आखिर अटल जी के पार्थिव शरीर को क्यों लपेटा गया था तिरंगे में, क्या होता है राजकीय सम्मान, जानिए यहाँ !

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई जी की अंतिम यात्रा में देश के हर हिस्से लोग शामिल होने आये थे. उन्हें राजकीय सम्मान के साथ इस दुनिया से विदा किया गया. इस दौरान उनके शव को तिरंगे में लपेटा गया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर अटल जी के शव को तिरंगे में क्यों लपेटा गया. आखिर ये राजकीय सम्मान क्या होता है और किसे मिलता है ? अगर नहीं जानते तो आज हम आपको बतायेंगे राजकीय सम्मान के बारे में.

अटल जी के शव को तिरंगे में लपेटा गया था जोकि राजकीय सम्मान का ही हिस्सा था (फोटो सोर्स: दैनिक जागरण)

राजकीय सम्मान होता क्या है ?

राजकीय सम्मान जिस व्यक्ति को दिया जाता है उसके शव को तिरंगे में लपेटा जाता है. राजकीय सम्मान मिलने वाले शख्स की अंतिम यात्रा का सारा खर्च राज्य सरकार या फिर केंद्र सरकार वहन करती है. तिरंगे के अलावा अंतिम यात्रा में बंदूकों की सलामी भी जाती है. यह सब उस व्यक्ति द्वारा देश को दिए गये महत्वपूर्ण योगदान को सम्मान देने के एक शानदार तरीका होता है.

किसे मिलता है राजकीय सम्मान ?

अब सवाल यह कि आखिर राजकीय सम्मान किन्हें मिल सकता है. सबसे पहले तो ये जान लीजिये कि यह सम्मान देश के बड़े नेताओं को दिया जाता है, जिनमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री शामिल होते हैं. हालांकि राजकीय सम्मान देश की सेवा करने वाले जवानों को भी दिया जाता है. इन सबके बाद केंद्र सरकार और राज्य सरकार को अधिकार होते हैं कि वो किसी भी व्यक्ति को राजकीय सम्मान दे सकती है.

स्वर्गीय अटल जी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ भारत रत्न भी थे (फोटो सोर्स: न्यूज़ 18)

पहले ऐसा था कि राजकीय सम्मान कुछ चुनिन्दा लोगों को ही दिया जाता था लेकिन अब इसमें बदलाव कर दिया गया है. साहित्य, कानून, सिनेमा, विज्ञान जैसे क्षेत्रों में बेहतर काम और महत्वपूर्ण योगदान देने वालों को भी राजकीय सम्मान दिया जाता है. इसके साथ-साथ केंद्र सरकार या राज्य सरकार की सिफारिश के बाद नागरिक सम्मान पाने वाले लोगों जैसे भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण से सम्मानित शख्सियत को भी राजकीय सम्मान के साथ दुनिया से विदा किया जाता है.

इसी साल श्रीदेवी का भी राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था. इसके लिए महाराष्ट्र राज्य सरकार ने सहमति दी थी. आपको बता दें कि सबसे पहले महात्मा गाँधी को राजकीय सम्मान दिया गया था.

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