राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस के ही विधायकों द्वारा किया गया ऐसा काम कि आने वाले चुनावों में मिल सकती है हार

कई दिनों से जिस बात की चर्चाएँ चल रही थी वो 20 जुलाई को आकर थम गई. गुरुवार 20 जुलाई को भारी मतों से रामनाथ कोविंद की जीत हुई और वो देश के अगले राष्ट्रपति घोषित हो गए. हालाँकि एनडीए द्वारा जब कोविंद का नाम राष्ट्रपति पद के लिए घोषित किया गया था तब से ही वो सुर्खियां बटोरने लगे थे. कांग्रेस ने राष्ट्रपति पद के दावेदार के रूप में मीरा कुमार को खड़ा किया था लेकिन उनको हार का सामना करना पड़ा. राष्ट्रपति चुनाव में हार के साथ ही कांग्रेस को एक और बुरी खबर मिली.

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आपको बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में बहुत बड़े पैमाने पर रामनाथ कोविंद के पक्ष में क्रॉस वोटिंग हुई. इसका मतलब ये हुआ कि जो वोट कांग्रेस के उम्मीदवार को मिलने चाहिए थे वो भी कोविंद को डाले गए. जिन राज्यों में सबसे ज्यादा क्रॉस वोटिंग हुई है उनमें से एक गुजरात भी है इसके अलावा महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, दिल्ली और गोवा वो राज्य हैं जहाँ कोविंद के पक्ष में क्रॉस वोटिंग हुई है.

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गुजरात में क्रॉस वोटिंग कांग्रेस के लिए बुरे सपने की तरह

गुजरात में हुई क्रॉस वोटिंग कांग्रेस के लिए एक बुरे सपने की तरह है क्योंकि अगले महीने ही गुजरात में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने वाले हैं. राज्यसभा के चुनावों के बाद इसी साल गुजरात में विधानसभा के चुनाव भी होने हैं. खबर ये आ रही है कि गुजरात में शंकर सिंह वाघेला के समर्थन में खड़े विधायकों ने रामनाथ कोविंद के पक्ष में वोट डाले. गुजरात में मीरा कुमार को 49 और रामनाथ कोविंद को 132 वोट मिले हैं. आपको बता दें कि गुजरात में भाजपा के 121 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के विधायकों की संख्या 57 है. इससे पता चलता है कि कांग्रेस के 8 विधायकों के द्वारा कोविंद के पक्ष में वोट डाले गए हैं. वहीँ दिल्ली में भी आप के कुछ विधायकों के द्वारा कोविंद के पक्ष में वोट डालने की बात कही जा रही है.

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देश की राजधानी दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रपति पद के दावेदार कोविंद को 6 जबकि मीरा कुमार को 55 वोट मिले हैं. जबकि दिल्ली में भाजपा के केवल चार ही विधायक हैं. इससे पता चलता है कि आम आदमी पार्टी के दो विधायकों द्वारा कोविंद के पक्ष में वोट डाले गए हैं. इसके उलट पश्चिम बंगाल में अलग ही तस्वीर देखने को मिली जहाँ मीरा कुमार को 273 और कोविंद को 11 वोट मिले हैं. वहां भी बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के केवल 6 ही वोट हैं. इससे साफ़ पता चल जाता है कि कोविंद को कुछ और पार्टियों के विधायकों द्वारा भी वोट दिए गए हैं.

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रामनाथ कोविंद को त्रिपुरा से भी वोट मिले हैं जबकि वहां बीजेपी का एक भी विधायक नहीं है. त्रिपुरा में मीरा कुमार को 53 वोट मिले हैं जबकि कोविंद को 7 वोट मिले हैं. इससे साफ़ पता चल जाता है कि कुछ कांग्रेस के विधायकों ने कोविंद को वोट दिया है क्योंकि त्रिपुरा में भाजपा का एक भी विधायक नहीं है.

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कांग्रेस के लिए ये चिंता का विषय होना चाहिए कि उसकी ही पार्टी के विधायक उसके खिलाफ़ जा रहे हैं. गुजरात में तो कांग्रेस जीत का सपना देख रही है लेकिन राष्ट्रपति चुनावों में हुई क्रॉस वोटिंग से उसको चिंता होनी चाहिए. इस तरह से गुजरात में उनके जीतने का सपना टूटू सकता है.

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