योगी के पास अपनी फरियाद लेकर पहुंची महिला के साथ देखिये इस अधिकारी ने क्या किया…

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12 अगस्त को इलाहाबाद में गंगा ग्राम सम्मलेन हुआ जिसमें मुख्यमंत्री योगी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या और केन्द्रीय मंत्री उमा भारती मौजूद रहीं. इस सम्मलेन के दौरान योगी ने सफाई को लेकर काफी जोर दिया और समाज को जागरूक करने की कोशिश की. इलाहाबाद में मुख्यमंत्री को देख कुछ फरियादी भी अपनी गुहार लेकर मौके पर पहुंचे और योगी के पास अपनी गुहार लगाने की कोशिश करने लगे. इसी तरह से एक महिला अपनी फरियाद योगी को सुनाने के लिए जैसे ही अंदर जाने लगी तो उसे रोक लिया गया. दरअसल उसे सुरक्षा की वजह से रोक लिया गया था लेकिन जब उसे रोका गया तो फरियादी महिला रोने लगी.

दरअसल कौशाम्बी जिले की रहने वाली इस महिला की 17 साल की बेटी के साथ कुछ अराजकतत्वों ने गैंगरेप करने की कोशिश की और उसकी जमीन भी हड़पने की धमकी दे रहे हैं. जिसकों लेकर महिला कौशाम्बी के जिलाधिकारी को भी प्रार्थना पत्र दे चुकी है लेकिन कुछ खास कार्यवाही नही हुई. महिला का कहना है कि उसके परिवार को जान का खतरा है, विरोधी पैसों के दम पर कुछ भी कर सकते हैं और उनकी सुनने वाला कोई नही है.

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यही फरियाद लेकर जब महिला योगी के पास पहुंची तो उसे सुरक्षा कारणों से रोक दिया गया जिसके बाद वो रोने लगी. इस महिला को रोते देख वहां मौजूद तहसीलदार अजय कुमार गुप्ता ने महिला को चुप कराते हुए कहा “रो मत, मैं तुम्हारी मदद करूँगा, लाओ ये एप्लिकेशन मुझे दे दो, ये योगी जी तक पहुंच जायेगा.”

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आपको बता दें कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी 12 अगस्त को इलाहबाद में मौजूद थे और गंगा ग्राम सम्मलेन में शिरकत करने आये थे. इस मौके पर गंगा सफाई को लेकर लोगों में चेतना भरने का काम किया गया. वहीं 12 अगस्त को ही यूपी के गोरखपुर में बड़ा हादसा होने से पूरा देश गमगीन था. इस हादसे में करीब 63 बच्चों की मरने की खबर है. मीडिया खबरों के अनुसार गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन गैस की कमी होने से ऐसी स्थिति पैदा हुई.

जानिए गैस एजेंसी ने क्या कहा

वैसे इस लापरवाही का अस्पताल प्रशासन पर तो कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन उनकी इस लापरवाही ने कई मासूमों की जान ले ली. हालांकि अस्पताल प्रशासन ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से मौत की बात को सिरे से नकार रहा है.

ऐसे में सवाल ऑक्सीजन एजेंसी पर उठ रहे थे जिसका नाम पुष्पा गैस एजेंसी है. इस बीच जब एजेंसी से ये सवाल किया गया कि आखिर इतनी बड़ी गलती कैसे हुई तो जो जवाब मिला वो हैरान करने वाला था. कंपनी की HR ने बताया कि ‘ऐसे कोई ऑक्सीजन सप्लाई नहीं काट सकता है.’

आपको बता दें कि योगी ने कुछ दिन पहले ही वहां जाकर सब चीज़ की जांच की थी लेकिन अमूमन देखा गया है कि जब कोई बड़ा सरकारी अफसर ऐसी जगाहों पर आता है तो सभी चीज़ें बेहतर कर दी जाती हैं.

आपको बता दें यह सरकार की नहीं बल्कि कॉलेज प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि वो ऑक्सीजन देने वाली कंपनी का बकाया पैसा चुकाएं. मासूमों की जान जाने लगी तो कॉलेज ने 22 लाख बकाया राशि देने का फैसला किया और फिर पुष्पा गैस कंपनी ने ऑक्सीजन दी है.

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ऐसे में शक के घेरे में आता है तो वो शख्स जिसका काम मेडिकल कॉलेज को ऑक्सीजन देना है. सूत्रों की माने तो जिस कम्पनी के पास ऑक्सीजन सप्लाई करने का ज़िम्मा था उसके 68 लाख बकाया थे, जिसकी वजह से उसने ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी थी. जानकरी के लिए बता दें सरकार इन सब कामों के लिए टेंडर निकालती है और ऐसे में ज़िम्मेदारी टेंडर लेने वाली की हो जाती है ना कि सरकार की.

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जहां तक बात योगी के दौरे कि है तो एक सरकारी दौरे से पहले ही सूचना दी जाती है और सभी चीज़ें सही कर दी जाती हैं. अब बात ये है कि जब तक आधिकारिक रूप से कोई ठोस बयान नहीं आता है किसी भी नतीजे पर पहुंचना गलत है.