अमरनाथ हमले का एक और खुलासा क्या वाकई सलीम बस चला रहा था या कोई और ये रहा सच..

सावन माह के पहले सोमवार को हुआ था हमला

साल के पवित्र माह के श्रावण माह में प्रथम सोमवार को अमरनाथ यात्रा कर वापस लौट रहे गुजरात के यात्रियों पर अनंतनाग में आतंकियों ने हमला कर दिया जिसमें 7 लोगों की मौत हो गयी मरने वालों में 5 महिलाए शामिल हैं. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बाद आतंकियों ने इस घटना को दिया अंजाम. जिसमे ड्राईवर की बहादुरी की चर्चा इस समय मीडिया पर बनी हुई है. बस के चालक मुस्लिम सलीम ड्राईवर ने बस के सामने से हो रही भारी गोलीबारी का सामने करते हुए बस की स्पीड और तेज़ कर दी. जिसके बाद बस में सवार बाकी श्रद्धालुओं की जान बच सकी.

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किस तरह आतंकियों ने घटना को दिया अंजाम

आपको बता दें सोमवार की शाम जब 3 बस अमरनाथ से यात्रा करके लौट रही थीं तो एक बस का टायर पंचर हो गया था. पंचर की वजह से बस कुछ देर रुकी और बाकी 2 बसों से थोड़ा पीछे रह गई. जैसे ही बस ठीक हुई और आगे चली आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. वह द्रश्य कितना भयावह होगा यह कल्पना से भी दूर है. आतंकवादियों ने दर्शन करके लौट रहे हिन्दू यात्रियों पर 3 तरफ से गोली बरसानी शुरू की और लगातार बरसाते रहे.

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ड्राईवर सलीम के इस कदम से बची थी कई लोगों की जान…

पुलिस के मुताबिक़ बस 7 बजे के बाद हाईवे पर गई थी जो नियमों के विरुद्ध है लेकिन  क्या इसका मतलब ये है 7 बजे के बाद आतंकियों को हमला करने की इजाजत है ?  जब बस पर हमला हुआ था तो ड्राईवर कुछ देर तक समझ नहीं पाया था क्या करूं ! उसने बिना कुछ सोचे समझे बस की स्पीड बढ़ा दी और उस इलाके से बस को निकलाना चाहा.  ड्राईवर सलीम की ही हिम्मत थी कि बस में कई यात्री सुरक्षित बच गये नहीं तो हादसा और भी गंभीर हो सकता था. वो मुसलमान है और उसने हिन्दू यात्रियों को बचाया है शायद इस बात का ज़िक्र कोई नहीं करेगा लेकिन सच यही है सलीम की ही दिलेरी से बस में अनेक यात्री सुरक्षित बच गये.

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पहले से थी हमले की खबर ..

आतंकवादियों ने पहले पुलिस चौकी पर हमला किया था और फिर आगे चलकर यात्रियों पर लेकिन पुलिस तब भी सो रही थी.  यह बात सभी जानते हैं  कुछ दिन पहले ही IB ने हमले की आशंका बताई थी और लोगों को सचेत किया था हालाकिं कश्मीर के हुर्रियत कॉन्फ्रेंस नेता सैयद अली शाह गिलानी ने यात्रियों पर हमले की आशंका को खारिज करते हुए कहा था कि यात्री हमारे मेहमान है.

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जान बचाने वाले बस ड्राईवर सलीम को लेकर विवाद

वहीं तरफ गुजरात के एक बड़े अख़बार दावा कर रहा है कि बस सलीम नहीं बल्कि हर्ष चला रहा था. अमरनाथ आतंकी हमले में जान बचाने वाले ड्राईवर सलीम को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि यात्रियों की जान सलीम नहीं बल्कि हर्ष ने अपनी जान पर खेलकर लोगों की जान बचायी है. जो कि गोली लगने के बाद अस्पताल में भर्ती है.

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सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबर

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट में लिखा हुआ है कि बस को खुद बस मालिक का बेटा हर्ष देसाई चला रहा था. उसमे लिखा गया है कि बस को करीब 25 आतंकियों ने घेर लिया था. जिसमे से एक आतंकी ने तो बस में अन्दर तक घुसने की कोशिश की थी जिसे बस के कंडक्टर ने आतंकवादी को धक्का देकर बाहर कर जल्दी से बस का दरवाजा बंद कर दिया. पोस्ट में लिखा हुआ है कि जब हर्ष को गोली लगी थी उस दौरान वह खुद बस चला रहे थे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही गुजरात के एक बड़े अख़बार की तस्वीर शेयर हो रही है जिसमे लिखा है कि गोली लगने के बाद हर्ष का दिमाग सुन्न पड़ गया था.

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सोशल मीडिया पर वायरल खबर का सच

खबर के अनुसार मिली जानकारी के लिए सच का पता करने के लिए बस ड्राईवर सलीम व मालिक के बेटे हर्ष से जब बात की गयी तो हर्ष ने बताया कि हमारी बस 70-80 की स्पीड से चल रही थी. अचानक से आतंकियों ने गोली चलाना शुरू कर दिया पहले तो हमें लगा कि पटाखे चल रहे हैं लेकिन जैसे ही पता चला कि हमारी बस पर आतंकी दनादन गोली बरसा रहे थे तभी मैंने सलीम भाई से कहा कि बस को रोकना मत तभी सलीम भाई ने नीचे झुककर बस को भगाते रहे में सलीम भाई के पास बैठा हुआ था उसी दौरान एक गोली मुझे आकर लगी. सलीम भाई ने जबतक सेना का कैंप नहीं दिखा तब तक बस को नहीं रोका वह जाकर जब हमने बस को रोका तो सेना के जवानों ने हमारी सहायता करना शुरू कर दिया.

हर्ष और सलीम से बात करने के बाद यह बात स्पष्ट हो गया है कि गुजरात के अख़बार द्वारा निकली खबर बिलकुल झूट है !

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