मिल चुके ओवेस शेख सरबजीत सिंह को काफी अच्छे से जान चुके थे. उन्होंने सरबजीत सिंह के लिए एक किताब ‘सरबजीत ए केस ऑफ मिसटेकन आइडेंटिटी’ भी लिखी थी.