गौतम गंभीर पर सवाल उठाने वाले पत्रकारों के उड़ गए होश जब लोगों ने कहा, हमें दुश्मनों की क्या जरुरत है जब…

कश्मीर को लेकर मीडिया में कोई न कोई न्यूज़ हमेशा चलती रहती है. अभी कुछ दिन पहले जम्‍मू कश्‍मीर में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फॉर्स (सीआरपीएफ) के जवान से मारपीट और बदसलूकी का वीडियो सामने आया था. इसके बाद अब एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें सेना की जीप से एक व्‍यक्ति बंधा हुआ है.

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सेना के जवान को सताने वाले वीडियो पर भारतीय क्रिकेटर गंभीर ने अपने अंदाज़ में लिखा कि सेना के जवान पर पड़ने वाला हर तमाचा 100 जिहादियों की जान के बराबर है. जो आजादी चाहते हैं वह मुल्क छोड़ दें. कश्मीर हमारा है. गंभीर ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ”देश विरोधी लोग ये जान लें कि तिरंगे में केसरी रंग- हमारे क्रोध की आग, सफेद- जिहादियों के लिए कफन और हरा – आतंक के खिलाफ घृणा को दर्शाता है.”

इसके बाद राजदीप सरदेसाई और सागरिका घोष जैसे दोगले पत्रकार जो हमेशा देश को सपोर्ट करने वाले लोगों को निशाना बनाते हैं ने गंभीर पर निशाना साधा लेकिन लोगों ने उनको ऐसा आईना दिखाया कि उनकी बोलती बंद हो गई.

वरिष्‍ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने इस वीडियो के जरिए गौतम गंभीर पर परोक्ष रूप से हमला बोला। उन्‍होंने लिखा, “क्‍या कोई क्रिकेट/फिल्‍म हीरो इस घटना की उसी तरह से आलोचना करेगा जब एक सेना के जवान के साथ बदसलूकी के बाद की जाती है?” सागरिका घोष ने तो इस वीडियो के सामने आने के बाद गौतम गंभीर को भी घसीट लिया. उन्‍होंने ट्वीट कर लिखा, ”गौतम गंभीर यदि कभी कश्‍मीर जाएं तो वे शायद एक दिन पैलेट गन से आंखों की रोशनी खोने वाले किशोर के घर पर बिता सकते हैं.”

इसके बाद लोगों ने सागरिका और राजदीप को निशाने पर ले लिया.

एक यूजर ने लिखा कि अगर राजदीप एक सैनिक होते और शहीद हो जाते तो उनको समझ में आता एक सैनिक के परिवार वालों का दर्द.

इसके बाद एक और यूजर ने लिखा कि अच्छा है कि वो सैनिक नहीं हैं नहीं तो वो देश को भी बेच देते.

इसके बाद कुछ लोगों ने सागरिका घोष को भी सबक सिखाया जिन्होंने कहा था कि गौतम गंभीर यदि कभी कश्‍मीर जाएं तो वे शायद एक दिन पैलेट गन से आंखों की रोशनी खोने वाले किशोर के घर पर बिता सकते हैं. लोगों ने सागरिका को निशाना बनाते हुए कहा कि…

श्‍वेता चौहान नाम की एक यूजर ने लिखा, ”मैं भी कभी कश्‍मीर नहीं गई वर्ना वे देशद्रोही पैलेट गन से नहीं बल्कि मेरे घूंसों से आंखों की रोशनी गंवाते.”

साइबर बुली नाम के एक यूजर ने सागरिका को निशाना बनाते हुए पूछा कि आपकी सहानुभूति केवल उनको ही लेकर क्यों होती है जो लोग देश विरोधी काम करते हैं. मैंने आपको कभी भी कन्हैया कुमार के खिलाफ कुछ भी कहते नहीं सुना.

एक यूजर ने तो यहाँ तक कह दिया कि जब हमारे पास आपके जैसे पत्रकार हैं तो हमें दुश्मनों की क्या जरुरत हैआप कभी उन सिपाहियों के घर रह कर आइये जो पत्थरबाज़ी से मारे जाते हैं. 

ये पोस्ट पढ़कर आपको पता चल गया होगा कि दोगले पत्रकारों को लोगों ने कैसे सबक सिखाया.

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