चौंकाने वाला खुलासा : सेना ने जिन 3 आतंकियों को ढेर किया है उसमें एक पाकिस्तानी है और बाकी के दो…

कश्मीर में भारतीय सेना को आतंकियों के खिलाफ एक बार फिर बड़ी कामयाबी मिली है.  दरअसल  भारतीय सेना ने 40 फूट ऊपर छुपे 3 आतंकियों को मार गिराया है. इन तीनों आतंकवादियों का संबंध जैश ए मोहम्मद आतंकी संगठन से था.  आपको बता दें ये दूसरी बार है जब अमरनाथ हमले के बाद   भारतीय सेना ने आतंकियों को मार गिराया है. मारे गये 3 आतंकियों को लेकर कई बड़े खुलासे हुए हैं जिनमें से एक खुलासा ऐसा है जो काफी चौकाने वाला है.

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फिर करने वाले थे हमला…

मरे गये तीन आतंकियों के नाम मुख़्तार, हसन और परवेज़ था और यह तीनों आतंकी एक बार फिर अमरनाथ में हमला करने वाले थे. कुछ दिन पहले ही त्राल में लश्कर कमांडर अबू दुजाना और जाकिर मूसा की सीक्रेट मीटिंग हुई थी. माना जा रहा है कि ये तीनों भी इस मीटिंग में शामिल हुए थे. आपको बता दें त्राल में हिजबुल को अब उखाड़ फेका जा चुका है और इसी का फायदा उठाते हुए जैश संगठन वहां अपना हक जताने आया था.

 

जिस गुफा में रहते थे उसमें मौजूद थी सभी सुविधाएं…

तीनों आतंकवादी त्राल में एक 40 फूट ऊंची गुफा में रहते थे और वहीं हमले की तैयारी कर रहे थे, गुफा के अंदर प्राइवेट रूम से लेकर सोफे तक सभी चीज़ों का इंतज़ाम था.  जब पुलिस ने गुफा के अंदर जाकर देखा तो वो भी दंग रह गये थे.   गुफा में बेड भी था और प्राइवेसी के लिए परदे भी लगे थे.

 

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सेना ने जैसे ही हमला किया तो आतंकवादियों ने…

आपको बता दें जैसे ही भारतीय सेना ने आतंकियों पर हमला किया था वहां मौजूद आतंकियों ने उन्हें गाली दी और उनपर सिलिंडर भी फेंका.  इसके बाद भारतीय सेना ने उनपर आंसू गैस छोड़ी और उन्हें वहीं ढेर कर दिया.  इस सब में सबसे ख़ास बात ये रही कि सेना ने जिन आतंकियों को मारा उसमें से 1 पाकिस्तान के थे और दो कश्मीर के रहने वाले.

 

 

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जब  अमरनाथ यात्रियों पर हमले का भारतीय सेना ने लिया पहला बदला….

सावन के पहले सोमवार पर ही आतंकियों द्वारा अमरनाथ यात्रियों पर हमला किया गया था. इस हमले में जहाँ 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गयी थी तो वहीँ 19 लोग घायल भी हुए थे. इस हमले के पीछे एक बड़ी वजह बताई गयी कि हो ना हो पिछले कुछ समय में आतंकियों के हर वार का भारतीय सेना द्वारा दिया गया मुंहतोड़ जवाब ही एक बड़ा कारण है जिसकी बौखलाहट में आतंकियों ने ये हमला किया. हालाँकि इस बात को आधार तो नहीं माना जा सकता लेकिन इसे गलत ठहराने का भी कोई ठोस कारण हमे नहीं नज़र आ रहा. भारतीय सेना का उग्र रूप देखकर अब शायद आतंकी भी समझ गए हैं कि अब अगर वो भारत पर गलती से भी एक वार करते हैं तो भारतीय सेना उन्हें कहीं का नहीं छोड़ेगी.

भारतीय सेना ने लिया पहला बदला

ऐसे में निर्दोष अमरनाथ यात्रियों पर हुए अफसोसजनक हमले के बाद भला भारतीय सेना क्यों ही चुप रहती? तो हम आपको बता दें  कि अभी आई एक खबर के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के बडगाम इलाके में सुरक्षा बलों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए तीन आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया है.

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बताया जा रहा है सेना और सुरक्षा बलों के बीच ये  मुठभेड़ मंगलवार से ही लगातार जारी थी. ऐसे में अब आई इस बड़ी खबर के अनुसार  सुरक्षाबलों ने बुधवार तड़के ही तीन आतंकियों को ढेर करने मे सफलता पाई है. बताया जा रहा है कि इन तीनो आतंकियों के पास से बड़े पैमाने पर हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है जिससे अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि ये आतंकी अमरनाथ यात्रा के बाद भी किसी बड़े हमले की फ़िराक में थे, लेकिन वो कुछ भी गलत कर पाते इससे पहले ही वो भारतीय सेना के हत्थे चढ़ गए.

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ख़बरों के अनुसार सुरक्षाबलों ने मंगलवार देर रात को एक गांव में आतंकियों को घेर लिया था और तब से ही रुक-रुक कर सेना और आतंकियों के बीच गोलीबारी जारी थी. इस बात की जानकारी देते हुए एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सोमवार को अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले के बाद आतंकवादियों की तलाश में सुरक्षा बल महगाम इलाके में तलाशी अभियान चला रहे थे कि इसी दौरान एक गांव में घेराबंदी डाले  सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम पर देर शाम 7.30 बजे आतंकवादियों ने गोलीबारी कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हुई।

भारतीय सेना का ये कदम, अमरनाथ में मारे गए बेकसूर यात्रियों की मौत का पहला बदला माना जा रहा है. बताते चलें कि पिछले काफी समय से सेना का आतंकियों पर उग्र रूप देखने को मिला है जहाँ आतंकियों के एक वार पर सेना पलटवार करते हुए उन्हें ऐसी पटकनी देती है जिसके बाद आतंकियों की बौखलाहट उजागर हुई है.

बताया जा रहा है कि  गांव को घेरकर आतंकवादियों से लोहा लेने वाली टीम में सीआरपीएफ, सेना की ऐंटी टेरर यूनिट राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू एवं कश्मीर पुलिस का विशेष अभियान समूह शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक, मृतकों की शिनाख्त अभी तक नहीं हो पाई है. लेकिन बताया जा रहा है कि वे स्थानीय ही हैं. हालांकि, वे किस संगठन से जुड़े हुए हैं, इसके बार में भी अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली हैं.

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