आज हम आपको किन्नर जिन्हें हमारे सामाज में हिजड़ा भी कहते हैं उनकी शवयात्रा के बारें में कुछ ऐसी बातें बता रहे हैं जिन्हें जानकर आप हैरान हो जाएंगे. इससे पहले हम आपको कुछ बताएं हमारा आपसे अनुरोध है कि किन्नर सामान्य व्यक्तियों की ही तरह एक इंसान होते हैं इसलिए उनके साथ लिंग के आधार पर भेदभाव करना गलत है. हमारा समाज किन्नरों से परिचित है. किन्नर पैदायशी रूप से न ही स्त्री है न ही पुरुष बल्कि प्रकृति ने इन्हें अन्तः लिंगी अथवा अलैंगिक स्वरुप का बनाया हुआ है. अधिकतर किन्नर पुरुष शारीरिक संरचना के होते हैं लेकिन उनका व्यवहार स्त्रियों जैसा होता है.

आपको बता दें कि इनकी जिंदगी बाहर से जितनी अलग होती है उतनी ही अंदर से रहस्यमयी होती है. इन लोगों के समाज में रीती रिवाज़ हर धर्मों से अलग होते हैं. आज हम आपको इनके अंतिम संस्कार के रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे.

ऐसे होता है किन्नरों का अंतिम संस्कार :

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किन्नर कि मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार सबसे छुपाकर किया जाता है. सबसे चौंकाने वाली बात तो ये है कि एक विशेष समुदाय के किन्नर की मौत होती है तो इनके समुदय से बाहर के किन्नरों से छुपाया जाता है. ऐसा करने के पीछे ऐसी मान्यता बताई जाती है कि मरने वाला किन्नर अगले जन्म में किन्नर पैदा नहीं होता.

सबसे चौंकाने वाली बात तो ये है कि इनके शव को अग्नि नहीं दी जाती बल्कि इन्हें दफनाया जाता है.सबसे हैरान करने वाली बात तो ये है कि किन्नरों के मौत के बाद उनके अतिम संस्कार से पहले उनके शव को जुटे चप्पलों से पीटा जाता है और इनकी शवयात्रा दिन में नहीं रात में निकाली जाती है. किन्नरों की मौत के बाद पूरा समुदाय एक हफ्ते तक खाना नहीं खाता है.

मौत के बाद मातम नहीं मनाते किन्नर :

किन्नर समाज कि सबसे बड़ी विशेषता ये है कि किसी भी किन्नर की मौत  के बाद ये लोग मातम नहीं मनाते. ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे मरने वाले किन्नर को इस नर्क से छुटकारा मिल जाता है. किन्नर समाज किसी भी किन्नर की मौत के बाद शोक नहीं बल्कि ख़ुशी मनाते हैं और पैसा दान करते हैं.

देखें किन्नरों के अंतिम संस्कार के रहस्य पर बना ये विशेष वीडियो –