BRD मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने जो कहा उसपर गौर करना बेहद जरुरी है !

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गोरखपुर में बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में उस वक्त कोहराम मच गया जब लगातार मासूम बच्चों की मौत होने की ख़बरें आने लगी. ख़बरों का सिलसिला ऐसे चलता रहा कि वो 12 अगस्त की सुबह तक 30 और दोपहर तक 63 तक चला गया. परिजन रोते बिलखते मेडिकल कॉलेज परिसर में दिखाई दे रहे थे लेकिन उनकी सारी उम्मीद जा चुकी थी. कहा जा रहा है कि ये हादसा नही एक हत्या है लेकिन कुछ तथ्य ऐसे भी हैं जिसपर सोचना जरुरी है. दरअसल इस मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन गैस देने का काम जिस एजेंसी के पास था उसने मेडिकल कॉलेज को नोटिस दिया था कि ‘आपका बकाया ज्यादा हो चुका है और ऐसे में हम गैस सप्लाई रोक सकते हैं.’

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यहां एक चीज और गौर करनी चाहिए कि क्या मेडिकल कॉलेज ने बिल भुगतान के लिए योगी सरकार के पास अपनी बात पहुंचाई थी. जबकि कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी ने इस मेडिकल कॉलेज का दौरा भी किया था. वैसे अमूमन देखा जाता है कि जब कोई बड़ा अधिकारी, मंत्री या मुख्यमंत्री कोई दौरा करता है तो सम्बंधित विभाग सारी चीजें दुरुस्त दिखाने की कोशिश करता है, तो क्या मुख्यमंत्री योगी के सामने भी ऐसा ही करने की कोशिश की गयी थी?

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इस मामले में पत्रकारों से बात करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने जो कहा उससे पता चलता है कि सरकार को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करना शायद जल्दबाजी होगी. परिजनों का गुस्सा जायज है और वो सरकार से अपनी बात कह सकते हैं लेकिन इन सबके बीच जो दोषी हैं उनकी पहचान होनी जरूरी है.

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उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या से जब पूछा गया कि गैस एजेंसी का भुगतान हो गया है? तो KP मौर्या ने कहा कि ‘बकाये के बारे में हम जाँच करवाएंगे और सरकार के द्वारा कोई भी काम होता है तो उसका एक तरीका होता है टेंडर निकलता है और उसके जरिये काम आवंटित किये जाते हैं और अगर उस एजेंसी ने गैस सप्लाई ठप करने की चेतवानी दी है तो उस मामले में जांच की जाएगी और दोषियों को सजा जरूर होगी.’

ये कहा जा सकता है कि प्रदेश सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेकर जरूर कदम उठाने चाहिए लेकिन सिर्फ सरकार ही दोषी है ऐसा कहना ठीक नही होगा, क्योंकि इस मेडिकल कॉलेज की खुद की जिम्मेदारी बनती है कि उसके कॉलेज में जिस चीज की जरूरत है और उसे सम्बंधित विभाग से अवगत कराना, तो समय रहते ऐसा क्यों नही किया गया, वो जाँच का मामला जरूर बनता है.

जानिए गैस एजेंसी ने क्या कहा

वैसे इस लापरवाही का अस्पताल प्रशासन पर तो कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन उनकी इस लापरवाही ने कई मासूमों की जान ले ली. हालांकि अस्पताल प्रशासन ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से मौत की बात को सिरे से नकार रहा है.

ऐसे में सवाल ऑक्सीजन एजेंसी पर उठ रहे थे जिसका नाम पुष्पा गैस एजेंसी है. इस बीच जब एजेंसी से ये सवाल किया गया कि आखिर इतनी बड़ी गलती कैसे हुई तो जो जवाब मिला वो हैरान करने वाला था. कंपनी की HR ने बताया कि ‘ऐसे कोई ऑक्सीजन सप्लाई नहीं काट सकता है.’

आपको बता दें कि योगी ने कुछ दिन पहले ही वहां जाकर सब चीज़ की जांच की थी लेकिन अमूमन देखा गया है कि जब कोई बड़ा सरकारी अफसर ऐसी जगाहों पर आता है तो सभी चीज़ें बेहतर कर दी जाती हैं.

आपको बता दें यह सरकार की नहीं बल्कि कॉलेज प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि वो ऑक्सीजन देने वाली कंपनी का बकाया पैसा चुकाएं. मासूमों की जान जाने लगी तो कॉलेज ने 22 लाख बकाया राशि देने का फैसला किया और फिर पुष्पा गैस कंपनी ने ऑक्सीजन दी है.

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ऐसे में शक के घेरे में आता है तो वो शख्स जिसका काम मेडिकल कॉलेज को ऑक्सीजन देना है. सूत्रों की माने तो जिस कम्पनी के पास ऑक्सीजन सप्लाई करने का ज़िम्मा था उसके 68 लाख बकाया थे, जिसकी वजह से उसने ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी थी. जानकरी के लिए बता दें सरकार इन सब कामों के लिए टेंडर निकालती है और ऐसे में ज़िम्मेदारी टेंडर लेने वाली की हो जाती है ना कि सरकार की.

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जहां तक बात योगी के दौरे कि है तो एक सरकारी दौरे से पहले ही सूचना दी जाती है और सभी चीज़ें सही कर दी जाती हैं. अब बात ये है कि जब तक आधिकारिक रूप से कोई ठोस बयान नहीं आता है किसी भी नतीजे पर पहुंचना गलत है.