आपको जानकर हैरानी होगी कि जब भगवान स्त्री की रचना कर रहे थे तो काफी समय लग रहा था, कहा जाता है स्त्री को बनाते-बनाते कम से कम से भगवान को छ दिन हो गये थे. इतनी लंबी प्रतक्रिया को देखकर देवदूत भी परेशान होकर भगवान से पूछने लगे कि आपको इस रचना में इतना समय क्यों लग रहा है.

तब भगवान बोले आप इस रचना के गुणों के बारे में नहीं जानते, यह एक ऐसी रचना है जो कि दुख आने पर भी हमेशा खुद को खुश रखती है.साथ ही अपने परिवार को हमेशा खुश रखने के लिए वह खुद दुखों को सह लेती है.

इसके अन्दर काफी सहनशक्ति व दया की भावना होती है, लाख गलती करने के बाद भी वह बच्चों को दिल से लगा लेती है. अपने घर -परिवार के प्रति सब कुछ त्याग देते है.इसके गुणों के बारे में जितनी तारिफ करें उतना कम है.

इतने गुण देखने के बाद देवदूत ने स्त्री को हाथ लगाया और बोले भगवान इसके अन्दर इतनी अच्छाइयां है परंतु यह तो बहुत ही नाजुक है फिर कैसे सभी दुखों को अपने ऊपर झेल सकती है, तो फिर भगवान बोले यह बाहर से जितना नाजुक है यह अन्दर से इतनी ही कठोर है.

भगवान ने देवदूत को समझाया कि यह मेरी एक ऐसी रचना है जो कि हर परेशानी का मुकाबला कर सकती है.इतना सुनकर ही देवदुत आगे बढ़े और उसके आखों के नीचे गालों को हाथ लगाया तो उसे गीला गीला महसूस हुआ तो देवदूत बोले ये पानी जैसा गीला गीला क्या है, तो भगवान ने उत्तर दिया की यह आंसू है, देवदूत बोले आंसू किस लिए ? तो फिर भगवान मुस्कुराए और कहा जब  भी इसके ऊपर कोई संकट आता है तो यह उससे निपटने के लिए यह  रोने लगती है इससे इसकी सारी पीड़ा आंसूओं में बहल जाती है.

 

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स्त्री के पास आंसू एकमात्र ऐसा तरीका है जिससे वह अपने सारे दुखों को भूल जाती है और हर समस्या का हल खोज लेती है. इतनी सारी अच्छाइयों को सुनकर देवदुत बोले भगवान आप महान है जो कि आपने स्त्री जैसी खूबसूरत रचना की.भगवान ने स्त्री को काफी सोच समझ कर बनाया है इसीलिए कहा जाता है भगवान की बनाई हुए इस रचना का सम्मान करना चहिए,उससे कभी भी दुख नहीं देने चाहिए.