G-20 समिट में बदल गए चीन के हाव-भाव भारत से सीमा विवाद को लेकर कही ऐसी बात, जिसकी नहीं थी उम्मीद

सीमा-विवाद के बाद जब आमने-सामने आए भारत, चीन के नेता 

भारत और चीन के बीच हाल ही में सीमा विवाद गहरा गया था. एक तरफ चीन, भारत को पीछे हटने को कह रहा था तो दूसरी ओर भारत चीन को उसकी मनमानी करने से रोक रहा था. इस विवाद को लेकर चीन और भारत के मीडिया में भी कई ख़बरें चलीं. चीन के सरकारी अखबार में भारत को धमकाने के लिए कई ख़बरें छापी गईं. वहीं भारत में भी चीन की मनमानी के खिलाफ खूब लिखा गया. दोनों के बीच चल रहे विवाद से लग रहा था कि अब दोनों देशों के बीच हालात बिगड़ जाएंगे लेकिन चीन ने अपना रुख बदला है.

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बदले दिखे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के हाव भाव 

जर्मनी में G-20 समिट में चीन के राष्ट्रपति के हाव-भाव बदले हुए दिखे सोचा तो ये जा रहा था कि वो भारत से बात नहीं करेंगे लेकिन हुआ इसका उल्टा. जिनपिंग ने भारत के साथ हो रहे सीमा विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की बात की. चीन के राष्ट्रपति ने जी-20 समिट से अलग ब्रिक्स देशों से अपील की कि वे क्षेत्रीय संघर्षों और विवादों का राजनीतिक व शांतिपूर्ण समाधान खोजने का पूर्ण प्रयास करें.

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क्या कहा चीन के राष्ट्रपति ने 

चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिंहुआ के मुताबिक़ शी जिनपिंग ने जर्मनी के हैमबर्ग में ब्रिक्स देशों के नेताओं की अनौपचारिक बैठकों में यह अपील की कि वो आपसी सहयोग से काम करें. शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों के सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि, वैश्विक मुक्त अर्थव्यवस्था का सतत निर्माण करें, बहुपक्षवाद को समर्थन दें और साझा विकास को प्रोत्साहित करने में मदद करें.

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इस समिट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित रूस के राष्ट्रपति पुतिन दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ब्राजील के राष्ट्रपति मेकर टेमेर ने भी शिरकत की. रिपोर्ट्स से पता चला है कि इस बैठक की अध्यक्षता चीन ने की और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने समूह के सदस्यों से कहा कि वो विवादों का शांतिपूर्ण समाधान खोजें और आपस में उलझें नहीं. चूँकि चीन इस बैठक की अध्यक्षता कर रहा था तो किसी विवाद को लेकर वो गलत रुख नहीं अपना सकता था ये वजह भी रही कि उसने भारत से सीमा विवाद को लेकर कुछ नहीं कहा.

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भारत से नहीं उलझेगा चीन

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने G-20 सम्मलेन शुरू होने से पहले एक विश्लेषण में लिखा था कि,  ‘भारत और चीन को एक दूसरे के साथ संबंध बढ़ाने चाहिए.’ अखबार ने आगे लिखा कि, ‘अगर पीएम मोदी एक संवेदनशील नेता हैं तो इतने तनाव के बीच भी जो वर्तमान आर्थिक सहयोग की दिशा है उसे वह नहीं बदलेंगे. वॉशिंगटन में 26 जून को प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच काफी दोस्ताना दिखा. इसी दौरान भारतीय सैनिक सिक्किम के ज़रिए सीमा पार कर चीनी इलाक़े में घुस गए. शायद भारत चाहता है कि वह चीन के मुकाबले अमेरीका के ज़्यादा नजदीक रहे.’

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हालांकि ये चीन का नजरिया है सच्चाई ये है कि चीन के सैनिकों ने भारतीय सीमा पर अतिक्रमण करने की कोशिश की थी. जिसको भारतीय सैनिकों ने रोका था. चीन को अपनी गलती कभी नहीं लगती लेकिन सारे देश जानते हैं कि चीन अपनी मनमानी करता है.

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ख़ैर वास्तविकता अखबार के विश्लेषण से अलग है सत्य ये है कि भारत से बड़ा बाज़ार चीन को और कहीं नहीं मिल सकता और इसी कारण वो भारत से उलझना नहीं चाहता क्योंकि इससे उसे घाटा उठाना पड़ेगा. इसीलिए G-20 के समिट में शी जिनपिंग के हाव-भाव बदले लगे.

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