इसे पढ़कर समझ जायेंगे कि आखिर ये ‘4 जज’ क्यों नाराज हैं मुख्य न्यायाधीश से !

भारत के इतिहास में ये पहली बार हुआ है कि देश की सर्वोत्तम न्यायालय के जज खुद मीडिया के सामने आये हों और अपनी मनोदशा को उजागर किया हो. मामला बहुत गंभीर है, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के एक मजबूत स्तम्भ में इस तरह की घटना होना, वाकई सोचने पर मजबूर करती है. सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर गंभीर आरोप लगाकर सनसनी फैला दी है. मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह इसकी ही चर्चा है लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है ? तो चलिए आपको बताते हैं इस मामले की कुछ खास और अहम बातें.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा

सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि जिन 4 जजों ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर आरोप लगाये हैं उनके नाम जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसफ़ हैं. इन 4 जजों का आरोप है कि मुख्य न्यायाधीश अपनी मनमानी करते हैं. दरअसल सारा मामला केस अलॉटमेंट को लेकर है. इन 4 न्यायाधीशों ने CJI को एक चिट्ठी लिखकर शीर्ष अदालत की तरफ से पास कुछ आदेशों को लेकर चिंता जताई है. इस चिट्ठी में लिखा गया है कि :

“कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में तीन हाईकोर्ट स्थापित होने के बाद न्यायिक प्रशासन में कुछ परंपराएं और मान्यताएं भी स्थापित हुई हैं. इन हाईकोर्ट्स के स्थापित होने के लगभग एक दशक बाद सुप्रीम कोर्ट अस्तित्व में आया. प्रचलित सिद्धांतों में एक सिद्धांत ये भी है कि रोस्टर का फ़ैसला करने का विशेषाधिकार मुख्य न्यायाधीश के पास है, जिससे इस तरीके की व्यवस्था बनी रहे कि सुप्रीम कोर्ट की कौन सी पीठ का कौन सदस्य किस मामले को देखेगा. इस परम्परा की जरूरत इसलिए भी थी ताकि अदालत का कामकाज ठीक तरीके से ,अनुशासित और प्रभावी तरीके से चल सके. लेकिन इस परंपरा का यह मतलब नहीं कि चीफ़ जस्टिस अपने साथियों के ऊपर अपनी बात थोपने लगे.”

(बाएं से) जस्टिस कुरियन जोसेफ, जे चेलमेश्वर,,रंजन गोगोई, मदन लोकुर

इस चिट्ठी में ये भी लिखा है कि अगर इस परम्परा के खिलाफ कोई कदम उठाया जाता है या उसके खिलाफ काम होता है तो उससे देश की अखंडता को लेकर देश की राजनीति के मन में संदेह पैदा होगा. इस चिट्ठी में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर आरोप लगाया गया है कि वो अपने मनमानी तरीके से बेंच को मामले दे रहे हैं.

जस्टिस जे चेलमेश्वर

ये है मामला

इन 4 न्यायाधीशों के द्वारा आरोप लगाया गया है कि “ऐसे कई मामले हैं जिनमें देश और न्यायिक संस्थान पर असर डालने वाले मुकदमे इस अदालत के चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा ने ‘अपनी पसंद की’ बेंच को सौंपे हैं, और इसके पीछे कोई तर्क नज़र नहीं आता. ऐसे में इसकी हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए.”

4 जजों द्वारा लिखे गये पत्र का अंश

वैसे जिस तरीके से 4 जजों ने सर्वोत्तम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पर सवाल उठाया है वो वाकई में बहुत गंभीर मामला है. ऐसे में जो जनता न्याय की उम्मीद लिए देश की सबसे बड़ी अदालत की तरफ देखती है, उसे और उसकी उम्मीदों को थोड़ी ठेस तो लगी ही होगी.

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