इतना आसान नही है चीन के लिए भारत से युद्ध करना, जरा इस सच्चाई को जान ले चीन फिर भारत से उलझे

भारत-चीन विवाद

भारत और चीन के डोकालाम में तनातनी बढती जा रही है. चीन हर बार 1962 के युद्ध की तरह धमकी दे रहा है. पिछले एक महीने से यह विवाद चल रहा है दोनों देश की सेना का सीमा पर जमावाड़ा लगा हुआ है. चीन भारत को लाख गीदड़ भरी धमकियां दे रहा है. सिक्किम, भूटान और भारत की त्रिकोणीय सीमा मिलती है वहां चीन अपनी सड़क बनाने के लिये सीमा में घुसना चाह रहा था.जिसके लिये भूटान आर्मी के साथ भारतीय आर्मी ने सड़क बनाने से रोक दिया था. उसके बाद चीन ने मानसरोवर यात्रा पर गये यात्रियों को अपनी सीमा में नहीं घुसने दिया तथा यात्रा पर रोक लगा दी.  india

Source

 हर बार की तरह भारतीय सीमा में फिर की घुसपैठ 

चीन बार बार धमकी दे रहा है लेकिन वह यह भूल रहा है कि भारत से युद्द करने के लिए उसे कितनी सेना की जरुरत होगी. सोमवार को भारत के उत्तराखंड के चमोली में चीनी सेना भारतीय सीमा में प्रवेश कर आयी थी. हालांकि हमारी सेना के कड़े विरोध ने चीनी सेना को वापस जाने के लिए विवश कर दिया. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन इलाकों में जुलाई और अगस्त के महीने में हर बार चीनी सैनिक देखे जाते हैं. ऐसा ही कुछ इस बार भी देखने को मिला.

Source

भूलकर भी युद्ध हुआ तो चीनी सेना का होगा भयंकर नुकसान

बता दें कि LAC की लम्बाई 4 हजार किलोमीटर है. इस समय पूरी LAC पर भारतीय सेना की 12-13 डिवीज़न तैनात हैं. आपको आसानी से बता दें कि सेना की एक डिवीज़न में करीब 12-15 हजार जवान होते हैं. इस हिसाब से फिलाहल में भारत चीन सीमा पर भारत के डेढ़ लाख जवान तैनात हैं. युद्ध की भाषा में आपको बतायें तो पहाड़ों पर लड़ाई करने के लिए हमला करने वाली सेना को 9 गुना अधिक होना चाहिए. इस तरह चीन को भारत से युद्ध करने के लिए कम से कम साढ़े 13 लाख जवानों की ज़रूरत पड़ेगी.

Source

चीन के पास साढ़े 22 लाख जवान सक्रीय

आपको बता दें कि इस समय चीन के पास साढ़े 22 लाख सक्रीय जवान हैं. जिसमें से अगर चीन को भारत से मुकाबला करना है तो अपनी दो तिहाई सेना यानी कि साढ़े 13 लाख जवान सीमा पर तैनात करने होंगे. इस हिसाब से इसकी सम्भावना कम है.

Source

वर्ष 2007-2016 तक चीन ने इतनी बार की घुसपैठ 

आपको बता दें कि चीन ने पहली बार भारतीय सीमा में घुसपैठ नहीं की है.आंकड़ों के अनुसार इससे पहले भी चीन 2007-2016 के बीच में चीनी सेना ने 40 बार से ज्यादा भारतीय सीमा में घुसपैठ की है.

Source

जानिये क्या हुआ था 1962 में

चीन को यह समझ लेना चाहिए कि अब हमारे भारतीय सैनिकों के होसले उतने ही बुलंद हैं जितने पहले थे तथा साथ में संसाधन के मामले में भी हम पीछे नहीं हैं. अगर चीन ने अब गलती से भी युद्ध के बारे में सोचा तो भारत चीन को मुहतोड़ जवाब के साथ मुह दिखाने लायक नहीं छोड़ेगा. 1962 का समय भारत के लिये बेहद चुनौती पूर्ण था. चीनी सैनिक हिंदी-चीनी सैनिक भाई-भाई का नारा लगाते हुए भारतीय सेना में प्रवेश कर गये थे. देखते-देखते चीन ने पं नेहरु के पंचशील सिद्धांतों को भूलते हुए भारत के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी थी.

Source

1962 के समय मेजर शैतान सिंह की बहादुरी की कहानी

उस समय की लड़ाई के वैसे तो भारतीय सेना के कई किस्से मशहूर हैं. लेकिन मेजर शैतान सिंह और उनकी कम्पनी सी ने 1962 के समय में भारतीय सेना की बहादुरी को लेकर एक मिशाल कायम कर दी. लद्दाख की ऊँची बर्फीली पहाड़ियों के चूशुल में मेजर शैतान सिंह अपनी कम्पनी को लीड कर रहे थे. चीनी सेना को मुख्यतौर पर आर्टीलरी सहायता मिल रही थी. रात भर चार्ली कम्पनी पर भारी गोलीबारी के बाद उम्मीद के मुताबिक अगले दिन चीन के 2000 से अधिक सैनिक सुखी नदी के तल से जैसे ही खुले में आये वैसे ही मेजर शैतान सिंह की हैवीमशीन गनों ने अपना काम शुरू कर दिया. 20 चीनी सैनिकों के मुकाबले 1 भारतीय सैनिक था लेकिन मेजर शैतान सिंह ने जवानों का होसला नहीं टूटने दिया. इस भीषण लड़ाई में बुरी तरह जख्मी होने के बाद मेजर चीनी जवानों पर टूट पड़े थे.लड़ाई में गोलियां खत्म होने के बाद भी जवान चीनी सैनिकों पर खाली हाथ टूट पड़े थे. इस जंग में हमारे भारतीय जवान दुश्मनों पर मौत बनकर टूटे थे !

Source

कुछ भारतीय सैनिकों ने 1700 चीनी सैनिकों को मार गिराया था

चीन की सेना के पीएलए के प्रवक्ता ने भारत को 1962 के युद्ध की हार की याद दिलाते हुए कहा कि भारतीय सेना युद्ध करने को ज्यादा बेचेन न हो. चीन बार-बार यही धमकी दे रहा है कि इस बार हालात 1962 से भी बुरे होंगे यह सब बोलने से पहले चीन को लद्दाख का इतिहास देख लेना चाहिए. लद्दाख इलाके में हमारे कुछ भारतीय सैनिकों ने 1700 चीनियों को मौत के घाट उतार दिया था. तब के समय भारतीय राजनीतिक नेतृत्व की कमजोरी के कारण हमे अपनी हजारों वर्ग किलोमीटर जगह खोनी पड़ी थी. लेकिन अब हालात बिलकुल उलट हैं.

Source

भारत को पहले जैसे हालत बनाये रखने के लिये सेना हटानी होगी

इसी के साथ चीनी राजदूत ने बताया कि चीनी सरकार भारत सरकार से शांति बनाये रखना चाहता है l अगर भारत को पहले जैसे हालात बनाये रखने हैं तो उसे डोकालाम इलाके से अपनी सेना को हटाना पड़ेगा l राजदूत ने कहा आगे की बातचीत करने के लिये सेना को हटाना बहुत जरुरी होगा l

Facebook Comments