हामिद अंसारी के बयान पर बीजेपी और शिवसेना ने ऐतराज जताते हुए कही ऐसी बातें कि, पूर्व राष्ट्रपति भी सोचने पर हो जायेंगे मजबूर

अपनी विदाई पर अंतिम भाषण देते हुए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपरोक्ष रूप से केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा बहुत अहम है. एक दिन पूर्व राज्यसभा TV को दिए गए एक साक्षात्कार में अंसारी ने इस मुद्दे को उठाया था. हामिद अंसारी ने ये भी कहा कि देश के मुस्लिमों में बेचैनी है और वो खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

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अंसारी के द्वारा दिए गए इस बयान के बाद भाजपा और शिवसेना के नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है. उनको अंसारी का बयान नागवार गुजरा है. भाजपा नेताओं ने तो इस बयान को लेकर कहा कि ये उपराष्ट्रपति के पद की गरिमा के खिलाफ है वहीँ शिवसेना ने हामिद अंसारी के इस बयान पर और भी तीखी टिप्पणी दी है.

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हामिद अंसारी के बयान पर शिवसेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. राज्यसभा में शिवसेना के सांसद संजय राउत ने अंसारी के बयान पर कहा कि अगर अंसारी जी को मुस्लिमों में बेचैनी और असुरक्षा की भावना दिखती है तो इस विषय को लेकर उनके द्वारा पहले ही पद से इस्तीफ़ा क्यों नहीं दिया गया. जब उनकी विदाई का समय आ गया तब उन्हें ये मुद्दा याद आया और उन्होंने इस तरीके का बयान दिया.

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हामिद अंसारी के बयान पर भारतीय जनता पार्टी के मुस्लिम प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि मुसलमानों के लिए सारी दुनिया में हिन्दुस्तान से अच्छा कोई भी मुल्क नहीं है और मुसलमानों का हिंदुओं से बेहतर कोई दोस्त नहीं है. हुसैन के इस बयान से साफ़ हो जाता है कि एक मुस्लिम होते हुए उनको भारत में मुस्लिमों के लिए कोई असुरक्षा की भावना नहीं दिखती.

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वहीं गिरिराज सिंह ने कहा कि पूरे विश्व में भारत के नागरिकों से ज्यादा सुरक्षित और कोई नहीं है. उन्होंने कहा कि, ‘भारत में कोई कुछ भी कह सकता है, कोई भी पत्थरबाजों का समर्थन कर सकता है, कोई भी अलगाववादियों का समर्थन कर सकता है. इस देश में आधी रात को आतंकियों के लिए कोर्ट खुल सकते हैं, यही वजह है कि हिंदू और मुसलमान सभी यहाँ सुरक्षित हैं. भारत जैसा मुल्क कोई नहीं है.’

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हामिद अंसारी के बयान पर आपत्ति जताने वालों में कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी शामिल है उन्होंने कहा कि, ‘मुझे ये लगता है कि देश के शीर्ष पद पर बैठकर इस तरह का बयान देना ठीक नहीं है. मैं अंसारी के बयान से सहमत नहीं हूँ. तीन-चार घटनाओं के आधार पर आकलन करना सही नहीं है. हज़ारों उदाहरण ऐसे भी मिल जाएंगे कि हिन्दू-मुसलमान मिलकर एक साथ रहते हैं.’   

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अंसारी ने एक इंटरव्यू  कहा था कि देश के मुस्लिमों में बेचैनी का अहसास और असुरक्षा की भावना है. अंसारी का उपराष्ट्रपति के तौर पर दूसरा कार्यकाल समाप्त हो चूका है उनकी उम्र 80 साल है. अंसारी ने ये भी कहा कि उन्होंने असहनशीलता का मुद्दा पीएम मोदी और उनकी कैबिनेट के सामने उठाया है.