एक ऐसा राजा जिससे कोई मिलने जाता तो पहले अपने कपड़े उतारता और फिर…

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बचपन से हम लोग किताबों में राजा-रानी की कहानी सुनते आए हैं, और हमेशा से ही हमे उनके बारे में अधिक से अधिक जानने की जिज्ञासा होती है. कुछ महराजा अपनी सियासत के बारे में जाने जाते हैं तो कुछ अपनी रंगरलियों के लिए. ऐसे ही एक महाराजा थे भूपिंदर सिंह जिनके बारे में आप जितना जानेंगे उतना ज्यादा जानने की और इच्छा होगी. 12 अक्टूबर 1891 को पटियाला के मोती बाग में जन्मे भुपिंदर सिंह, महराजा राजेन्द्र सिंह के पुत्र थे. वर्ष 1900 में पिता की मौत के बाद भुपिंदर सिंह को राज्य का दायित्व मिला, जिसे वर्ष 1909 में औपचा​रिक तौर पर भुपिंदर सिंह ने संभाला था. राजा भुपिंदर सिंह छोटी उम्र से ही काफी रंगीन शौक रखते थे.

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दरअसल पटियाला रियासत के महाराजा भूपिंदर सिंह अपनी रंगीनमिजाजी के लिए मशहूर रहे. जिसके किस्से आप जानेंगे तो चौंक जायेंगे और आपको भी इस राजा से नफरत हो जाएगी. महाराजा भूपिंदर सिंह की सभी गतिविधियों का पूरा जिक्र भूपिंदर सिंह के दीवान जरमनी दास की अपनी किताब ‘महाराजा’ में किया गया है. इस किताब में लिखा हुआ है कि महाराजा लगभग 150—400 पुरुष और महिलाओं के साथ अय्याशी करता था जिसमें नग्न औरतों के सीने पर मदिरा उडेल कर मदिरा सेवन और उसके बाद सामूहिक सेक्स होता था.

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महल का एक स्पेशल कमरा हमेशा सिर्फ महाराजा के लिए रिजर्व रहता था. कमरे की दीवारों पर चारों तरफ बने चित्रों में सैकड़ों तरह के आसनों मे प्रेम क्लाप में डूबे औरत-मर्दों को दिखाया गया. कमरे को हिन्दुस्तानी ढंग से सजाया गया है. फर्श पर कीमती जवाहरात से जड़े मोटे-मोटे क़ालीन बिछे हैं.

 

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कहा जाता है कि महाराजा भूपिंदर सिंह देश के पहले ऐसे शख्स थे, जिन्होंने सबसे पहले एरोप्लेन खरीदा था और अपने राज्य में रनवे बनवाया था. महाराजा को गाड़ियों का भी खूब शौक था, जिसके चलते उनके पास उस ज़माने में 44 रॉल्स रॉयस कारें थीं उनमें से 20 कारों का इस्तेमाल तो रोज राज्यीय दौरे के लिए किया जाता था. आपको बता दें कि साल महाराजा भूपिंदर सिंह साल 1935 में बर्लिन गए थे जहाँ वे जर्मनी के शासक हिटलर से मिले थे. हिटलर महाराजा भूपिंदर सिंह से काफी प्रभावित था जिसकी वजह से उसनें महाराजा को अपनी मायबैक कार गिफ्ट कर दी थी.