रोहित सरदाना को जान से मारने की धमकी देने वाले इस शख्स की असलियत जानेंगें तो होश उड़ जायेंगें

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बीते कई दिनों से एक खबर आ रही है. शायद आपने भी सुनी हो. खबर है देश के एक पत्रकार रोहित सरदाना को जान से मार डालने की. उन्हें और उनके परिवार को ये धमकियाँ 16 नवंबर की एक ट्वीट के बाद से लगातार ही मिल रही हैं. क्यों मिल रही है का जवाब है उनका एक ट्वीट. नहीं नहीं दरअसल वो ट्वीट उनका था भी नहीं, दरअसल वो ट्वीट 15 नवंबर को किसी और ने पहले अंग्रेजी में किया था जिसका अनुवाद रोहित सरदाना ने 16 तारिख को किया और बस यहीं से शुरू हो गया फतवों और जान से मार डालने की धमकी देने का सिलसिला.

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इन्ही में से एक जनाब है आरिफ़ रिज़वी. सोशल मीडिया पर इनका अकाउंट खंगालेगें तो पता चलेगा कि इनका नाम ‘एंकर आरिफ रिज़वी’ है, लेकिन इस एंकर आरिफ रिजवी की जो सच्चाई हम आपको बताने जा रहे हैं उसे सुनकर आपके होश फाख्ता होना तय है. जी हाँ रोहित सरदाना को जान से मारने की धमकी देने वाले आरिफ रिज़वी के बारे में सोशल मीडिया पर फैली ख़बरों के अनुसार जो अहम बातें सामने आयीं हैं वो ये कि आरिफ रिज़वी का आम आदमी पार्टी से ख़ास नाता हैं.

जी हाँ, सोशल मीडिया पर मौजूद एक वीडियो के अनुसार इस बात का दावा किया जा रहा है कि आरिफ रिज़वी आप पार्टी के एक जुझारू कार्यकर्ता हैं. इतना ही नहीं आरिफ रिज़वी ने आप के लिए पंजाब में काफी चुनाव-प्रचार भी किया है. नीचे दी गयी इस तस्वीर में आप भी साफ़ देख सकते हैं कि आप की टोपी पहने ये शख्स आरिफ़ रिज़वी ही हैं जिन्होंने मेसेज में रोहित सरदाना को जान से मार डालने की धमकी दी थी.

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यानी की एक बात तो तय है कि आरिफ रिज़वी का अरविन्द केजरीवाल के साथ कोई ना कोई नाता तो ज़रूर हैं लेकिन यहाँ सवाल यही उठता है कि जो लोग गौरी लंकेश की मौत के बाद पीएम मोदी के एक फोलोवेर पर सवाल उठा रहे थे और पीएम पर ये संगीन आरोप तक लगा रहे थे वो गौरी लंकेश के हत्यारों को शय दे रहे हैं वो अब चुप्पी साधे क्यूँ बैठे हैं?

देखिये वीडियो:

यहाँ कुछ बातें और भी गौर करने वाली हैं कि आखिर कोई अबतक रोहित सरदाना पर लग रहे फतवों के बारे में कुछ क्यों नहीं कह रहा? आखिर कोई क्यूँ उन फतवा लगाने वालों पर लगाम नहीं कस रहा जिन्होंने एक परिवार का जीना मुहाल किया हुआ है? आखिर कोई क्यूँ अरविन्द केजरीवाल से सवाल तलब नही कर रहा? आखिर कोई क्यों कानून अपने हाथ में लेने वालों को कोई कुछ नहीं कह रहा है? साथ ही सवाल ये भी है कि ये आखिर कब तक चलने वाला है और अभिव्यक्ति की आज़ादी? वो कहाँ गयी जनाब?

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