शर्मसार: देखिये जब गोरखपुर में बच्चों की जान जा रही थी तो योगी उस वक्त क्या कर रहे थे!

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12 अगस्त को गोरखपुर का BRD मेडिकल कॉलेज उस वक्त सुर्ख़ियों में आ गया जब वहां मासूम बच्चों की मौत की खबर आने लगी, एक नही दो नही बल्कि ये आंकड़ा देखते देखते लगभग 60 के पार पहुंच गया. पूरा प्रशासन हरकत में आ गया और योगी सरकार इसके पीछे का कारण खोजने लगी और खुद को बचाने के लिए सेफ पॉइंट. मीडिया में खबरे आने लगी कि ये हादसा ऑक्सीजन गैस की सप्लाई रोके जाने से हुआ है लेकिन सरकार शाम तक कहती रही कि मेडिकल कॉलेज में गैस की कोई कमी नही है और ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नही हुई है. सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा अगस्त महीने में अक्सर मौत होती रहती हैं.

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सिद्धार्थ सिंह के इस बयान पर मीडिया से लेकर जनता का गुस्सा फट गया और उन्हें लोग धिक्कारने लगे. जहाँ एक तरफ योगी के मंत्री इस मामले में लिपा-पोती कर रहे थे वहीं सूबे के मुखिया गोरखपुर पर कुछ भी बोलना मुनासिब नही समझे.

आपको बता दें कि योगी गोरखपुर से महज 250 किमी दूर इलाहाबाद में गंगा सफाई को लेकर एक कार्यक्रम में शिरकत करने तो पहुंचे लेकिन वहां न तो गोरखपुर में हुए मासूमों की मौत पर कुछ बोला और न ही बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज जाने की जहमत उठाई. एक या दो मौतें नही बल्कि 60 से भी ज्यादा बच्चे अपने माँ-बाप को छोड़कर प्राण त्याग दिए थे लेकिन योगी जी ने इसपर कुछ खास प्रतिक्रिया नही दी.

देखिये इस मामले में उपमुख्यमंत्री ने क्या क्या कहा!

इस मामले में पत्रकारों से बात करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने जो कहा उससे पता चलता है कि सरकार को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करना शायद जल्दबाजी होगी. परिजनों का गुस्सा जायज है और वो सरकार से अपनी बात कह सकते हैं लेकिन इन सबके बीच जो दोषी हैं उनकी पहचान होनी जरूरी है.

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उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या से जब पूछा गया कि गैस एजेंसी का भुगतान हो गया है? तो KP मौर्या ने कहा कि ‘बकाये के बारे में हम जाँच करवाएंगे और सरकार के द्वारा कोई भी काम होता है तो उसका एक तरीका होता है टेंडर निकलता है और उसके जरिये काम आवंटित किये जाते हैं और अगर उस एजेंसी ने गैस सप्लाई ठप करने की चेतवानी दी है तो उस मामले में जांच की जाएगी और दोषियों को सजा जरूर होगी.’

ये कहा जा सकता है कि प्रदेश सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेकर जरूर कदम उठाने चाहिए लेकिन सिर्फ सरकार ही दोषी है ऐसा कहना ठीक नही होगा, क्योंकि इस मेडिकल कॉलेज की खुद की जिम्मेदारी बनती है कि उसके कॉलेज में जिस चीज की जरूरत है और उसे सम्बंधित विभाग से अवगत कराना, तो समय रहते ऐसा क्यों नही किया गया, वो जाँच का मामला जरूर बनता है.

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