हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी मिलते ही इस डॉक्टर ने आधी रात में उठाया ऐसा कदम जिसके आज सोशल मीडिया पर चर्चे हैं

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक बड़ी ही दुखद ख़बर सामने आई है. दरअसल यहाँ बाब राघव दास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के चलते लगभग 48 घंटे में 63 मरीजों की जान जा चुकी है जिनमे से 36 मासूम भी शामिल हैं.  इस घटना के पीछे की वजह बताई जा रही है कि अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का समय पर भुगतान नहीं किया गया था जिसके चलते उन्होंने हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी थी जिसके चलते ये बड़ी घटना हुई है.

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आपको ये जानकर हैरानी होगी की तीन दिन पहले ही यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वहाँ का दौरा किया था. उनके इस दौरे के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने कोई सुधार नहीं किया उनका लापरवाही भरा रवैया जैसा था वैसा ही बना रहा.

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इस लापरवाही का अस्पताल प्रशासन पर तो कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन उनकी इस लापरवाही ने 36 मासूमों की जान ले ली. हालांकि अस्पताल प्रशासन ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से मौत की बात को सिरे से नकार रहा है.

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ऐसे में सवाल ऑक्सीजन एजेंसी पर उठ रहे थे जिसका नाम पुष्पा गैस एजेंसी है. इस बीच जब एजेंसी से ये सवाल किया गया कि आखिर इतनी बड़ी गलती कैसे हुई तो जो जवाब मिला वो हैरान करने वाला था. कंपनी की HR ने बताया कि ऐसे कोई ऑक्सीजन नहीं काट सकता है.

ऐसे में जहाँ इस लापरवाही से पूरे महकमे में हडकंप मचा दिया है वहीँ दूसरी तरफ गोरखपुर में हादसे के दौरान अपने फर्ज के अंजाम देने वाले डॉ कफील अहमद को उनके एक नेक काम के चलते सोशल मीडिया पर सलाम किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि डॉ कफील बाल रोग विशेषज्ञ हैं और हादसे के वक्त वो हॉस्पिटल में ही पोस्टेड थे.

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हादसा बेहद ही दुखद है, और इस बात की भी उम्मीद जताई जा रही थी कि आगे भी ऐसे मामले आ सकते हैं. ऐसे में इसी अनहोनी को होने से टालने के लिए डॉ कफील रात भर केवल अपने बलबूते पर ज्यादा से ज्यादा मरीजों को बचाने में लगे रहे. एक खबर के अनुसार गुरुवार की रात करीब दो बजे डॉ कफील को सूचना मिली कि कुछ देर में ऑक्सीजन खत्म हो जाएगी.

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ये बात सुनने की देरी ही थी कि डॉक्टर काफील को अंदाज़ा हो गया कि मामला काफी संगीन रुख ले सकता है. बिना वक़्त जाया किये डॉक्टर ने आनन फानन में अपने जानपहचान के डॉक्टरों के पास पहुंचे और ऑक्सीजन के तीन सिलेंडर अपनी गाड़ी में लेकर शुक्रवार की रात तीन बजे सीधे बीआरडी अस्पताल पहुंच गए.

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बताया जा रहा है कि इन तीन सिलिंडरों से बालरोग विभाग में सिर्फ 15 मिनट ऑक्सीजन की ही आपूर्ति की जा सकी. इन तीन सिलेंडरों से रातभर किसी तरह से काम चल पाया गया, लेकिन सुबह सात बजे एक बार फिर ऑक्सीजन खत्म होते ही अस्पताल में स्थिति गंभीर हो गई. बताया जा रहा है कि इसके बाद भी डॉक्टर अपने पूरी क्षमता से स्थिति को संभालने में लगे रहे. अब उन्होंने शहर के गैस सप्लायर से फोन पर बात की.

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डॉ.काफील ने इस सन्दर्भ में बड़े अधिकारियों को भी फोन लगाया लेकिन किसी ने उनका फोन नहीं उठाया. डॉ. कफील अहमद एक बार फिर अपने डॉक्टर मित्रों के पास मदद के लिए पहुंचे और करीब एक दर्जन ऑक्सीजन सिलेंडर का जुगाड़ किया.

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अबतक मिली जानकारी के अनुसार इतना सब करने के बाद कफील अहमद ने बिना देरी किए अपने कर्मचारी को खुद का एटीएम दिया और पैसे निकालकर ऑक्सीजन सिलेंडर लाने को भी कहा. डॉ.कफील पूरे समय मरीजों के पास ही बने रहे. डॉ. कफील के इन प्रयासों को देखकर वहां मौजूद लोगों ने डॉक्टर के कोशिशों की काफी प्रशंसा की. सोशल मीडिया पर भी डॉक्टर को बतौर हीरो देखा जा रहा है.

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बता दें कि इसी कड़ी में एक 9 दिन के मासूम बच्चे की भी मौत हो गयी है. बताया जा रहा है कि जब उस मृत बच्चे के पिता ने अपने बच्चे का मृत शरीर माँगा तो उनसे कहा गया कि अभी अधिकारी आए हैं, इसलिए उनके जाने के बाद ही आपको आपका बच्चा मिल जायेगा.

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आप ख़ुद ही सोचिये क्या बीती होगी उस माँ पर जब उन्हें इस तरह का जवाब मिला होगा, ऐसे में कोई मदद ना मिलती देख मृतक की मां ने महिला सीओ के पैरों में गिरकर उनसे कहा कि, “साब बच्चा तो मर गया, अब उसकी बॉडी तो दिला दो.”

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पहले बताया भी नहीं कि तुम्हारा बच्चा अब नहीं बचेगा…

अभी तक के मौजूदा हालात को देखते हुए अस्पताल प्रशासन की गलती ही सामने आ रही है. ऐसे में अस्पताल की इस लापरवाही की वजह से अपनी जान गँवा चुके 9 दिन के बच्चे के पिता नंदलाल ने कहा कि, “ऑक्सीजन की कमी से 9 दिन के बाद मेरा बच्चा मर गया. डॉक्टरों ने 1 घंटा पहले हमे यह तक बताना मुनासिब नहीं समझा कि अब तुम्हारा बच्चा नहीं बचेगा.”

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मृत बच्चे के पिता ने बताया कि लापरवाही से बच्चे की मौत मानो हमारे लिए काम दुखद थी कि अब अस्पताल प्रशासनहमें उसकी डेडबॉडी भी नहीं दे रहे हैं. बोल रहे हैं कि अभी अधिकारी साब आए हुए हैं, उनके जाने के बाद ही हम आपको आपका मृत बच्चा सौंप पायेंगें.

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तो वहीं मृत बच्चे की मां ने रोते हुए सीओ चौरी चौरा रचना मिश्रा के पैर पकड़कर कहा, ” साब मेरा बच्चा तो मर गया है, लेकिन अस्पताल प्रशासन उसकी लाश हमें सौंपने में भी आनाकानी कर रहे हैं. साब कृपा करके हमे हमारे बच्चे की बॉडी तो दिला दीजिये.”

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बताया जा रहा एक माँ की इस सिफारिश के करीब 4 घंटे बाद सीओ के हस्तेक्षप के बाद बच्चे की डेडबॉडी परिजनों को सौंपी गई. हम आपको यहाँ बता दें कि गोरखपुर सीएम योगी आदित्यनाथ का संसदीय क्षेत्र है और अभी तक हुई बच्चों की इस दुर्भाग्यपूर्ण मौत की पुष्टि ख़ुद गोरखपुर डीएम राजीव रौतेला ने की है.

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये हॉस्पिटल 1969 में बनाया गया था. इस हमले में बड़ी लापरवाही से पर्दा हटाते हुए कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हॉस्पिटल में ऑक्सीजन सप्लाई रुकने की वजह से हादसा हुआ था.

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