बीजेपी के लौह पुरुष रहे लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर उनसे जुड़े कुछ ख़ास तथ्य

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भारतीय राजनीति में एक समय खूब चर्चा में रहने वाला नाम था लाल कृष्ण आडवाणी. अटल विहारी वाजपेयी के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी को पहचान दिलाने वाला नाम था लालकृष्ण आडवाणी. भारतीय राजनीति में भारतीय जनता पार्टी को उचाईयों में ले जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी के योगदान को बीजेपी कभी भूल नही सकती है. कभी उन्हें पार्टी का लौह पुरुष कहा गया तो कभी कर्णधार और कभी पार्टी का मुख्य चेहरा. कुल मिलाकर देखें तो लाल कृष्ण अडवानी ने बीजेपी को एक अमूल्य योगदान दिया है.

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90 साल के हो गये आडवाणी 

8 नवम्बर को लालकृष्ण आडवाणी  का जन्मदिन हैं. वर्तमान में कराची में आठ नवंबर, 1927 को जन्में लालकृष्ण आडवाणी 90 साल हो गये हैं. पिता का नाम केडी आडवाणी और माँ का नाम ज्ञानी आडवाणी था. शुरुवाती शिक्षा लाहौर में हुई. बंटवारे के वक्त वो भारत आ गये और मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से लॉ में स्नातक किया. खबरों की माने तो लालकृष्ण आडवाणी  90 दिव्यांग बच्चों के साथ अपना जन्मदिन मनाएंगे. लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति में बड़ा नाम माना जाता है.अपनी आक्रामकता के लिए प्रसिद्ध आडवाणी पिछले कुछ समय से अपनी मौलिकता खोते जा रहे हैं.

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आडवाणी का राजनीतिक जीवन 

वर्ष 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा जनसंघ की स्थापना हुई और तब से लेकर 1957 तक लालकृष्ण आडवाणी जनसंघ के सचिव रहे हैं. इसके बाद  1973 से 1977 तक जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे हैं.1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना होंने के बाद लाल कृष्ण अडवाणी 1986 तक पार्टी के महासचिव रहे. इसके बाद 1986 से लेकर 1991 भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष का पद भी संभाला. 1990 में राम मंदिर का आन्दोलन चरम पर था,इस दौरान लालकृष्ण आडवाणी  ने सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा निकाली तो उन्हें रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया. 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद जिन लोगों को आरोपी बनाया गया उसमें आडवाणी  का भी नाम था. राम मंदिर से जुड़ने  के बाद आडवाणी का कद और बढ़ गया और उनकी लोकप्रियता चरम पर पहुँचने लगी.

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लालकृष्ण तीन बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, चार बार राज्यसभा सदस्य,पांच बार लोकसभा सदस्य रहे हैं. संसद में अपने अच्छे आचरण और एक अच्छे सांसद के तौर पर कभी उनका सम्मान हुआ तो कभी उन्हें पुरस्कृत किया गया. लालकृष्ण आडवाणी  देश के गृह मंत्री,सूचन प्रसारण मंत्री भी रहे हैं. अब तक लालकृष्ण का सबसे उच्चतम पद था उपप्रधानमंत्री का. अटल विहारी वाजपेयी के सरकार में गृह मंत्री रहते हुए आडवाणी  को 29 जून 2002 को देश का उप्रधानमंत्री भी बनाया गया.

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आडवाणी से जुड़े विवाद

आडवाणी की छवि बीजेपी के तीन सबसे विवादित मुद्दे पर कट्टर समर्थक के रूप में रही है जिसमें धारा 370, समान नागरिक संहिता और राम मंदिर हैं. जिसके चलते उनकी छवि मुसलमान और पाकिस्तानी विरोधी के रूप में होने लगी. 1998 में सत्ता में आने के बाद आडवाणी को लगा कि आने वाले कई सालों तक गठबंधन की ही सरकार चलने वाली है तो उन्होंने इस बदलें की कोशिश शुरू कर दी. पाकिस्तान दौरे पर गये अडवाणी को जिन्ना ने धर्मनिरपेक्ष बताया तो मानों घट भर गया…..

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आज लालकृष्ण अडवाणी भारतीय जनता पार्टी के मार्गदर्शक मण्डली में शामिल हो चुके हैं. ऐसी उम्मीदें लगायी जा रही थी कि 2017 में राष्ट्रपति पद के लिए लालकृष्ण आडवाणी  के नाम को आगे लाया जा सकता है लेकिन बीच में राम मंदिर का मुद्दा आ गया और आडवाणी  राष्ट्रपति बनने से रह गये. हम भगवान् से प्रार्थना करते हैं कि लालकृष्ण आडवाणी  खुश रहें, स्वस्थ रहें और मार्गदर्शन करते रहे. जन्मदिन अनेको शुभकामनाएँ

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