रोहित सरदाना की पत्नी ने पति पर लगाये गए फतवों के बारे में कुछ ऐसा कहा पढ़कर आप भी सिहर जायेंगें

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मुझे 21 नवंबर, मंगलवार शाम को एक कॉल आती है. कॉल करने वाला शख्स था सैयद. मैंने फोन उठाया तो उसने तपाक से कहा, “मैं लखनऊ से बोल रहा हूँ, उस (गाली) को कह देना जान से मार देंगें.” मैं ये शब्द सुनकर कुछ कह पाती तबतक फोन कट गया. थोड़ी देर बाद दूसरा कॉल आया, “मैं गुजरात से हैदर बोल रहा हूँ, उस (गाली) को बोल देना गोली से उड़ा देंगें.” इसके बाद कई कॉल्स आयीं, सब इसी तरीके की. मैं सुनती थी, सहर जाती थी. उनको बताया तो उन्होंने साफ़ कहा, “कोई फोन मत उठाओ.”

“….लेकिन ये कोई अंत नहीं था, एक शुरुआत थी. मेरे पति की जान लेने की धमकी की शुरुआत. वो मुझे ही ये बता रहे थे. मुझे कई कॉल्स आयीं रशिया, मालदीव, जर्मनी, फ्रांस, अमेरिका, घाना, थाईलैंड ऐसे देशों से भी. कोई और बात होती तो मैं एक पत्नी होने के नाते खुश होती कि मेरे पति के लिए ऐसे-ऐसे देशों से कॉल आ रही है जिन जगहों के बारे में मैंने सिर्फ सुना है, लेकिन मैं खुश नहीं थी. ये अच्छी कॉल्स नहीं थीं. ये धमकी भरी कॉल्स थी. मेरे पति की जान की धमकी की कॉल थी.” ये शब्द हैं देश के एक पत्रकार रोहित सरदाना की पत्नी प्रमिला दीक्षित के जो इन धमकियों से, इन फोन कॉल्स से इस कदर डर चुकी हैं वो अब फोन की घंटी पर ऐसे चौंक जाती हैं जैसे मानो कोई भूत देख लिया हो.

सब कुछ तो समझ आ रहा है, बस ये समझ नहीं आ रहा कि ये गुस्सा, ये धमकी, ये खून खराबे की चेतावनी, ये सिर कलम की धमकी हैं क्यों? एक ट्वीट पर? क्या ट्वीट है अगर आप नहीं जानते तो हम बता देते हैं कि क्या ट्वीट थी, लेकिन यहाँ सबसे ज़्यादा “मज़ेदार” बात जानते हैं क्या थी? नहीं? दरअसल एक ट्वीट किया जाता है 15 नवंबर को, अंग्रेजी में. ट्वीट करने वाला कोई और नहीं बल्कि गौरव सावंत हैं.

गौरव सावंत के इस ट्वीट को पूरे 24 घंटे से ऊपर बीत जाते हैं जिसके बाद रोहित सरदाना 16 नवंबर को अंग्रेजी वाले इसी ट्वीट का हिंदी अनुवाद कर देते हैं, लेकिन ट्वीट का हिंदी अनुवाद करते ही रोहित सरदाना पर फतवा चालू हो जाता है. फतवा भी ऐसा-वैसा नहीं सीधे सिर कलम करने का. आपको सिर भी फ्री में कलम नहीं करना है, उसके लिए आपको पैसे भी दिए जा रहे हैं. पूरे 1 करोड़ रुपये.

 देश का मुसलमान वाकई डरा हुआ है भाईसाब? 

यहाँ सवाल फिर वही खड़ा होता है कि आखिर इतना बवाल हुआ ही क्यों? अगर भावनाएं आहत होनी ही थीं तो वो तो अंग्रेजी वाली ट्वीट में भी बराबर हो सकती थीं ना? सिर्फ हिंदी में अनुवाद होते ही भावनाएं आहत क्यों हुईं? इन सब के बीच ज़रा सोचिये क्या बीतती होगी उस पत्नी पर उसके बच्चों पर जब टीवी ऑन करते ही पिता और और अपने पति के ऊपर लगे फतवे को देखते होंगें?

रोहित सरदाना की पत्नी के डर का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अब घर के दरवाज़े पर होनी वाली हर दस्तक पर प्रमिला इस कदर डर जाती हैं कि वो अपने पति को पीछे करके खुद ही डरते-डरते दरवाज़ा खोलने जाती हैं. डर इस कदर है कि अब अगर रोहित सरदाना गाड़ी भी पार्क करने जाते हैं तो उनकी पत्नी प्रमिला किसी अनहोनी के डर से उनके पीछे भाग जाती हैं ये सुनिश्चित करने कि उनके पति सुरक्षित हैं. परिवार को इस वक़्त ये समझ ही नहीं आ रहा कि बच्चों को स्कूल भेजे कि नहीं? पति (रोहित सरदाना) को ऑफिस जाने दें या नहीं? खुद घर से बाहर जायें या नहीं? सुरक्षा के नाम पर चार बंदूकधारी लगवाएं या नहीं?

…और अगर लगवा भी दें तो अभिव्यक्ति की आजादी का क्या होगा? ऐसे समय में वो लोग कहां दुबके हैं जो हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं पर बड़ी बेशर्मी के साथ भौंक देते हैं और बाद में अभिव्यक्ति की आजादी का रोना रोते हैं. आखिर अभिव्यक्ति की आजादी कुछ विशेष लोगों के ही पास है क्या? रोहित सरदाना के पास नही? इस सवाल का जवाब सोचिएगा जरूर नही तो शायद आगे सोचने लायक ना रहें.

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