भीमा कोरेगांव हिंसा में जिस हिन्दू नेता का नाम आ रहा है उसकी पहुंच दिल्ली तक है !

भीमा कोरेगांव को लेकर अब तक आपने कई ख़बरें पढ़ीं, लेकिन इन सबके बाद भी एक सवाल सामने आता है कि आखिर हिंसा की शुरुआत हुई कैसे और इन सबके पीछे है कौन. कहने को तो लाखों की संख्या में दलित युद्ध स्मारक की तरफ जा रहे थे लेकिन इसके एक दिन पहले यानी 31 दिसम्बर को गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और देशद्रोह के आरोपी उमर खालिद का कार्यक्रम भी हुआ था. मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि इस दौरान इन दोनों ने भड़काऊ भाषण दिया था जिसके बाद अगले ही दिन लोग हिंसा पर उतर आये. इसके अलावा कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स ये भी कह रहे हैं कि किसी ने दलितों के विशाल जनसमूह पर पत्थरबाजी की उसके बाद मामला बिगड़ गया. इन सबके बीच दो नाम सामने आ रहे हैं, पहला संभाजी भिड़े और दूसरा मिलिंद एकबोटे. चलिए आपको इन दोनों के बारे में बताते हैं कि आखिर ये हैं कौन और क्या है इनकी रजनीति.

मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े

संभाजी भिड़े

सांगली ज़िले के रहने वाले संभाजी भिड़े की उम्र लगभग 85 साल है. इनका असली नाम मनोहर है. राजनीती में इन्हें गुरु के नाम से भी जाना जाता है. एमएससी तक की शिक्षा लेने वाले भिड़े किसी ज़माने में आरएसएस के कार्यकर्ता हुआ करते थे लेकिन किसी विवाद के चलते इन्होंने अपना एक अलग संगठन बना लिया. भिड़े छत्रपति शिवाजी को अपना आराध्य मानते हैं. इन्होंने 1984 में ‘श्री शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान’ नामक संगठन का निर्माण किया. बेहद ही साधारण तरीके से जीवन यापन करने वाले भिड़े सफ़ेद रंग का कुर्ता-धोती पहनते हैं लेकिन चप्पल कभी नहीं पहनते.

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अगर इस ताजा विवाद से अलग होकर बात की जाय तो इसके पहले भी संभाजी भिड़े का नाम कई बार चर्चा में आ चुका है. बीबीसी के मुताबिक 2009 में भिड़े उस वक्त राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आये, जब उनके संगठन ‘श्री शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान’ ने फिल्म जोधा-अकबर का विरोध किया था. विरोध भी ऐसा था कि महाराष्ट्र के कुछ जिलों जैसे सांगली, सतारा, कोल्हापुर में जमकर हिंसा हुई थी, सिनेमाघरों में तोड़फोड़ की गयी थी.

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वहीं अगर इनकी राजनीति की बात करें तो इस क्षेत्र में संभाजी भिड़े का लोहा माना जाता है और इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार हो रहे थे तो नरेंद्र मोदी खुद भिड़े से मिलने रायगढ़ के किले पर गये थे.

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कहा जाता है कि हिंदुत्व की राजनीति में भिड़े की अहमियत इतनी है कि उनकी बात को पीएम मोदी भी नहीं टालते. फ़िलहाल महाराष्ट्र में अभी के जो हालात हैं उससे भिड़े मुश्किलों में घिर सकते हैं. हिंसा फ़ैलाने के आरोप में उनपर FIR दर्ज हो चुकी है और भीमराव आंबेडकर के पोते और दलित नेता प्रकाश आंबेडकर ने इनकी गिरफ़्तारी की मांग की है.

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मिलिंद एकबोटे

भीमा कोरेगांव में फैली हिंसा में संभाजी भिड़े के साथ-साथ एक और नाम चर्चा में है और वो है मिलिंद एकबोटे का. 56 साल के मिलिंद एकबोटे, संभाजी भिड़े की तरह अपना एक संगठन चलाते हैं, जिसका नाम हिंदू एकता मंच हैं. मिलिंद और उनका परिवार आरएसएस से जुड़ा हुआ है. मिलिंद एकबोटे 1997 से 2002 तक पुणे महापालिका में बीजेपी के पार्षद भी रह चुके हैं.

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2014 में शिवसेना के टिकट से मिलिंद एकबोटे लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें बीजेपी के ही विजय काले ने हरा दिया था. महाराष्ट्र में फैली हिंसा से पहले एकबोटे पर दंगा भड़काना, दो समाजों के बीच द्वेष फैलाना, अतिक्रमण करना जैसे अपराधों में तकरीबन 12 मामले दर्ज हैं. हिंदू आघाडी संगठन चलाने वाले मिलिंद एकबोटे की पहचान एक कट्टर हिंदुत्ववादी के तौर पर है.

 

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भीमा कोरेगांव की घटना में एकबोटे पर आरोप है कि उन्होंने लोगों को उकसाया और जिसके बाद हिंसा शुरू हुई. मामले में इन पर FIR दर्ज हुई है. संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे का नाम एक साथ चर्चा में आने के कारण महाराष्ट्र में जातीय संघर्ष को खूब बढ़ावा मिला है. फ़िलहाल इस हिंसा में इन दोनों का कितना योगदान है ये जाँच का विषय है.