चीन की धमकियों का भारत पर नहीं हुआ कोई असर इसलिए अब चीन ने अपने अधिकारी भारत भेजकर..

चीन के सामने भारत ने डोकलाम विवाद में पहले ही अपना रुख साफ़ कर दिया था. भारत ने साफ़ शब्दों में कह दिया था कि चीन किसी दूसरे के क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं कर सकता, लेकिन इसके बाद भी चीन ने अपनी मनमानी जारी रखी और वो भारत को धमकाने की कोशिश करता रहा. हालांकि उसकी इन खोखली धमकियों का भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और भारत ने अपना रुख बरकरार रखा.

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चीन की अकड़ हुई ढीली भारत भेजे अपने अधिकारी

अब डोकलाम विवाद पर चीन की अकड़ ढीली होती दिख रही है. पहली बार ऐसा लग रहा है किदोनों देशों के बीच सुलह हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक़ दोनों देशों के सीनियर सैन्य अधिकारियों के बीच बैठक हुई और इस बैठक में बातचीत के जरिये मसले का हल निकालने की पहल की गई. आपको बता दें कि डोकलाम विवाद को लेकर भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच ये बैठक सिक्किम के नाथू-ला में हुई थी. हालांकि इस बैठक की कोई आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है.

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चीन करना चाहता था मनमानी 

चीन ने भारत की सीमा के पास अपने सैनिक भेज कर 16 जून को सड़क बनाने की नाकाम कोशिश की थी जिसके बाद 18 जून को भारत ने डोकलाम में अपने सैनिक भेज कर चीन की नापाक कोशिशों को विफल कर दिया था. इसके बाद चीन झल्ला गया था और उसने भारत के खिलाफ कई बातें कहीं थी. उसका साथ उसके मीडिया ने भी दिया, चीन के मीडिया में भी आए दिन भारत के खिलाफ बातें छापी जाती हैं लेकिन अब लगता है कि चीन समझ गया है कि भारत उसकी धमकियों से डरने वाला नहीं है और इसीलिए अब वो बातचीत के ज़रिये मामले को सुलझाने की बात कर रहा है.

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उसके द्वारा जो भी काम किया जा रहा है उसके पीछे सबसे बड़ी वजह है उसकी पूँजीवादी सोच. वो एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है इसी वजह से अपने पड़ोसी मुल्कों पर दबाव बना रहा है. चीन पड़ोसी मुल्कों की सीमाओं पर अतिक्रमण करने की कोशिश करता है और जब वो देश उसके खिलाफ कदम उठता है तो चीन प्रताड़ित किये जाने वाले देश को ही दोषी करार दे देता है.

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हालांकि ये बात तो साफ़ है कि चीन चाहे जितनी भी कोशिशें कर ले वो किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकता और खासकर भारत का तो बिलकुल नहीं क्योंकि भारत से उसके कई स्वार्थ जुड़े हैं और ऊपर से भारत आज के दौर में इतना शक्तिशाली हो गया है कि चीन भारत पर अगर युद्ध थोपता है तो उसको बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. चीन भी इन बातों को अच्छी तरह से जानता है और इसीलिए अब उसकी अकड़ ढीली होती दिख रही है.

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भारत डोकलाम विवाद का हल बातचीत से ही चाहता था लेकिन चीन अकड़ में था वो इस मुद्दे को लेकर कोई बातचीत नहीं करना चाहता था. उसके रवैये ने धीरे-धीरे विवाद को और बढ़ा दिया था. अब उम्मीद है कि चीन और भारत आपस में बातचीत के द्वारा इस मुद्दे का हल निकालेंगे.

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