पड़ोसी देश की सरकार का एलान -16 की उम्र तक के बच्चे को नहीं सिखा सकते क़ुरान और हर मस्जिद में लगाना होगा राष्ट्रीय ध्वज !

” हवा  का रुख बदल रहा है, मैं काफी डरा हुआ हूँ…वो लोग एक बार फिर यहां वही कर रहे हैं

जो बहुत पहले हुआ था”

एक इमाम के इन शब्दों को पढ़ने के बाद हर कोई हैरान है,आखिर ऐसा क्या हुआ है जो उन्हें यह कहना पड़ रहा है ? दरअसल मामला चीन का है  जहां मुस्लिम समुदाय की हालत काफी खराब है. अब आपको ये बताएं कि चीन में  मुस्लिम परेशान क्यों  हो गए हैं ?  आपको यह जानना ज़रूरी है कि उनकी इस हालत के ज़िम्मेदार “इस्लामिक आतंकवाद” और कट्टरपन है…

ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरवा दिए गए थे ( image source : dainik jagran )

तो क्या चीन में सरकार मुस्लिमों को खत्म करना चाहती है ?  

दरअसल चीन की सरकार ( कम्युनिस्ट पार्टी ) चीन में बचे-कुचे मुसलमानों से काफी सख्ती से पेश आ रही है, ऐसे में चीन में रह रहे मुसलमान काफी मुश्किल में हैं.  चीन में एक इलाका है गांसू प्रांत जिसे  ‘लिटिल मक्का’ के नाम से जाना जाता है. इसी इलाके में चीन के मुसलमान रहते हैं और अब सरकार ने यहां पर कुछ ऐसे नियम ला दिए हैं जिसके बाद यहां रह रहे मुसलमानों का जीना मुश्किल हो गया है. एक समय था  जब इस इलाके में मुस्लिम बच्चों का राज़ हुआ करता था, बच्चों को सिर्फ और सिर्फ नमाज़ पढ़ना और क़ुरान में लिखी बातें पढ़ाई जाती थीं लेकिन अब सरकार ने  आदेश दे दिया है कि यहां 16 साल से कम उम्र के बच्चे नज़र नहीं आयेंगे.  शायद,  सरकार को अंदेशा है यदि अभी इन्हें नहीं रोका गया तो आगे चलकर चीन के हालात खराब हो सकते हैं.

तो क्या नास्तिक सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी मुस्लिम बच्चों को धर्म और इस्लामिक शिक्षा से दूर रखना चाहती है ?

 

बच्चों के साथ-साथ इमाम को लेकर भी आये नए नियम ! 

चीन की सकरार ने आदेश जारी किये हैं कि किसी  भी 16  साल से छोटे बच्चे को इस्लामिक शिक्षा नहीं दी जायेगी,  मस्जिद के सभी इमाम का सर्टिफिकेशन किया जाएगा जिसके बाद ही उन्हें इमाम की पदवी मिलेगी. सरकार ने हर उस मस्जिद पर नज़र बना रखी है जिसमें हर साल हज़ारों मुस्लिम बच्चे छुटियों में आते थे और कुरान सीखते थे, अब सरकार के नए नियमों के बाद यहां चंद बच्चे देखने को मिल जाते हैं. अधिकाँश बच्चे 16 की उम्र पार होने के बाद रोज़ी-रोटी की तलाश में लग जाते हैं और ऐसे में उनका ध्यान धर्म से हट जाता है.

ये है चीन के मुसलमानों की कुल आबादी ( survey dainik jagran )

चीन की सरकार ने  बच्चों के पेरेंट्स को कहा है कि बच्चों को धर्मनिरपेक्ष बनाया जायेगा जिसके लिए उनकी क़ुरान की पढ़ाई रोक दी गयी है.  यहां के रहने वाले उइगुर समुदाय के लोगों को सरकार ने  शिक्षा शिविरों  में भेज दिया है. जहां उन्हें क़ुरान नहीं पढ़ाई जायेगी और न ही दुनियाभर में मौजूद मुसलमानों की तरह दाढ़ी बढ़ाने दी जायेगी.

नागरिकों को दे दी गयी है चेतावनी ! 

चीन में  मुस्लिम नागरिकों को सरकार द्वारा चेतावनी दी गई है कि नाबालिगों को कुरान पढ़ने या धार्मिक गतिविधियों के लिए मस्जिदों में जाने का  समर्थन करने वालों पर नज़र रखी जायेगी.  इतना ही नहीं यहां की सभी मस्जिदों पर देश का झंडा लगाने को कहा गया है और  355 मस्जिदों से अभी तक लाउडस्पीकर हटा दिए गए हैं.

साल 1996 में जिन मस्जिदों को तोड़ा गया था उनकी जगह कहीं-कहीं गधे रखने का स्टैंड बना दिया गया था ( image source : dainik jagran )

 पहले भी हो चुका है चीन में मुसलमानों का हाल- बेहाल !! 

आज से करीब 22 साल पहले जब चीन में  धार्मिक- सांस्कृतिक क्रांति  आयी थी तो उस वक़्त मस्जिदों को तोड़ दिया गया था, और कुछ जगह पर तो गधे बाँध दिए गए थे. इसके बाद वहां मुसलमान वाकई डर हुए हैं , इस डर का कारण चीन की सरकार द्वारा उठाए गए कदम हैं जो राष्ट्रहित की दिशा में एकदम सही हैं. यदि सही समय  पर पहले और अब  भी सरकार ने यह कदम नहीं उठाये होते तो आज शायद चीन की हालत कुछ और होती !!

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