वीडियो: जानिए कासगंज हिंसा के बारे में मुस्लिम पक्ष क्या कहता है !

26 जनवरी के दिन कासगंज में कुछ युवकों ने तिरंगा यात्रा निकाला जो मुस्लिम बाहुल्य इलाके तक जाते-जाते झड़प में तब्दील हो गया. इस यात्रा में भारत माता की जय और वन्दे मातरम के नारे लग रहे थे. जब यह यात्रा कासगंज के बद्दू नगर पहुंची तो वहां पर इस यात्रा का विरोध होने लगा. एक तरफ से वन्दे मातरम के नारे लग रहे थे तो दूसरी तरफ से पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लग रहे थे. अब इस हिंसा को लेकर एक नयी बात सामने आ रही है वो ये कि मुस्लिम समुदाय भी ध्वजा रोहण के लिए इकट्ठा हुए थे. जिस जगह पर वो ध्वजारोहण कर रहे थे वहां से तिरंगा यात्रा निकल रही थी. रास्ते को लेकर विवाद हुआ और हिंसा भड़क गयी .

कासगंज में चंदन की मौत के बाद भड़की हिंसा

बता दें कि कासगंज में फैली हिंसा अभी भी नहीं थमी है. उस विवाद के बारे में जनसत्ता ने लिखा है कि ‘रास्ते को लेकर झड़प की शुरुआत हुई.’  जब कासगंज के बददु नगर में दोनों समुदाय के लोग आमने सामने आये तो रास्ते को लेकर विवाद होने लगा. तिरंगा यात्रा निकाल रहे लोगों का मत था कि उन्हें रास्ता दिया जाय लेकिन दूसरे पक्ष का मत था कि उनके द्वारा मनाया जा रहा कार्यक्रम पहले समाप्त हो फिर वो जाये.

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कार्यक्रम के लगी कुर्सियों को हटाने के लिए कहा गया, जिससे तिरंगा यात्रा आगे बढ़ सके लेकिन दूसरे पक्ष के लोगों ने ऐसा करने से मना कर दिया और बातचीत ने झड़प का रूप ले लिया. वहां के स्थानीय निवासी और पेशे से वकील मोहम्मज मुनाज़ीर रफी ने कहा “बाइक से तिरंगा यात्रा निकलाते हुए लोग इधर से नारे लगाते हुए जा रहे थे. हमने उनसे आग्रह किया कि पहले हमारा गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम खत्म होने दें लेकिन वे अपनी बात पर अड़े रहे और वहां से नहीं हटे. उनसे कहा गया कि हमारे कार्यक्रम में शामिल हो जाएं तो उन लोगों ने मना कर दिया जिसके बाद बात बढ़ते-बढ़ते झड़प में तब्दील हो गयी और धक्का-मुक्की होने लगी और फिर उस विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया.”

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