पाकिस्तान को आतंकवाद को शय देना पड़ा महंगा: अमेरिका ने उठाया ऐसा कदम अगर ऐसा ही रहा तो पाकिस्तान भूखा मर जायेगा.

आतंकी मुल्क पाकिस्तान पर पड़ी अमेरिका की लाठी  

आतंकी मुल्क पाकिस्तान हमेशा से ही आतंकवाद को फलने-फूलने में मदद करता रहा है. कई देशों ने समु-समय पर पाकिस्तान को हर वाजिब तरीके से ये समझाने की कोशिश की कि वो आतंकियों को शय देना बंद कर दे लेकिन पाकिस्तान कहाँ ही सुनने वाला था. एक समय तो ऐसा आया जहाँ इस आतंकवाद के आका बने पाकिस्तान को दुनिया ने बहिष्कार कर दिया था, पाकिस्तान पूरे जहाँ से अलग-थलग होने की कगार पर पहुँच गया था लेकिन फिर भी उसने आतंकवाद का साथ नहीं छोड़ा. अब इसे आतंकियों को शय देने का नतीजा ही कहेंगे कि पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए अमेरिका ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसके बाद पाकिस्तान की कमर टूटती नज़र आ रही है.

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जान लीजिये क्या है अमेरिका का वो कदम जिसने तोड़ दी है पाकिस्तान की कमर 

काफी समय से पाकिस्तान को समझाने के बावजूद पाकिस्तान की तरफ से आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस कदम ना उठता देख अमेरिका ने एक ठोस कदम उठाते हुए ये निर्णय किया है कि अमेरिका अब पाकिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय मदद से हाथ खींचने वाला है. मिली ख़बरों के अनुसार अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में ये फैसला लिया गया है कि अबतक अमेरिका पाकिस्तान को डिफेन्स फंडिंग के नाम पर जो भी मदद दे रहा था उसमे जल्द ही नयी शर्ते और कड़े कानून बनने वाले हैं. बता दें ये शर्तें आतंकवाद और संबंध को लेकर हैं जिसके बारे में  इससे पहले भी कई शीर्ष अमेरिकी अधिकारी और सांसद लगातार अपनी चिंता जता चुके हैं.

अमेरिकी सदन में पारित इस विधेयक से रक्षा मंत्री को पाकिस्तान को अबतक दी जाने वाली वित्तीय सहायता दिए जाने के लिए शर्तें लागू की गयीं है. जिनमे से पहली शर्त के अनुसार पाकिस्तान को अमेरिका की तरफ से मिलने वाली कोई भी वित्तीय सहायता पर अपना हक़ जताने से पहले ये साबित करना पड़ेगा कि पाकिस्तान ग्राउंड्स लाइंस ऑफ कम्यूनिकेशन (GLOC) पर अपनी तरफ से सुरक्षा बनाए रख रहा है. बताते चलें कि जीएलओसी सैन्य इकाइयों को आपूर्ति मार्ग से जोड़ना वाला और सैन्य साजो-सामान के परिवहन के लिए बनाये गए मार्ग को कहा जाता है.

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पाकिस्तान को नहीं मिलेगा अमेरिका की तरफ से फण्ड जबतक…

यानी कि यहाँ ये कहना गलत नहीं होगा कि आतंकवादी संगठनों को फलने-फूलने में पूरी मदद देने वाला पाकिस्तान अब आतंकवाद के मोर्चे पर खुद ही बुरी तरह घिरता हुआ नजर आ रहा है.  US की प्रतिनिधि सभा ने पाकिस्तान को रक्षा क्षेत्र में मदद के लिए दी जाने वाली अमेरिकी फंडिंग में कई शर्तें जोड़ दी हैं.

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अब अमेरिका के इस सख्त रवैये के बाद अब जब तक  सेक्रटरी ऑफ स्टेट इस बात की पुष्टि नहीं करते कि पाकिस्तान अमेरिका द्वारा घोषित किसी भी आतंकवादी को सैन्य, वित्तीय मदद या साजो-सामान उपलब्ध नहीं करा रहा, तब ही पाकिस्तान को दिया जाने वाला फंड जारी किया जाएगा। अपने 6 महीनों के कार्यकाल में ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान को कई बार आतंकवाद पर उसकी भूमिका को लेकर चेतावनी दे चुका है.

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शुक्रवार को कांग्रेस की निचली सदन ने 651 अरब डॉलर वाले नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट 2018 के इन तीनों विधायी संशोधनों को ध्वनिमत से पारित कर दिया. सदन ने 81 के मुकाबले 344 मतों से इसे पारित किया है.  यूँ तो अमेरिका हमेशा से ही आतंकवाद के खिलाफ रहा है लेकिन इस तरह अचानक से पाकिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय मदद से हाथ खींचने का सीधा और साफ़ मतलब तो यही निकाला जा सकता है कि हो ना हो ये कदम पीएम मोदी के हाल ही में लिए गए अमेरिकी दौरे का असर है. याद हो तो पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की हाल में ही की गयी मुलाक़ात के बाद कई मौकों पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैया ही देखने को मिला है.

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