बहुत कम लोगों को पता है कि जब जस्टिस चेलमेश्वर से डी. राजा के मिलने तक क्या-क्या हुआ था !

‘लोकतंत्र खतरे में हैं’ ये वो शब्द है जिसका इस्तेमाल विरोधी मोदी सरकार के खिलाफ करते हैं, लेकिन जब ये शब्द देश की सबसे बड़ी अदालत के 4 प्रमुख जज कहें तो इसके मायने बदल जाते हैं. स्थिति गंभीर हो जाती है, सोचना लाजमी हो जाता है कि क्या सच में ऐसी स्थिति है ? फ़िलहाल 12 जनवरी को जो कुछ भी हुआ न्यायपालिका के लिए ठीक नहीं था और ऐसा हम नहीं बल्कि कानूनविद और सुप्रीम कोर्ट पे पूर्व न्यायाधीशों का कहना है. कुछ पूर्व जजों का कहना है कि जिन 4 जजों (जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसफ़) ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर मनमानी का आरोप लगाया है, उसको लेकर कोई दूसरा तरीका भी अपनाया जा सकता था, इस तरीके से मीडिया में आने का तरीका ठीक नहीं था. इससे न्यायपालिका के लिए संदेह पैदा होगा.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा

आखिर 12 जनवरी के दिन हुई घटना को जब मीडिया ने अपने तरीके से दिखाना शुरू किया तो बीच चौराहे पर न्यायालय जैसी बड़ी संस्था पर सवाल उठने लगे, लेकिन उस दिन क्या-क्या हुआ था, कब पत्रकार आये और कब भाकपा नेता डी. राजा जस्टिस चेलामेश्‍वर से मिलने पहुंचे. क्या था पूरा घटनाक्रम ? नहीं जानते? तो चलिए आपको बताते हैं कि उस दिन का पूरा घटनाक्रम क्या रहा.

(बाएं से) जस्टिस कुरियन जोसेफ, जे चेलमेश्वर,,रंजन गोगोई, मदन लोकुर

जनसत्ता के मुताबिक:
सुबह 10:45 पर जस्टिस चेलामेश्‍वर ने अपने पर्सनल स्‍टॉफ के पास एक मैसेज किया, जिसमें 30 लोगों के लिए इंतजाम करने को कहा गया था. जाहिर है कि ये 30 पत्रकार बिरादरी से थे. इसके बाद उनके कर्मचारियों में इस बात की बहस शुरू हो गयी थी कि आज कुछ खास होने वाला है.

सुबह 11:15 पर जस्टिस चेलामेश्‍वर तीन अन्‍य जजों जस्टिस मदन भीमराव लोकुर, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस कुरियन जोसेफ के साथ अपने आवास 4 तुगलक रोड पर पहुंचे. उसके बाद जस्टिस चेलामेश्‍वर ने मीडियाकर्मियों को बुलाने की बात कही.

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सुबह 11:30 पर मीडियाकर्मी पहुंचने शुरू हो गये और 12 बजे तक आते रहे. जस्टिस चेलामेश्‍वर ने सभी का हाथ जोड़कर स्वागत किया. कुछ इस तरीके से कि जैसे वो काफी देर से उनका इंतजार कर रहे थे.

दोपहर 12:15 पर जस्टिस चेलामेश्‍वर अपनी बात रखना शुरू किये और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर आरोप लगाते हुए कहा कि “सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन सही तरीके से नहीं चल रहा है. पिछले कुछ महीनों में कई ऐसी बातें हुईं जो नहीं होनी चाहिए थीं.”

दोपहर 12:40 पर चारों जजों ने सात पृष्‍ठों का एक पत्र मीडिया को दिखाया, जिसके बाद मीडियाकर्मियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. खास बात ये कि इस दौरान पत्रकारों के लिए चाय और रसमलाई की व्‍यवस्‍था भी की गई थी.

दोपहर 2:40 पर सुप्रीम कोर्ट के दो और जज जस्टिस SA बोब्‍दे और जस्टिस L नागेश्‍वर राव जस्टिस चेलामेश्‍वर के आवास पर पहुंचे.

दोपहर 3:30 पर भाकपा नेता डी. राजा जस्टिस चेलामेश्‍वर से मिलने पहुंचे. बता दें कि वो सुप्रीम कोर्ट जज के आवास में पिछले दरवाजे से दाखिल हुए थे. हालांकि उनकी पार्टी को बाद में इस पर सफाई भी देनी पड़ी थी.

भाकपा नेता डी. राजा और जस्टिस चेलामेश्‍वर

बता दें कि डी. राजा के पहुंचने के बाद मीडिया में तमाम तरह की बातें होने लगीं. सोशल मीडिया पर भी इस बात की चर्चा है कि आखिर इतने बड़े आरोप के बाद डी. राजा जस्टिस चेलामेश्‍वर से मिलने क्यों पहुंचे थे ?