राहुल गांधी पीएम मोदी को हराने के लिए सब कुछ कर रहे हैं लेकिन फिर भी आ गई उनके लिए एक बुरी खबर !

2104 में लोकसभा चुनाव में मोदी की अगुवाई में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला, उसके बाद जितनी भी विपक्षी पार्टियाँ हैं उन्होंने गठबंधन और महागठबंधन बनाने की कई बार कोशिशें की लेकिन हर बार उन्हें असफलता ही हाथ लगी. 2014 के बाद से देशभर के कई राज्यों विधानसभा चुनाव हुए लेकिन अधिकतर राज्यों में बीजेपी ने परचम लहराया. वहीं मोदी लहर का एक असर ये भी देखा गया कि कुछ विरोधी पार्टियाँ बीजेपी को हराने के लिए एकसाथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने को मजबूर हुई. पिछले साल उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस एक साथ आ गयी थी लेकिन नतीजा जीरो रहा. इन सबको देखते हुए अब 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए एक बुरी खबर सामने आई है.

यूपी विधानसभा में एकसाथ लड़े थे अब अकेले लड़ सकते हैं

दरअसल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ सपा के गठबंधन को राज्य की जनता ने पसंद नहीं किया और हार का मुंह देखना पड़ा. अब आने वाले लोकसभा चुनाव में मुमकिन है कि सपा, कांग्रेस के साथ ना जाये, यही नहीं NBT के मुताबिक इस बात के साफ संकेत मिल चुके हैं कि इस बार समाजवादी पार्टी कांग्रेस का साथ छोड़ सकती है. बता दें सपा यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटों के लिए उम्मीवारों के चुनाव के काम में जुट गई है. अगर सपा अकेले लड़ती है, तो ऐसे में  जनता का विश्वास खो चुकी कांग्रेस को तगड़ा झटका लगेगा.

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दरअसल कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव के लिए एक मजबूत गठबंधन बनाना चाहती है लेकिन उसकी खुद की परफ़ॉर्मेंस को देखते हुए राज्य स्तर की पार्टियाँ गठबंधन के बजाय अकेले चुनाव लड़ने के मूड में दिख रही हैं. ऐसा नहीं है कि सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही कांग्रेस को झटका लगा है, पश्चिम बंगाल में भी ममता बनर्जी की पार्टी के साथ कांग्रेस के संबंध कुछ खास ठीक नहीं हैं. बाकी लेफ्ट पार्टियाँ भी सोनिया गांधी के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद कांग्रेस के साथ आने से कतरा रहीं हैं. ऐसे में 2019 में बीजेपी से मुकाबले के लिए ‘विपक्षी एकता’ दूर की कौड़ी नजर आ रही है.