दिग्विजय सिंह ने अमरनाथ हमले के ज़रिये करनी चाही हिन्दू-मुसलमान की राजनीति लेकिन इस बार लोगों ने याद दिला दिया उन्हें उनका पड़ोसी.

अमरनाथ हमला पर कई बातें आपने आजतक सुनी होंगी. कभी नेताओं की गन्दी राजनीति तो कभी इस मामले पर हुआ कोई बड़ा खुलासा. इस हमले पर पहले ही 7 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत पर राजनीति करते हुए ‘आप’ की अलका लांबा ने कहा था कि ये हमला कोई आतंकी हमला नहीं है बल्कि 2017 में गुजरात में होने वाले चुनाव का प्रचार प्रसार है. अलका की इस बात का समर्थन करते हुए कन्हैया कुमार ने भी अलका लांबा की हाँ में हाँ मिलाते हुए उनका समर्थन किया था और कहा था कि, “आखिर ऐसे कैसे हो सकता है कि सिर्फ उसी बस पर हमला हुआ है जिसपर गुजरात की नंबरप्लेट लगी हो. कहीं ये सब 2017 चुनाव के मद्देनजर तो नहीं हो रहा है?”

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इसी बीच दिग्विजय सिंह ने अमरनाथ यात्रा पर एक ऐसा ट्वीट कर दिया है जिसके बारे में जानकर आपको भी उनकी सोच का पता चल जायेगा. दरअसल दिग्विजय सिंह का ये ट्वीट कथित तौर पर बस ड्राइव कर रहे सलीम पर है.

क्या कहा दिग्विजय सिंह ने? 

दिग्विजय सिंह ने बस ड्राईवर सलीम पर ट्वीट करते हुए कहा कि, “जहाँ एक तरफ अकेला सलीम 53 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बचा ले गया, वहीँ दूसरी तरफ पूरी ट्रेन भी मिलकर एक जुनैद को नही बचा सकी थी.” दिग्विजय सिंह के इस ट्वीट पर लोगों ने जमकर फटकार लगायी. लोगों ने दिग्विजय सिंह के इस ट्वीट पर ऐसी-ऐसी प्रतिक्रियाएं दी जिसे पढ़कर उनके पसीने छूट जायेंगें.

ट्विटर पर लोगों में दिग्विजय सिंह की इस ट्वीट पर काफी गुस्सा देखने को मिला. ऐसे में एक यूजर ने दिग्विजय सिंह की बात का जवाब देते हुए कहा कि, “एक जुनैद के मरने पर सारे हिन्दू आतंकवादी हो गये लेकिन 7 हिन्दूओं को मारने पर भी आतंकियों का धर्म मुस्लिम नहीं हुआ.” वाह!

तो वहीँ एक दूसरे यूजर राजीव ने कांग्रेस का कच्चा चिटठा खोलते हुए दिग्विजय सिंह को जवाब दिया कि, “एक अकेला नेहरू- गांधी परिवार सारे स्वतंत्रता सेनानियों का हक खा गया.  पूरी कांग्रेस एक भगत सिंह को भी ना बचा सकी।”

क्या था जुनैद हत्याकांड 

बता दें कि 16 साल का जुनैद, अपने भाई और अपने 2 दोस्तों के साथ दिल्ली से ईद के लिए खरीदारी कर वापस आपने गांव लौट रहे थे जिसके लिए उन्होंने सदर बाजार स्टेशन से बल्लभगढ़ जाने वाली ट्रेन पकड़ी. पुलिस में दर्ज एफआईआर के मुताबिक सफ़र में थोड़ा आगे जाते ही ट्रेन में सीट को लेकर जुनैद और कुछ लोगों में विवाद हुआ जिसके बाद दूसरे पक्ष के लोगों ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर जुनैद को मारना-पीटना शुरू कर दिया.

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हाल ही में इस हमले के आरोपी ने अपने कबूलनामे में बताया था कि, “उस दिन वो अपनी ड्यूटी खत्म कर शिवाजी ब्रिज से मथुरा में सवार हुआ था. ट्रेन में उसे पहले से ही जुनैद उसके भाईऔर दोस्त मिले जिन्होंने टोपी पहनी हुई थी. आरोपी ने बताया कि जब गाड़ी ओखला स्टेशन पर रुकी तो एक अधेड़ उम्र का आदमी भी इसी डिब्बे में आया और उसने मुस्लिम लड़कों से सीट देने के लिए कहा. उनमें से एक लड़का जो खड़ा था, वह नहीं हटा, तो अधेड़ व्यक्ति ने उन्हें मुल्ला शब्द से संबोधित करते हुए उसे दो थप्पड़ जड़ दिए.

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ज़ाहिर है इसपर जुनैद और उसके साथी भी अकड़ गए.जिसपर मुझे भी मुसलमान पर गुस्सा आ गया और मैंने उस अधेड़ उम्र के व्यक्ति और कुछ अन्य यात्रियों ने मिलकर उन मुस्लिम लड़कों को उनके धर्म के प्रति काफी अपशब्द कहकर उनको बुरी तरह मारा-पीटा था. आरोपी ने बताया कि मारपीट के बाद मुस्लिम लड़के तुगलकाबाद स्टेशन पर उतरकर दूसरे डिब्बे में चले गए. जब गाड़ी अन्य स्टेशन पर रुकती हई बल्लभगढ़ पहुंची तो सात-आठ मुस्लिम लड़के जिनमें वह मुस्लिम लड़के भी थे, आए और हमारे डिब्बे में कौन सा है, छोड़ेंगे नहीं कहकर ऊंची आवाज में धक्का-मुक्की करने लगे.”

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एक सीट पर छिड़ी इस लड़ाई का अंजाम ये हुआ कि लड़ाई जैसे-जैसे आगे बढ़ी दोनों पक्ष के लोग घायल हुए कि तभी इसी हमले में जुनैद की मौत हो गयी. तभी से इस मुद्दे को मीडिया में कुछ इस रूप में पेश किया गया है जैसे कि जुनैद को मारने के बाद हर हिन्दू आतंकवादी हो गया हो.

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