रोहिंग्या मुसलमानों को देखते ही बौद्ध कर रहे हैं उनकी हत्या, वजह जानेंगे तो आपकी रूह काँप जाएगी!

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बौद्ध धर्म के लोगों के लिए अहिंसा किसी भी धर्म के लोगों से ज्यादा अहमियत रखती है, क्योंकि बौद्ध भिक्षुओं को बचपन से ही सिखाया जाता है कि अहिंसा के मार्ग पर चलें. ऐसे में सवाल खड़ा उठता है कि आखिर क्यों बौद्ध भिक्षुओं द्वारा मुसलमानों के साथ हिंसा की जा रही है और क्यों मुसलमानों के खिलाफ घृणा फैलाई जा रही है?

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मुस्लिमों के खिलाफ घृणा का ये माहौल म्यांमार और श्रीलंका में फैल रहा है खासकर म्यांमार में. हालांकि म्यांमार और श्रीलंका में रहने वाले मुसलमानों को शांतिप्रिय समझा जाता है और इन देशों में ये अल्पसंख्यक भी हैं फिर भी इनके खिलाफ वैमनस्य का भाव है. आपको बता दें कि कई साल पहले श्रीलंका में पशुओं को हलाल करने का मुद्दा सुर्ख़ियों में आया था. जिसके बाद बौद्धों के एक संगठन बोदु बाला सेना के सदस्यों ने बौद्ध भिक्षुओं के नेतृत्व में रैलियां की थीं. इस रैली में मुस्लिमों के खिलाफ सीधी कार्रवाई का विचार रखा गया था और उनके व्यापारिक प्रतिष्ठानों के बहिष्कार की अपील की गई थी. यहीं से मुस्लिमों के प्रति घृणा का भाव शुरू हो गया.

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वहीँ म्यांमार में भी अब रोहिंग्या मुस्लिमों की स्थिति बहुत सोचनीय है म्यांमार के कई मुस्लिम शरणार्थी बनकर दूसरे देशों में रह रहे हैं. आपको बता दें कि म्यांमार में कई मुस्लिम विरोधी संगठन भी हैं जो मुस्लिमों के खिलाफ़ घृणा फैलाने में कोई कमी नहीं छोड़ते. धार्मिक घृणा फैलाने वाले लोगों में आसिन बेराथु का नाम काफी कुख्यात है उनको धार्मिक भावना फैलाने के आरोप में 2003 में जेल भी जाना पड़ा था. आसिन खुद को म्यांमार का ओसामा बिन लादेन बताते हैं.

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म्यांमार के बौद्ध में से कुछ तो ये भी कहते हैं कि पूरी दुनिया मुस्लिमों के लिए नहीं है बात स्पष्ट है कि उनके दिल में रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ ज़हर भरा गया है. म्यांमार के कई लोग मुस्लिमों के रीति रिवाजों से भी नफरत करते हैं. मुस्लिम धर्म के प्रति घृणा फैलाने में म्यांमार के कुछ उग्र लोगों का हाथ है, ऐसा नहीं होना चाहिए लेकिन ऐसा म्यांमार में हो रहा है. रोहिंग्या मुस्लिमों को बौद्धों द्वारा मारे जाने की सबसे बड़ी वजह है कुछ भटके हुए बौद्धों द्वारा धार्मिक बैर फैलाना और मुस्लिमों को मारने को सही ठहराना.

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