मार्शल अर्जन सिंह से जुड़ी एक ऐसी कहानी जिसे आजतक कोई नही जानता था, यहाँ पढ़ें !

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अर्जन सिंह भारत के पहले ऐसे वायु सेना प्रमुख बने जो चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की रैंक तक फ्लाइंग कैटेगरी के फाइटर पायलट रहे थे. ज्ञात हो सेना प्रमुख अर्जन सिंह की तबियत काफी दिनों से खराब चल रही थी जिनको देखने के लिए खुद पीएम मोदी गये थे. यह देश के लिए काफी दुखद पल था जब अर्जन सिंह जैसे बहादुर सेना प्रमुख दुनिया छोड़ चले गये. आइये आपको बताते हैं उनकी उस बात के बारे में जिसकी वजह से आज भी उनका नाम और काम दोनों की अमर हैं.

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25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक देश के राष्ट्रपति रहे डॉ. कलाम की जब 27 जुलाई 2015 को शिलॉन्ग में अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था उसके बाद उनका पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया था. उस वक्त देश की काफी बड़ी हस्तियाँ डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि देने एयरपोर्ट पहुंचे थे. उन्ही लोगों में से अर्जन सिंह भी शामिल थे जो मौके पर देश के पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि देने पहुँच गए थे.

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उस वक्त नज़ारा देखने लायक था क्योंकि उस वक्त मार्शल अर्जन सिंह खुद व्हीलचेयर पर थे और उनका शरीर उनका साथ नहीं दे रहा था. शरीर का साथ न देने के बावजूद अर्जन सिंह वहां आये और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के पार्थिव शरीर के पास पहुंचे और उनको अंतिम बार सल्यूट करने के लिए उठे थे. आपको बता दें कि उस वक्त उनका शरीर काफी कांप रहा था, फिर भी वो तनकर खड़े हुए थे. आप खुद उस वक्त की तस्वीर देख सकते हैं कैसी हालत में भी अर्जन सिंह अपने दायित्व को नहीं भूले.

इससे पहले भी साल 2005 में दिल्ली में हो रहे एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम वहां शिरकत करने आये थे.

उस वक्त डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने खुद एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह के प्रति अपना सम्मान दिखाया था. उस वक्त की भी तस्वीर ने खूब चर्चा बटोरी थी.

 #जब लाख चाहने के बाद भी अर्जन सिंह का कोर्ट मार्शल नहीं कर पाए अंग्रेज#

बात उस वक्त की है जब फरवरी 1945 में मार्शल अर्जन सिंह केरल के कन्नूर केंट एयर स्ट्रीप पर तैनात थे और उस वक्त वायुसेना की कमान अंग्रेजों के हाथ में थी. उस वक्त अर्जन सिंह से एक ऐसी गलती हो गयी थी जिसकी वजह से उनका कोर्ट मार्शल हुआ था. कोर्ट मार्शल उसे कहते हैं कब कोई सैनिक किसी भी प्रकार का नियम तोड़ता है या फिर वो अनुशासनहीनता दर्शाए उसका कोर्ट मार्शल किया जाता था. उस वक्त सेना का ये नियम था तो अर्जन सिंह के भी साथ भी उस नियम का पालन किया गया. आखिरकार गलती भी उनकी ऐसी थी जिस गलती को कोई माफ़ नहीं करता.

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असल में अर्जन सिंह ने एक दिन एयरक्राफ्ट से उड़ान भरी और उसे सीधा कॉरपोरल के घर के ऊपर ले जा पहुंचे. आपको बता दें कि कॉरपोरल एक एयरफोर्स में रैंक होती है. अर्जन सिंह उसी कॉरपोरल के घर के काफी चक्कर लगा रहे थे. मतलब कि उनका एयरक्राफ्ट काफी नीचे भी उड़ रहा था. एयरक्राफ्ट की तेज़ आवाज़ सुनकर कॉरपोरल के साथ-साथ उसके मोहल्ले के लोग भी घरों से बाहर एयरक्राफ्ट देखने निकल आये. आम जनता के लिए एयरक्राफ्ट को इतना नज़दीक से देखना काफी मजेदार था लेकिन अर्जन सिंह द्वारा किया गया काम ब्रिटिश अधिकारियों को रास नहीं आया. जिसके बाद उनका कोर्ट मार्शल हुआ.

आपको बता दें कि ख़ास बात तो यह ही है कि अर्जन सिंह नाम ही ऐसा था जिसका कोई भी बाल भी बाका नहीं कर सकता था. ठीक उसी तरह अंग्रेजों के लाख चाहने के बावजूद अर्जन सिंह पर कोई एक्शन नहीं लिया जा सका क्योंकि अर्जन सिंह ने अपने पक्ष में तर्क ही ऐसे रखे थे इसकी वजह से अंग्रेज उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाए. अर्जन ने अपने बचाव में कहा था कि वे ट्रेनी पायलट का मनोबल बढ़ाने के लिए इतनी नीची उड़ान पर गए थे. 

अंग्रेजों के पास कोई दूसरा ज़रिया भी नहीं था क्योंकि दूसरा वर्ल्ड वॉर होना था जिसमें ब्रिटिश सेना को ट्रेंड पायलट्स की ज़रूरत थी और अर्जन सिंह उन्ही ट्रेंड पायलट्स में से एक थे. जिनको चाहते हुए भी सेना से बाहर नहीं निकाला जा सकता था. वहीँ आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जिस ट्रेनी पायलट की वजह से अर्जन सिंह ने इतनी कम उड़ान भरी थी वो कोई और नहीं बल्कि वे आगे चलकर एयर चीफ मार्शल बनने वाले दिलबाग सिंह थे. दिलबाग सिंह, अर्जन सिंह के बाद दूसरे ऐसे सिख थे जो वायुसेना अध्यक्ष बने थे. साल 1944 में दिलबाग सिंह को बतौर एक पायलट नियुक्ति किया गया था.

#पाकिस्तान जाकर खुद वहां बम बरसाना चाहते थे मार्शल अर्जन सिंह#

बात उस वक्त की है जब साल 1965 में पाकिस्तान ने भारत से जम्मू-कश्मीर को अलग करने के लिए अखनूर से भारत पर हमला किया था. उस वक्त अर्जन सिंह आर्मी चीफ के साथ रक्षामंत्री वाईबी चव्हाण से मिलने पहुंचे थे और उस दिन रक्षामंत्री वाईबी चव्हाण ने अर्जन सिंह से यह भी पूछा था कि अगर पाकिस्तान पर हवाई हमला किया जाये तो कितना समय लगेगा उस वक्त जवाब में अर्जन सिंह ने कहा था कि सर ‘एक घंटा’.

लेकिन असलियत में तो इंडियन एयरफोर्स के प्लेन पाकिस्तान पर हवाई हमला करने के लिए महज़ 26 मिनट बाद ही उड़ान भर चुके थे. एक इंटरव्यू में अर्जन सिंह ने कहा था कि उन्हें इस बात का हमेशा मलाल रहेगा कि जब हम 1965 का युद्ध जीत चुके थे तब उस वक्त हमारे पास सबसे बेहतरीन मौका था पकिस्तान को जड़ से मिटाने का लेकिन तभी युद्ध को जल्दी खत्मकर दिया गया.

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अर्जन सिंह कहते हैं कि उस वक्त हमारे पास सबसे अच्छा मौका था पाकिस्तान को मिटाने का. ज्यादा नहीं तो कम से कम पकिस्तान के किसी भी एक हिस्से को तो नष्ट किया ही जा सकता था. पाकिस्तान के तो वैसे भी एक-एक करके विमान ख़त्म हो रहे थे इसलिए वो चाहते थे कि युद्ध जल्दी ख़त्म कर दिया जाये. भारत के पास केके मजूमदार और मेहर सिंह जैसे दिग्गज पायलट थे. अगर भारत चाहता तो पाकिस्तान के किसी भी हिस्से को उड़ा सकता था. पाकिस्तान के विमान अहमदाबाद और मुंबई तो छोड़िए, वो दिल्ली तक भी पहुँचने लायक नहीं थे.

अर्जन सिंह बताते थे कि वो तो हम पर अंतरराष्ट्रीय दबाव था जिसकी वजह से हमारे नेताओं ने युद्ध खत्म करने का निर्णय ले लिया था. वैसे तो अर्जन सिंह खुद पाकिस्तान जाकर बम बरसाना चाहते थे जिसके बारे में उन्होंने रक्षामंत्री से बात भी की थी लेकिन उन्हें इस बात की इजाज़त नहीं मिली थी.