मासूमों की जान जा रही है लेकिन देखिये सीएम योगी के मंत्री क्या कह रहे हैं

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक दुखद घटना हुई. बाब राघव दास मेडिकल कॉलेज में लगभग 48 घंटे में 36 मासूमों की जान चली गई और मासूमों की मौत की ये संख्या अब 60 से भी ऊपर बताई जा रही है. आपको ये जानकर हैरानी होगी की तीन दिन पहले ही यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वहाँ का दौरा किया था. उनके इस दौरे के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने कोई सुधार नहीं किया उनका लापरवाही भरा रवैया जैसा था वैसा ही बना रहा. इस लापरवाही का अस्पताल प्रशासन पर तो कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन उनकी इस लापरवाही से कई मासूमों की जान चली गई. हालांकि अस्पताल प्रशासन ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से मौत की बात को सिरे से नकार रहा है.

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गोरखपुर में बच्चों की मौत से मचा हुआ है हड़कंप 

गोरखपुर में बच्चों की मौत के बाद चारों तरफ हड़कंप मच गया है. बच्चों की मौत से ये बात तो साफ़ हो गई है कि यूपी के अस्पतालों की हालत बहुत खराब है नहीं तो इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत होना संभव नहीं है. अबतक मौत का कारण लापरवाही को माना जा रहा है. इस घटना के बाद सूत्रों ने बताया है कि अभी भी अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई की भारी कमी है.

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इस घटना के बाद दावा ये किया जा रहा है कि अचानक 10 अगस्त की शाम को ऑक्सीजन की सप्लाई रुक गई और ऑक्सीजन सप्लाई रुकने का कारण था कि सप्लाई करने वाली कंपनी का पैसा बकाया था. जब बच्चों की मौत के बारे में गोरखपुर के जिलाधिकारियों को पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो अभी जांच की रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं. वहीँ दूसरी ओर यूपी के चिकिस्ता शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन भी ऑक्सीजन सप्लाई के रूक जाने को मौत का कारण नहीं मान रहे हैं.

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सीएम योगी के मंत्री का बयान 

वहीं गोरखपुर में बांसगाँव के बीजेपी सांसद कमलेश पासवान का बयान सुर्खियाँ बटोर रहा है क्योंकि उन्होंने बिना जांच के ही अपना पक्ष रख दिया है. उनको लगता है कि बच्चों की मौत का कारण ऑक्सीजन का ठप हो जाना है. ये बात जिलाधिकारी ने भी मानी है कि अस्पताल ने ऑक्सीजन सप्लाई कंपनी को बकाया राशि नहीं चुकाई थी.

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ऑक्सीजन सप्लाई का जिम्मा लखनऊ की निजी कंपनी पुष्पा सेल्स पर है गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में भी इसी कंपनी द्वारा सप्लाई दी जाती है. इस कंपनी से जो अनुबंध था उसके मुताबिक़ मेडिकल कॉलेज को दस लाख रूपए तक के ही उधार पर ऑक्सीजन मिल सकता था, लेकिन गोरखपुर मेडिकल कॉलेज पर 66 लाख रुपये से ज्यादा का बकाया था.

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कंपनी के द्वारा मेडिकल कॉलेज को उधार चुकाने के लिए पिछले 6 महीनों से चिट्ठियां लिखी जा रही थीं. एक अगस्त को कंपनी ने एक पत्र भेजकर यहाँ तक लिख दिया था कि अब तो हमको भी ऑक्सीजन मिलना बंद होने वाला है. पैसे चुका दो. इसके बाद भी पूरा अस्पताल प्रशासन जागा नहीं 10 तारीख को जैसे ही ऑक्सीजन की सप्लाई रुकी तो हड़कंप मच गया था.

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प्रशासन ने अब खुद को बचाने के लिए इन मौतों की अलग-अलग वजहें बताई हैं. अस्पताल के मुताबिक़ 7 अगस्त को 9 बच्चों की मौत हुई थी. इसके बाद 8 अगस्त को 12 बच्चों की मौत हुई. 9 तारीख को अस्पताल में 9 बच्चों की मौत हुई लेकिन 10 अगस्त को ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने के बाद ये आंकड़ा 23 पहुँच गया इसके बाद 13 बच्चों की मौत हुई. आज अस्पताल में हुई मौतों पर रिपोर्ट आ सकती है. मेडिकल कॉलेज चाहे कुछ भी बोले लेकिन ये बात साफ़ है कि लापरवाही तो हुई है इसमें अस्पताल प्रशासन और यूपी प्रशासन की भी ज़िम्मेदारी बनती थी. अगर ये लोग चौकन्ने होते तो इतने बच्चों की जान न जाती.