हर्ष या सलीम की वजह से नहीं बल्कि इस शख्स की वजह से बची अमरनाथ हमले में कई लोगों की जान?

अमरनाथ यात्रा के लिए इस बार पहलगाम और बालटाल- इन दो रूटों से 29 जून को बेहद कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच शुरू करने का इंतजाम किया गया था.  आपको बता दें इस बार यात्रा के लिए केवल 11000 लोगों को अनुमति दी गयी थी जबकी करीब 1 लाख लोगों ने इस यात्रा के लिए आवेदन किया था.   45 दिनों तक चलने वाली यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पूरे मार्ग पर सैटलाइट ट्रैकिंग सिस्टम, ड्रोन्स, मोबाइल बंकर वाहन और रोड ओपनिंग पार्टीज (आरओपी) की तैनाती की गई थी. सुरक्षा प्रबंधों को पुख्ता बनाने के लिए केंद्र ने राज्य सरकार को 40 हजार अर्धसैनिक बल और प्रदान किए थे लेकिन फिर भी आतंकियों ने हमला करते हुए 7 लोगों को मार गिराया और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए.

 

कैसे हुआ आतंकी हमला…

आपको बता दें सोमवार की शाम जब 3 बस अमरनाथ से यात्रा करके लौट रही थीं तो एक बस का टायर पंचर हो गया था. पंचर की वजह से बस कुछ देर रुकी और बाकी 2 बसों से थोड़ा पीछे रह गई.   जैसे ही बस ठीक हुई और आगे चली आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू करदी. वः द्रश्य कितना भय्व्य होगा यह कल्पना से भी दूर है. आतंकवादियों ने दर्शन करके लौट रहे हिन्दू यात्रियों पर 3 तरफ से गोली बरसानी शुरू की और लगातार बरसाते रहे.

अगर मुकेश ना होता तो और यात्रियों की भी जान जाती…

जिस बस पर आतंकी हमला हुआ था उस बस में ड्राईवर के साथ उसका हेल्पर मुकेश भी था. मुकेश ने खुद बताया कि उन्होंने एक आतंकी को लात मारकर उसे बस से धकेला था और बस का दरवाजा बंद किया था. सोचने मात्र से उनकी रूह कांप गयी थी अगर बस का दरवाजा खुला होता तो कैसे खून की नदियाँ भ जाती.

 

मुकेश ने बताया क्या हुआ था जैसे ही बस पर हमला हुआ…

मुकेश के अनुसार गोलियां सामने से भी मारी जा रहीं थी इसलिए बस की स्पीड कुछ कम हो गयी लेकिन वो लोग रुके नहीं, इतने में ही एक आतंकी ने बस में चढ़ने की कोशिश की और मुकेश ने बड़ी बहादुरी से उसे लात मार दी. मुकेश कहते हैं यह समझना मुश्किल था कि आखिर हमला क्यों हुआ है और सभी अपनी जान बचाने के लिए बस की सीट के नीच घुस रहे थे.

 

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अमरनाथ की पहली यात्रा कर रहे थे मुकेश…

आगे मुकेश ने बताया  ने 8 महीने पहले ही ‘ओम ट्रैवल्स’ में काम करना शुरू किया था और अमरनाथ के लिए यह उनकी पहली यात्रा थी. पटेल ने बताया, ‘उस रात मैं हमेशा की तरह ड्राइवर के कैबिन के पास बैठा हुआ था और बस का दरवाजा खुला था। हम अनंतनाग के पास थे, हमने देखा कि सड़क पर कुछ लोग हमारी तरफ आ रहे थे. इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते, आतंकियों ने गोलियों की बारिश करनी शुरू कर दी। बस के मालिक का बेटा हर्ष तब तक घायल हो चुका था। एक गोली लगभग मेरे कान को चीरते हुए निकली और ड्राइवर को बस की स्पीड कम करनी पड़ी.

 

 

हर्ष ने कहा था दरवाजा बंद करने के लिए…

मुकेश ने आगे बताया कि उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था जब हमला हुआ लेकिन उसे हर्ष( बस के मालिक का बेटा ) उसकी आवाज़ सुनाई दे रही थी और उसने उसे सुनते हुए बस का दरवाजा बंद किया. सलीम बिना मुड़े बस चलता रहा और इस तरह कई लोगों की जान बच गयी.

पहले से थी हमले की खबर…

आतंकवादियों ने पहले पुलिस चौकी पर हमला किया था और फिर आगे चलकर यात्रियों पर लेकिन पुलिस तब भी सो रही थी.  यह बात सभी जानते हैं  कुछ दिन पहले ही IB ने हमले की आशंका बताई थी और लोगों को सचेत किया था हालाकिं कश्मीर के हुर्रियत कॉन्फ्रेंस नेता सैयद अली शाह गिलानी ने यात्रियों पर हमले की आशंका को खारिज करते हुए कहा था कि यात्री हमारे मेहमान है.

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तो इस वजह से हुआ था हमला…

एक खबर के अनुसार आतंकी  बटेंगू में पुलिस जीप पर फायरिंग कर रहे थे लेकिन उसी मुठभेड़ के वक्त यात्रियों से भरी बस बीच में आ गई. इसलिए यात्री हमले के शिकार हो गए, वजह जो भी थी हमला इतनी सुरक्षा के बीच होना वाकई बहुत गलत है.

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