सरकार के इस मास्टर प्लान के बाद अब अस्पताल में मरीजों से डॉक्टर नही कर सकेंगे मनमानी,

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भारत के अस्पतालों में मरीजों से कई तरह की अधिक पैसे वसूलने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती है. इलाज के दौरान कई तरह के मेडिकल डिवाइस पर जो उपयोग किये जाते है उसके अस्पताल और डॉक्टर मनमानी पैसे वसूलते है. सर्जरी के समय में उपयोग की जाने वाली मेडिकल डिवाइस पर एम.आर.पी और उस डिवाइस की डिटेल नही लिखी होती है. इसी का फायदा उठाकर डॉक्टर मरीजो और उनके परिजनों से अधिक पैसे वसूलते थे. लेकिन अब सरकार ने इसके लिए एक ऐसा फैसला लिया है जिसकी पूरी जानकारी आपको मिल जायेगी.

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दरअसल सरकार ने अन्य पदार्थों की तरह अब मेडिकल डिवाइस पर एमआरपी और उसकी कम्पनी के नाम के साथ उस डिवाइस की सारी जानकरी लिखी होगी. अस्पताल में सर्जरी के लिए उपयोग की जाने वाली सभी डिवाइस पर एमआरपी और उनकी जानकारी लिख दिए जाने मरीजों और उनके परिजनों से डॉक्टर मनमानी पैसा नही वसूल पायेंगे.

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उपभोक्ता मंत्रालय द्वारा जारी किये निर्देश के अनुसार या साफ़ किया गया है कि हर मेडिकल यूनिट पर एमआरपी और उसकी सम्पूर्ण जानकारी अब मरीजो के परिजानो को देनी होगी. इसके साथ यह भी कहा गया है कि वो एम.आर.पी. लिखने के साथ ही उस डिवाइस का पूरा ब्यौरा भी मरीजों को दें। अस्पताल में सर्जरी होने पर कौन सी मेडिकल डिवाइस लगी? किस कंपनी की लगी? क्या थी उसकी एमआरपी? अब अस्पतालों को इन तमाम सवालों का जवाब देना होगा। मरीज को लगे हर इंप्लांट की एम.आर.पी., बिल में लिखनी होगी।

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दरअसल अभी तक डिवाइस मैन्युफैक्चर्स यह कहकर मेडिकल  डिवाइस पर प्राइस नही लिखते थे कि इस डिवाइस को मरीज नही खरीद सकते तो इसपर प्राइस लिखना जरुरी नही है. इसलिए डॉक्टर इन मेडिकल डिवाइस की कीमत की जगह उसका खर्च बताते थे.एमआरपी न होने की वजह से कई बार डॉक्टर अधिक पैसा वसूल लेते थे.

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स्टेंट से लेकर वॉल्व, कैथेटर और पेसमेकर जैसे तमाम इंप्लांट मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में आते हैं तो अब आप सर्जरी के बाद बोल भुगतान एक समय सभी मेडिकल डिवाइस की जानकारी और उनकी एमआरपी के बारे में भी जान सकेंगे। और आप भी अपने डॉक्टर से न सिर्फ इंप्लांट की कीमत और किस्मों के बारे में जानिए बल्कि उनकी एमआरपी भी बिल में जरूर चेक करिए।

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दरअसल इस निर्देश के जारी होने के बाद मरीजों का इसका फायदा मिलना लाजमी है. और सर्जरी के दौरान उपयोग की गयी सभी मेडिकल डिवाइस के बारे सही जानकारी अब मरीजों को मिलेगी. अस्पताल में सर्जरी होने पर कौन सी मेडिकल डिवाइस लगी? किस कंपनी की लगी? क्या थी उसकी एमआरपी? अब अस्पतालों को इन तमाम सवालों का जवाब देना होगा। मरीज को लगे हर इंप्लांट की एम.आर.पी., बिल में लिखनी होगी।

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तमाम जगहों से डॉक्टर के मनमानी से पैसे वसूलने के बाद अब उपभोक्ता मंत्रालय ने इस निर्देश को जारी किया है जिसके बाद डॉक्टर के मनमानी पैसा वसूलने पर कुछ हद तक लगाम लगेगी. यह आदेश डिवाइस बनाने वाली कंपनी के साथ साथ सभी अस्पतालों के लिए भी जारी कर दिया गया है. अब उनको अन्य पदार्थो की तरह इनपर भी एमआरपी और सभी तरह की जनकारी देनी होगी.