“पुष्पा गैस कंपनी” से पहले जो कंपनी करती थी ऑक्सीजन सप्लाई उसको जब हादसे का पता चला तो उसके मालिक ने किया चौंकाने वाला खुलासा !

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गोरखपुर में हुए हादसे ने पूरे देश को हिलकर रख दिया है, कोई सरकार को दोषी बता रहा है तो कोई कॉलेज प्रशासन को लेकिन असल में दोषी जो है उसका अभी किसी को नहीं पता है. सवाल ये भी कि दोषी किसी की नोगाहों में कोई तो किसी के में कोई होगा पर उन मासूमों का दोष क्या था जो मारे गये ? उनके रोते-बिलखते परिवारों को अपने बच्चों के शव तक लेजाने के लिए मना किया गया था. टीवी पर जितना दर्द उन परिवारों की बातों और आँखों में दिख रहा है उससे कई ज्यादा उन लोगों ने महसूस किया लेकिन क्यों ?

 

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इस बीच लोगों ने सरकार पर सवाल उठाये कि योगी जी ने दो दिन पहले ही उस इलाके का दौरा किया था पर एक बड़े अधिकारी के दौरे से पहले सब चीज़ साफ़ की जाती हैं उन्हें ऊपरी तौर से सब बेहतरीन करने के बाद दिखाया जाता है. ऐसा ही श्याद योगी के साथ हुआ होगा.

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गैस एजेंसी पुष्पा ने तो गैस सप्लाई बिना कुछ सोचे रोक दी और बाद में कह दिया कि गैस सप्लाई जारी थी. इस बीच कई बच्चे बेवजह मारे गये और कई बिलकुल मौत के मुंह से लौट आये. जो बच्चे बचें हैं उनके बचाने का श्रय जाता है तो मोदी गैस कंपनी के मालिक प्रवीण को, इसी इंसान ने बिना कुछ सोचे फ्री में कॉलेज में तुरंत ऑक्सीजन पहुंचाई और कई मासूमों का जीवन बचाया.

 

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मोदी गैस कंपनी वो कंपनी है जिससे पहले इस कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई की जाती थी लेकिन जब प्रवीण जी के 20 लाख रूपये कॉलेज पर बकाया हो गये तो उन्होंने गैस देने से इनकार किया औरकॉलेज ने पुष्पा गैस कंपनी को टेंडर दे दिया. पुष्पा गैस कंपनी के भी इस कॉलेज से डील करने के कारण कई लाख का कर्जा हो गया था.

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पप्रवीण मोदी ने कहा” जब हमें खबर मिली कि कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी है तो इंसानियत के नाते हमने 200-300 सिलिंडर मुफ्त में वहां पहुंचाए जबकि कॉलेज के पास मेरे 20 लाख रूपये बकाया हैं”

 

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक दुखद घटना हुई है . बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में लगभग 48 घंटे में 36 मासूमों की जान चली गई.  योगी के दौरे से पहले  और बाद में भी अस्पताल प्रशासन ने कोई सुधार नहीं किया उनका लापरवाही भरा रवैया जैसा था वैसा ही बना रहा. इस लापरवाही का अस्पताल प्रशासन पर तो कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन उनकी इस लापरवाही ने कई मासूमों की जान ले ली. हालांकि अस्पताल प्रशासन ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से मौत की बात को सिरे से नकार रहा है.

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ऐसे में सवाल ऑक्सीजन एजेंसी पर उठ रहे थे जिसका नाम पुष्पा गैस एजेंसी है.इस बीच जब एजेंसी से ये सवाल किया गया कि आखिर इतनी बड़ी गलती कैसे हुई तो जो जवाब मिला वो हैरान करने वाला था. कंपनी की HR ने बताया कि ऐसे कोई ऑक्सीजन नहीं काट सकता है,


इस बयान के बाद जिन्हें योगी सरकार पर शक था उन्हें अब उसपर शक करना बंद करना होगा. आपको बता दें कि योगी ने कुछ दिन पहले ही वहां जाकर सब चीज़ की जांच की थी लेकिन अमूमन देखा गया है कि जब कोई बड़ा सरकारी अफसर ऐसी जगाहों पर आता है तो सभी चीज़ें बेहतर कर दी जाती हैं.

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आपको बता दें यह सरकार की नहीं बल्कि कॉलेज प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि वो ऑक्सीजन देने वाली कंपनी का बकाया पैसा चुकाएं, मौत शुरू होने के बाद कॉलेज ने 22 लाख बकाया राशि देने का फैसला किया और फिर पुष्पा गैस कंपनी ने ऑक्सीजन दी है.
ऐसे में शक के घेरे में आता है तो वो शख्स जिसका काम कंपनी से लेकर मेडिकल कॉलेज तक ऑक्सीजन देना है. सूत्रों की माने तो जिस आदमी के पास ऑक्सीजन सप्लाई करने का ज़िम्मा था उसके 68 लाख बकाया था जिसकी वजह से उसने ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी थी. जानकरी के लिए बता दें सरकार इन सब कामों के लिए टेंडर निकालती है और ऐसे में ज़िम्मेदारी टेंडर लेने वाली की हो जाती है ना कि सरकार की.

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जहां तक बात योगी के दौरे कि है तो एक सरकारी दौरे से पहले ही सूचना दी जाती है और सभी चीज़ें सही कर दी जाती हैं.  अब बात ये है कि जब तक आधिकारिक रूप से कोईठोस बयान नहीं आता है किसी भी नतीजे पर पहुंचना गलत है लेकिन दुःख की बात ये है कि दलाली के चलते मासूम बच्चों की जान चली गयी और लोग आपस में ही लड़ रहे हैं.