मोदी-शाह का ये फ़ॉर्मूला दूसरी पार्टियों के लिए आफत बना हुआ है !

ऐसे तथ्य हैं कि भारत में राजनीतिक पार्टियों की शुरुआत अंग्रेजों ने की थी. कहा जाता है कि हिन्दुस्तानियों को राजनीतिक रूप से जागरूक करने के लिए कांग्रेस का गठन हुआ था. बाद में कांग्रेस पार्टी बन गयी और उसपर तथाकथित गांधी परिवार का कब्ज़ा हो गया. पार्टी पर कब्जे के बाद वंशवाद का जन्म हुआ. अधिकतर देखा गया है कि इस पार्टी का मुखिया नेहरु-गांधी परिवार से ही होता है. फ़िलहाल सोनिया गांधी अब कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नहीं रही तो उनकी जगह उनके बेटे राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है. इसको लेकर कांग्रेस में विरोध के भी सुर देखने को मिले हैं. लोगों ने इसे वंशवाद का सटीक उदाहरण बताया है. वहीं अगर आप भाजपा की बात करें तो पता चलता है कि यहां एक ऐसा नियम है जो बाकी पार्टियों में नहीं देखने को नहीं मिलता.

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दरअसल भारतीय जनता पार्टी में कांग्रेस के मुकाबले वंशवाद की जगह कम ही देखने को मिलती है. इस पार्टी में एक ऐसा नियम भी है जिसे नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने बनाया है. पंजाब केसरी के अनुसार इस नियम के अंतर्गत “अगर किसी का बेटा मंत्री बनेगा तो पिता को मंत्री पद से दूर रहना होगा, और अगर माता या पिता में कोई मंत्री या मुख्यमंत्री है तो उसके बेटे या बेटी को किसी भी हाल में प्रदेश या केंद्र सरकार में मंत्री नहीं बनाया जाएगा.” बता दें कि वैसे तो ये नियम सिर्फ मौखिक है लेकिन इसका अनुसरण भाजपा के हर नेता को अक्सर करना पड़ता है.

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भाजपा आलाकमान के द्वारा बनाये ऐसे नियमों से दूसरी पार्टियों को बड़ी दिक्कत हो रही है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि दूसरी पार्टियों में जमकर वंशवाद का उदाहरण देखने को मिलता है और जनता में उसकी धज्जियां भी उड़ती हैं. इस नियम से भाजपा की जनता में अच्छी छवि देखने को मिली है.