डोकलाम में बेवजह भारत से उलझने के चलते चीन की 8800 करोड़ की डील पर भारत ने उठा दिया ऐसा कदम

भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के बीच भारत ने चीन के प्रति अपना रवैया सख्त कर दिया है. जब से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद शुरू हुआ है तब से चीनी मीडिया में आए दिन भारत को लेकर तरह-तरह की बातें छापी जाती हैं. चीनी सरकार अपने मीडिया का इस्तेमाल करके भारत के खिलाफ ज़हर उगलता रहता है. अब भारत-चीन के बीच चल रहे इस मसले का इस्तेमाल करके पाकिस्तान भी भारत से उलझने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में भारत ने भी अब चीन को सबक सिखाने के लिए अपना रुख कड़ा कर दिया है.

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8800 करोड़ रुपये की डील पर भारत ने लगा दी रोक 

भारत की कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए चीनी कंपनी शंघाई फोसुन के भारतीय कंपनी ग्लैंड फार्मा की मेजॉरिटी स्टेक खरीदने के लिए 8800 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर आपत्ति जता दी है. इस सारे वाकये को भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के चलते बहुत अहम माना जा रहा है. भारत के इस कदम से चीन को साफ़ संदेश मिल गया है कि अगर वो मनमानी करने की कोशिश करेगा तो भारत भी उसके प्रति सख्त रवैया अपनाएगा.

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चीन की डील को मंजूरी देने से किया गया था इंकार 

सूत्रों के मुताबिक़ बीते महीने CCEA की एक बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से इंकार कर दिया गया था. इस डील को मंजूरी न देने के पीछे ये वजह बताई गई कि हैदराबाद की ग्लैंड फार्मा के पास मॉडर्न इंजेक्टेबल टेक्नोलॉजी है और अगर चीन के साथ ये डील होती है तो ये टेक्नोलॉजी उसके पास चली जाएगी और भारत नहीं चाहता कि किसी विदेशी मुल्क के हाथों में ये टेक्नोलॉजी जाए और खासकर चीन के हाथों में तो बिलकुल नहीं.

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इस प्रस्ताव को मंजूरी इंटर मिनिस्ट्रियल बॉडी फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) ने अप्रैल माह में दी थी. इस के बाद बोर्ड ने CCEA को ग्लैंड फार्मा के 8 हज़ार 800 करोड़ रुपए के फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रपोजल को मंजूर करने के लिए एक सिफारिश भेजी थी. चीन की कंपनी ने इसके बाद अपनी सब्सिडियरी कंपनियों फोसुन फार्मा इंडस्ट्रियल लि., एंपिल अप लि., लस्टरस स्टार लि., फोसुन इंडस्ट्रियल कंपनी लि. और रीगल गेस्चर लि. के जरिये से ग्लैंड फार्मा की स्टेक खरीदने का प्रस्ताव सामने रखा था.

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FIPB द्वारा मंजूर किये गए इस प्रस्ताव के मुताबिक़ अगर यह डील हो जाती तो इससे फोसुन को ग्लैंड फार्मा के अन्य स्टेकहोल्डर्स से एक या एक से अधिक किस्तों में कंपनी की 100 प्रतिशत भागीदारी खरीदने के कंट्रैक्चुअल राइट खरीदने के अधिकार मिल जाते. आपको बता दें कि FIPB  को 5 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रपोजल्स को मंजूरी देने के लिए CCEA की मंजूरी की आवश्यकता होती है.

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भारत ने दे दिया चीन को संदेश 

भारत द्वारा फोसुन पर यह फैसला सिक्किम सेक्टर के निकट भारत और चीन की सेनाओं में बढ़ते तनाव के चलते लिया गया है सिक्किम सेक्टर में पिछले तीन महीनों से ऐसे ही हालात बने हुए हैं. जब ग्लैंड फार्मा से चीन की कंपनियों के द्वारा संपर्क किया गया तो ग्लैंड फार्मा ने कहा कि उसे अब तक सरकार की तरफ से कोई भी जवाब नही मिला है. रवि पेनमेत्सा जोकि ग्लैंड फार्मा के वाइस चेयर मैन हैं ने कहा कि, ‘हमें किसी भी सरकारी कार्यालय की तरफ से इस बारे में आधिकारिक सूचना अब तक नहीं मिली है.’ स्पष्ट है कि भारत सरकार ने चीन को संदेश दे दिया है कि अगर वो सीमा पर बेवजह विवाद पैदा करेगा तो भारत भी उसको सबक सिखाएगा.

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