वीडियो: मोदी के सामने ही इजराइल के प्रधानमंत्री ने भारत से कर दी ऐसी “भावुक शिकायत” जिसे सुनकर मोदी हँसते रहे!

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एक साल के अतंराल पर भारत और इजराइल दोनों देश अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद हुए थे. इजराइल और हिंदुस्तान में एक ऐसा रिश्ता है जिसे बयाँ करना मुश्किल है. इजराइल बिना शर्त के भारत की मदद के लिए हमेशा खड़ा रहता है. इजराइल दुनिया भर में अपनी सुरक्षा तकनीकी और सैन्य शक्तियों के विख्यात है. वहीं अगर इजराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद की बात की जाय तो उसका नाम सुनते ही दुश्मनों के पसीने छूट जाते हैं. दोनों देशों के बीच काफी समानताएं होने के बाद भी इनके रिश्तों में गर्मजोशी कम ही दिखी. हिंदुस्तान में नरेंद्र मोदी को छोड़ दिया जाये तो इससे पहले कोई भी प्रधानमंत्री इस देश जाने को तैयार नही हुआ.

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इजराइल से हम दूर क्यों थे:

दरअसल इजराइल को मुस्लिम विरोधी माना जाता है और इसलिए हिंदुस्तान के पूर्व प्रधानमंत्रियों ने इजराइल से किनारा रखने में ही भलाई समझा जोकि अतर्राष्ट्रीय पटल पर गलत फैसला था. उन्हें लगता था कि अगर वो इजराइल का दौरा करते हैं तो उनक मुस्लिम वोटर उन्हें रूठ जाएंगे और जिसके कारण वो सत्ता से बाहर हो सकते हैं. इस लालच में इजराइल जैसे मजबूत देश की दोस्ती को धूमिल करते रहे.

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पीएम नरेन्द्र मोदी ने वोट बैंक की परवाह किये बिना देशहित में कदम उठाते हुए इजराइल जाने का निश्चय किया और जिसके बाद से इजराइल और भारत की दोस्ती फिर से चमकने को तैयार है. जब मोदी इजराइल पहुंचे तो वहां का नजारा देखने लायक था.

दोनों राष्ट्राध्यक्ष मिलते ही लगे गले:

पीएम मोदी और बेंजामिन नेतन्‍याहू की जैसे ही एअरपोर्ट पर पहली मुलाकात हुई दोनों ने एक दूसरे को गले से लगा लिया और खुश होकर एक-दूसरे से हाल-चाल पूछा. चलिए हम आपको इसका एक वीडियो दिखाते हैं जिसे देखकर आप खुद समझ जाएंगे कि दोनों के बीच दोस्ती किस तरह से परवान चढ़ रही है.  इस वीडियो को देखिये और खुद फैसला कीजिये कि क्या कभी किसी देश के प्रमुख को हमारे देश के प्रधानमंत्री का इस तरह से स्वागत करते हुए देखा है?

देखें वीडियो

इस वीडियो में गौर करने वाली बात ये है कि जब इजराइल के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी के स्वागत में हिंदी में कहा कि “आपका स्वागत है मेरे दोस्त” इसके बाद उन्होंने कहा कि “पीएम आपका इंतजार हमें 70 सालों से था.” वैसे देखा गौर किया जाये तो इन शब्दों में सिर्फ स्वागत वाले ही शब्द नही हैं इनमें एक भावनात्मक शिकायत भी है कि ‘मेरे दोस्त हमारे देश में आते-आते आपने 70 सालों का लम्बा समय लगा दिया.’

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वोट बैंक के खातिर हम इजराइल को दरकिनार करते रहे:

इजराइली प्रधानमंत्री के शब्दों से आप खुद समझ सकते हैं कि इजराइल के लिए भारत की क्या अहमियत है और वो किस हद तक भारत का साथ चाहता है. खुद में काफी सक्षम है इजराइल लेकिन फिर भी उसे भारत का साथ चाहिए और आज के समय में भारत को भी इजराइल का साथ चाहिए और इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी ने गजब की शुरुआत की है जिसकी सराहना करनी चाहिए. उन्होंने वोट बैंक के खातिर इजराइल को दरकिनार नही किया बल्कि आगे बढ़कर उसे गले लगाया. उम्मीद है दोनों देशों की ये दोस्ती आने वाले समय में और मजबूत होगी.

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पीएम मोदी ने रिश्ते में फूंकी जान:

जरा आप खुद सोचिये कि आज़ादी के बाद हम खुद में इतने उलझे रहेे कि इजराइल जैसे देश की तरफ देख भी नही पाए और वो देश हम पर हमेशा नजर बनाये हुए था. जब भी हमें जरूरत पड़ी बिना शर्त के वो हमारी मदद को तैयार खड़ा मिला और हम इस हिचक में थे कि इजराइल तो एंटी मुस्लिम देश है तो कहीं हमारे वोटर बिदग न जाये. अब अगर पीएम मोदी ने अनजाने रिश्ते को नाम देने की और मिठास घोलने की कोशिश की है तो उनकी सराहना करनी चाहिए.

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