जीत के बाद स्मृति इरानी से राज्यसभा में लोगों ने मांगी मिठाई तो इरानी बोलीं नरेश अग्रवाल से लीजिए क्योंकि वो मेरे…

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10 अगस्त गुरुवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में कई सांसदों को विदाई दी गई. इसी विदाई समारोह के दौरान सीपीआई(एम) के नेता सीताराम येचुरी को भी विदाई दी गयी, लेकिन उनकी विदाई समारोह में कुछ ऐसा हुआ जिससे कि वहां मौजूद सभी नेता भावुक हो गए.

इसी विदाई समारोह के दौरान भावुक हुए रामगोपाल यादव 

मौका था सीताराम येचुरी की विदाई का ऐसे में समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने अपने और सीताराम येचुरी की बात संसद में सबसे साझा करते हुए कहा कि, “मैं और सीताराम येचुरी एक साथ ही बैठते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. अगले सेशन में ये सीट खाली रहेगी जिसका मुझे काफी दुख रहेगा.”

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उन्होंने आगे कहा कि बहुत समय पहले ही उनकी पार्टी के नेता ने मुझे कहा था कि सीताराम येचुरी एक बड़े नेता बनेंगे. उन्होंने कहा कि आप पार्टी के महासचिव हैं आपको पार्टी के संविधान में बदलाव कर ना चाहिए और दोबारा सदन में वापस आना चाहिए.

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वहीं अहमद पटेल को बधाई देते हुए रामगोपाल यादव और कहा कि आपकी जीत ने पूरे देश को मिठाई खिला दी. उनके अलावा लेफ्ट के नेता डी. राजा भी बोलते हुए भावुक हो गए.

बता दें कि टीएमसी के नेता डेरेक ओ ब्रायन भी उनके विदाई देते हुए भावुक हुए. उन्होंने कहा कि, “मेरी बेटी मुझे कहती है कि मैं अब सीताराम येचुरी की तरह लगने लगा हूं. क्योंकि मैं अपने बाल कलर नहीं करता हूं.”

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आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि राज्यसभा में गुरुवार को उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को भी विदाई दी गई. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली और विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद समेत सभी पार्टियों के नेता ने अपनी बात रखी.

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यादें साझा करते हुए एक पल ऐसा भी आया जब रामगोपाल यादव ने स्मृति ईरानी से जुड़ा एक किस्सा संसद में साझा किया. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने राज्यसभा चुनाव जीत कर संसद पहुंची स्मृति ईरानी से मिठाई मांगी तो उन्होंने कहा कि, “नरेश अग्रवाल मेरे मायके से हैं, आप मिठाई उनसे ले लीजिये.”

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अपने विदाई भाषण में हामिद अंसारी ने कहा था कि…

ऐसे में उपराष्ट्रपति रहते हुए हामिद अंसारी ने एक आखिरी इंटरव्यू दिया था जिसमें उन्होंने मुसलमानों के बेचैनी और असुरक्षा की बात की थी. राज्यसभा के जाने माने पत्रकार करण थापर को दिए इंटरव्यू में अंसारी ने कहा कि देश के मुसलमानों में बेचैनी और असुरक्षा का माहौल है. जिसके लिए मैंने प्रधानमंत्री समेत मंत्रिमंडल के सदस्यों को भी अवगत कराया है. तीन तलाक के मुद्दे पर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह एक सामाजिक बिचलन है कोई धार्मिक जरुरत नही है धार्मिक जरुरत स्पष्ट है. लेकिन सामाजिक रीत रिवाज़  इसमें घुसकर हालत कुछ ऐसी बना चुके है जो अत्यंत अवांछित है. कोर्ट को इस मामले में दखल नही देना चाहिए क्योंकि सुधार समुदाय के भीतर से ही होंगे.

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कश्मीर के मुद्दे पर हामिद अंसारी ने कहा कि कश्मीर की समस्या एक राजनीतिक समस्या है इसका समाधान राजनीतिक तरीके से ही निकाला जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुसलमानों के अन्दर एक तरह की शंका है जिस तरह के बयान उन लोगो के खिलाफ दिए जा रहे है. मैंने देश के कई हिस्सों से यह बात सुनी पर यह बात उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में सुनने को मिलती है. अब सोचने वाली बात यह है कि क्या देश का मुसलमान सच में असुरक्षित है? क्या देश के मुसलमान सच में डरा हुआ है? क्या देश के उपराष्ट्रपति के पद पर रहकर भी उन्हें किसी तरह की शंका है?

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दरअसल आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब देश में होने वाली किसी झगडे, बहस या इससे भी बड़ी घटनाओं को लेकर और पिछले दिनों हुए कुछ  कथाकथित गोरक्षकों द्वारा जो शर्मनाक घटनाएं की गयी वो बेहद शर्मनाक तो है लेकिन इसका मतलब यह नही है कि उनको सजा नही मिली. अन्य घटनाओं की तरह इन घटनाओं को क्यों नही देखा जाता है? हर घटना को आज के समय हिन्दू मुस्लिम बताकर लोग बस राजनीति ही करना चाहते है. जमीनी हकीकत तो यह है कि सभी धर्म के लोग मिलकर काम कर रहे है. हामिद अंसारी की यह फोटो (जिसमें वो तिरंगे को सलामी नही दे रहे है) खूब वायरल हुई थी. इसी बात से हामिद अंसारी की कट्टरता को समझा जा सकता है कि एक देश एक बड़े और सम्माननीय पद पर बैठने के बाद भी उन्होंने तिरंगे को सलामी देना ठीक नही समझा.

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कुछ लोग जो खुद को मुसलमानों का मसीहा समझते है या कुछ लोग उन्हें अपना मसीहा बना लिए है ऐसे लोग हर मुद्दे को धर्म से जोड़कर देश को बदनाम करने की साजिश रच रहे है. तीन तलाक के मुद्दे पर जहां महिलायें इस तरह पीड़ित है कि वो चाहती है कि कोर्ट उन्हें इन्साफ दे. ऐसे मसले पर हामिद अंसारी शाहब कह रहे है कि इस मामले में कोर्ट दखल न दे. सच बात तो यह है कि आज कल हर मुस्लिम नेता यह कहकर लोगो से हमदर्दी पाना चाहता है कि उसके उपर अत्याचार हो रहा है. उनको डराया जा रहा है. लेकिन ये सभी बातें राजनीतिक ही होती है. कुछ घटनाओं से देश भर के मुसलमानों और हिन्दुओ के उपर टिप्पणी करना बेहद गलत है.

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