चारा घोटाला मामले में लालू जायेंगे ‘इतने साल’ के लिए जेल !

1994(उस वक्त लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री थे बिहार के) में राज्य के गुमला, डोरंडा और लोहरदगा, रांची, पटना जैसे कई कोषागारों से फर्ज़ी बिलों के ज़रिए करोड़ों रुपए की कथित अवैध निकासी हुई. ये निकासी पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चारे और पशुओं की दवा आदि की सप्लाई के नाम पर हुई. पोल खुली, तो रातों-रात सरकारी कोषागार और पशुपालन विभाग के कई सौ कर्मचारी गिरफ़्तार कर लिए गए, कुछ ठेकेदारों को भी हिरासत में लिया गया. धीरे धीरे ये मामला राजनीतिक सांठ-गांठ तक पहुंचा, और इसे चारा घोटाला के नाम से जाना जाने लगा. यह घोटाला कितने करोड़ों का है अभी तक पूरी तरह से साफ़ नही हुआ है लेकिन जो तस्वीर सामने आई है उसमें 900 करोड़ रूपये की बात हो रही है.

इस मामले में शनिवार(23 दिसम्बर) को सीबीआई की विशेष अदालत ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत छह अन्य को बरी कर लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया था. उन्हें सजा क्या होगी इसका फैसला 3 जनवरी को होना था लेकिन कुछ कारणों से यह फैसला 6 दिसम्बर को आया. उस मामले में लालू यादव को लेकर कुल 16 दोषी पाए गये हैं, जिसमें 6 दोषी ऐसे हैं जिन्हें साढ़े तीन साल की सजा हुई है.

सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू प्रसाद यादव को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई है और साथ में 5 लाख रूपये का जुर्माना देना होगा. जुर्माना नहीं देने पर 6 महीने और जेल में बिताना होगा. बता दें कि लालू को जमानत के लिए हाईकोर्ट जाना होगा.

बता दें कि देवघर कोषागार मामले में सजा का ऐलान होने तक लालू प्रसाद यादव रांची के बिरसा मुंडा जेल में थे. लालू प्रसाद यादव को कितने साल की सजा होगी इसको लेकर कई दिनों से इंतजार किया जा रहा था लेकिन अब जाकर लालू को साढ़े तीन साल की सजा का फैसला आया है. इस मामले थोड़ा पीछे जाने पर पता चलता है कि 30 जुलाई 1997 को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद ने सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण किया था और अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा था. इसके बाद लालू यादव ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था. साल 2000 में लालू के खिलाफ आरोप तय हुए, जिसके बाद रांची की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई शुरू की थी.