बीती रात पीएम मोदी ने की थी अजीत डोभाल और रॉ चीफ से मीटिंग जिसमें पता चला है कि रोहिंग्या मुसलमान नही बल्कि..

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रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर कई दिनों से भारत में चहल-फल मची हुई है, जहां एक तरफ कुछ लोग इन्हें भारत में रखने के खिलाफ हैं तो दूसरी तरफ कुछ लोगों के अनुसार भारत में इन्हें जगह मिलनी चाहिए. आपको बता दें रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार से आये पीड़ित मुसलमान हैं लेकिन क्या सच में वो सभी पीड़ित रोहिंग्या मुसलमान हैं ?

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दरअसल कल रात पीएम मोदी ने अजित डोभाल और रो चीफ के साथ एक मीटिंग की है जिसमें रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर बड़ा सच सामने आया है. इस मीटिंग में म्यांमार के रोहिंग्या आतंकी कमांडरों और पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैसे लश्कर-ए-तैबा के बीच बढ़ते संबंधों पर बातचीत की गय. भारतीय खुफिया विभाग द्वारा तैयार की गयी एक रिपोर्ट के अनुसार रोहिंग्या मुस्लिम समुदायों के बीच पाकिस्तान के आतंकी संगठनों का बढ़ता प्रभाव एक गंभीर उभरता हुआ खतरा है और इसका इस्तेमाल भारत को निशाना बनाने के लिए किया जाएगा.

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जिस इंटेलिजेंस नोट की समीक्षा हुई उसके मुताबिक म्यांमार के रोहिंग्या विद्रोहियों का मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैबा के बीच संबंध बन गए हैं. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लश्कर रोहिंग्या आतंकवादियों को पैसा और हथियार मुहैया कराता है. ख़ास बात यह है सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लश्कर रोहिंग्या आतंकवादियों को पैसा और हथियार मुहैया कराता है और इस रिपोर्ट के साथ कुछ तस्वीरें भी पेश की गयी थीं जिसमें हाफिज सईद जुलाई 2012 को कराची में रोहिंग्या आतंकी संगठन को संबोधित करता नजर आ रहा. अब ऐसे में भी जो लोग रोहिंग्या मुसलमानों का समर्थन करते हैं उन्हें  वाकई सुधरना होगा क्योंकि  यह लोग भारत में सिर्फ और सिर्फ आतंक फैलाने आये हैं.