हज़ सब्सिडी ख़त्म करने पर मोदी सरकार की आलोचना करने वालों पहले पूरी खबर तो पढ़ लेते !

साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने उस वक्त की कांग्रेस सरकार को निर्देश दिया था कि हज के लिए मिलने वाली सब्सिडी को 10 सालों में चरणबद्ध तरीके से खत्म करे. सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश ये भी कहा था कि “हज जाने के लिए सब्सिडी देना अल्पसंख्यक समुदाय को लालच देने जैसा है, इसलिए भारत सरकार को चाहिए कि इस नीति को बंद करे.” फ़िलहाल इस निर्देश के बाद भी कांग्रेस सरकार की तरफ से वोटों की लालसा में इस पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया गया. अब मोदी सरकार के आने के बाद कोर्ट के आदेश पर हज़ सब्सिडी पर रोक लगा दी गयी है.

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हज़ सब्सिडी को ख़त्म करने के बाद कुछ राजनीतिक दल ऐसे भी हैं जो अपनी-अपनी रोटियां सेंक रहे हैं. उनका कहना है कि मोदी सरकार मुसलमानों को निशाना बना रही है. इस मामले पर तो ओवैसी इतना बौखला गये कि मोदी सरकार पर निशाना बनाते हुए कुछ ही देर में 6 ट्वीट कर डाले. हालांकि मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने जवाब देते हुए कहा कि “मोदी सरकार का लक्ष्य तुष्टिकरण नहीं, सशक्तीकरण है.”

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बता दें कि हज़ सब्सिडी खत्म होने की आधी खबर सुनकर ही विरोधी आसमान सिर पर उठा लिए लेकिन पूरी खबर पर ध्यान नहीं दिया. दरअसल हज़ सब्सिडी ख़त्म जरुर हुई है लेकिन उसके मद में आ रहे पैसे को अल्पसंख्यकों के लिए ही इस्तेमाल किया जायेगा.

सब्सिडी का पैसा अब यहां होगा इस्तेमाल

बता दें कि ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार मुस्लिमों के प्रति उदासीन है बल्कि हज़ सब्सिडी को खत्म करने के बाद उसके मद के पैसे को मुस्लिम लड़कियों के हित में इस्तेमाल किया जायेगा. बता दें कि कैबिनेट मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए कहा कि “सब्सिडी के लिए खर्च होने वाले लगभग 700 करोड़ रुपये की रकम अब अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों की शिक्षा और उनके सशक्तीकरण पर खर्च होगी.”

कैबिनेट मंत्री ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए ये भी कहा कि “ये सब जानते हैं कि सब्सिडी के लिए जो पैसा मिलता था उससे गरीब अल्पसंख्यकों को फायदा कम और कुछ एजेंसियों का फायदा ज्यादा होता था. इसलिए इसपर राजनीति नहीं करनी चाहिए”