पीएम मोदी के इस कारनामे की वजह से विपक्ष की नींद उड़ी हुई है !

साल 2015 में भारतीय सेना द्वारा यमन में किया गया ‘ऑपरेशन राहत’ उसके शौर्य, पराक्रम की बेमिसाल कहानी कहता है. आप जब भी भारतीय सेना के बारे में कसीदे कसेंगे उसमें यमन में हुये इस ऑपरेशन का जिक्र जरूर करेंगे. इस जिक्र में आपको मोदी सरकार की भी तारीफ करनी होगी कि क्योंकि उन्होंने अपने नागरिकों को बचाने के लिए जितनी तत्परता दिखाई वो वाकई काबिल-ए-तारीफ है. बता दें कि उस वक्त यमन गृहयुद्ध से ग्रसित था और सऊदी अरब की तरफ से बमबारी की जा रही थी. ऐसे में वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की जान आफत में थी. बमबारी के बीच भारतीयों को वहां से निकालना बहुत मुश्किल काम था. ऐसे में पीएम मोदी ने एक कॉल किया जिसकी वजह से करीब 6772 लोगों की जान बच सकी. आगे आपको बताते हैं कि आखिर उन्होंने कॉल किसको किया और किस तरीके से इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान बची.

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न्यूज़ 18 चैनल की वेबसाइट के अनुसार जिस वक्त यमन में 4800 भारतीय फंसे हुए थे और ये नहीं पता था कि उनकी जान बचेगी या नहीं, उस वक्त भारत सरकार ने तत्परता दिखाते हुए जरुरी कदम उठाने शुरू कर दिया. बता दें कि आसियान-भारत प्रवासी भारतीय दिवस पर प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि “यमन में सऊदी अरब द्वारा की जा रही बमबारी के बीच भारतीयों को यमन से निकालने में बड़ी दिक्कत हो रही थी, ऐसे में मैं पीएम मोदी के पास गयी और सुझाव देते हुए उनसे कहा कि ‘आपके और सऊदी के शाह के बीच रिश्ते काफी अच्छे हैं और इस संबंध के जरिये भारतीयों को बचाने के लिए हम बेहतर कर सकते हैं.

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जिसके बाद पीएम मोदी ने रियाद के शाह को सीधे तौर पर फोन किया और वहां फंसे भारतीयों को निकालने में मदद मांगी, साथ ही ये भी कहा कि एक हफ्ते के लिए बमबारी रोक दी जाय, जिससे भारतीयों को सुरक्षित निकालने में मदद मिलेगी. जिसके बाद शाह भी एक हफ्ते तक सुबह नौ बजे से 11 बजे तक बमबारी रोकने पर राजी हो गये. इसका फायदा उठाते हुए यमन प्रशासन से अनुरोध किया गया कि वे अदन बंदरगाह और सना हवाई अड्डे को खोल दें. जिसका नतीजा ये हुआ कि यमन के गृहयुद्ध जैसे हालातों से करीब 4800 भारतीय और अन्य देशों के 1972 लोगों को बाहर निकाला गया.

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बता दें कि इस ऑपरेशन की अगुवाई सेना से रिटायर जनरल और विदेश राज्यमंत्री वी के सिंह ने की थी. भारतीय सेना के पराक्रम की गवाही देता यह ऑपरेशन 11 दिनों तक चला था. इस घटना के बाद से मोदी सरकार की साख को चार चाँद लग गये. पूरी दुनिया को पता चला कि अपने नागरिकों को बचाने के लिए भारत सरकार कुछ भी कर सकती है.