देखिये कैसे जातिवाद की राजनीति करने वाले जिग्नेश मेवाणी की उम्मीदों पर पानी फिर गया !

देश में इन दिनों दलित प्रेम खूब छाया हुआ है, दलितों को भी लग रहा है कि उनकी कोई सुध लेने वाला तो है लेकिन सच तो ये है कि दलितों के सहारे लोग अपनी राजनीति चमका रहे हैं. महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा में जिग्नेश मेवाणी दलित चेहरा बनने की कोशिश में लगे हुए हैं. पुणे में जाकर उग्र भाषण देने के आरोप में जिग्नेश मेवाणी पर FIR भी दर्ज किया जा चुका है. इसके बावजूद जिग्नेश मेवाणी दिल्ली में रैली करना चाहते हैं. बता दें कि 9 दिसम्बर को दिल्ली में रैली करने को लेकर उनकी मंशा को जोर का झटका लगा है.

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NBT की खबर के मुताबिक जिग्नेश मेवाणी और उनके साथी 9 दिसम्बर को दिल्ली में युवा हुंकार रैली करना चाहते थे लेकिन पुलिस प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी. इसके पीछे पुलिस ने नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल रैली के आदेशों का हवाला दिया है. इसके बाद भी जिग्नेश एंड टीम दिल्ली में ही रैली करने पर की जिद पर है. विवाद बढ़ता देख पुलिस ने अपनी तरफ से सुरक्षा के दृष्टि कोण से पूरी तैयारी कर ली है.

किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस की तैयारी

बता दें कि 8 दिसम्बर की रात को ही दिल्ली के DCP एनजीटी के आदेशों को ध्यान में रखते हुए पार्ल्यामेंट स्ट्रीट पर प्रस्तावित प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने इजाजत नहीं दी है. DCP ने ये भी कहा कि प्रदर्शनकारियों से कहा गया कि वो अपना प्रदर्शन कहीं और कर लें, लेकिन वो मानने को तैयार नहीं हैं. इस मुद्दे को लेकर राजनीति भी तेज हो गयी है. रैली के आयोजन में शामिल लेफ्ट पार्टियों के नेताओं ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. बता दें कि खबर लिखे जाने तक रैली की इजाजत ना होने पर भी जिग्नेश रैली स्थल तक पहुंचे. जिग्नेश गुजरात विधानसभा से विधायक हैं लेकिन उसके बाद भी गुजरात में अपनी विधानसभा का ध्यान ना रखकर राष्ट्रीय स्तर का नेता बनना चाहते हैं.

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बता दें कि दिल्ली में जिग्नेश मेवाणी के विरोध में कुछ पोस्टर्स भी लगाये गये हैं जिनमें उन्हें भगौड़ा कहा गया है. सोशल मीडिया पर जिग्नेश मेवाणी को लेकर लोगों का गुस्सा उस वक्त फूट गया जब उन्होंने देशद्रोह के आरोपी उमर खालिद के साथ मंच साँझा किया.