इसलिए कांग्रेस से अलग है मोदी सरकार !

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राष्ट्रवादिता की बात हो तो सिर्फ एक ही पार्टी याद आती है और वो है बीजेपी. दरअसल मातृभूमि के लिए जितनी चिंता बीजेपी नेताओं में देखने को मिलती है शायद ही कोई और पार्टी है जो देशहित में फैसले लेती हो. बात सेना के जवानों को लेकर है, खबर ऐसी है कि वीर जवान ख़ुशी से झूम उठेंगे. ऐसा इसलिए भी है कि क्योंकि मोदी सरकार में सेना को लेकर जिस तरीके से सम्मान देखने को मिलता है वो वाकई तारीफ़ के काबिल है. सरहद पर जाकर दिवाली मनाना और सेना के जवानों के साथ समय बिताना, ये सब मोदी सरकार में खूब देखने को मिला है.

पंजाब केसरी कि खबर के मुताबिक मोदी सरकार ने सेना के उन जवानों के मॉनिटरी अलाउंस को दोगुना कर दिया है जो वीरता पुरस्कार विजेता हैं. बता दें कि

4 दिसम्बर को सरकार की तरफ से एक पत्र जारी किया गया जिसमें परमवीर चक्र विजेता सैनिक को हर महीने 20,000 रुपये मिलेंगे, यह राशि पहले 10 हजार रूपये थी. परमवीर चक्र युद्धकाल का यह सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाता है. वहीं अशोक चक्र पाने वाले को प्रति माह 12,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा, जो 6,000 रुपये रहा है. वीर चक्र पाने वाले जवानों को  7 हजार, शोर्य चक्र विजेता को 6 हजार रुपये प्रति महीने दिए जाएंगे. वायु सेना मेडल और सेना मेडल, नवसेना मेडल जीतने वाले जांबाजों जवानों को 2 हजार रूपये हर महीना दिया जाएगा.

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अगर पुरस्कार जीतने वाला जवान जीवित नहीं है तो यह धनराशि उनकी पत्नी को दी जाएगी और अगर जवान की शादी नहीं हुई और वो शहीद हो गया है तो उनके माता-पिता को ये राशि दी जाएगी. वहीं शहीद, विकलांग और लापता जवानों के बच्चों की ट्यूशन फीस पर चल रहे विवाद को लेकर भी रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ी बेबाकी से कहा कि “सरकार कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाएगी जिससे शहीदों के परिवार को कई परेशानी उठानी पड़े.”

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