आधी रात को सिर्फ GST के लिए ही जश्न नहीं मनाया गया एक वजह और थी जिसके बाद अब सोनिया गाँधी अपना माथा पीटने लगेंगी

1 जुलाई मध्यरात्रि से पूरे देश में जीएसटी लागू हो गया और इसकी ऐतिहासिक शुरुआत संसद के सेन्ट्रल हॉल में राष्ट्रपति और पीएम मोदी के द्वारा हुई. आपको बता दें की इसे ऐतिहासिक इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि आज़ादी के बाद कर सम्बन्धी ऐसा सुधार अभी तक ही हुआ थाl वैसे GST लागू करने के के लिए मोदी सरकार प्रयासरत थी तो विपक्षी खेमे में कई ऐसी पार्टियाँ थी जो इसका विरोध कर रही थीं, लेकिन जैसे-जैसे ये कानून लागू होने के करीब आया विपक्षी खेमे की कई पार्टियाँ इस कानून के पक्ष में आ गयीं, और विपक्ष में जो ये दरार देखी जा रही हैं उसमें पीएम मोदी की शख्सियत असर है. अब आप ही सोचिये कि जो विरोधी एक होकर संसद कार्यकाल नही चलने दे रहे थे अब उनमें से ही कुछ दल सरकार के समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे हैंl इन सबके बीच सोनिया गाँधी जोकि कांग्रेस की अध्यक्ष भी हैं,उनके लिए सबसे चिंता की बात तो ये है की जिस विपक्ष की एकता के दम पर वो सरकार को घेरने का काम करती थीं अब उसमें दरार नजर आने लगी है. आपको बता दें कि GST लांच के दौरान सपा,जेडीयू,एनसीपी और जेडीएस ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया. वहीँ कांग्रेस और बसपा, वामदल, टीएमसी, आरजेडी समेत कई अन्य पार्टियां जो GST के विरोध में हैं वो इस कार्यक्रम में शामिल नही हुए बल्कि इस कार्यक्रम को तमाशा बतायाl

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आपको बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं और सरकार ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उमीदवार बनाया है जिसके जवाब में विपक्ष के 17 दलों ने मिलकर मीरा कुमार को प्रत्याशी बनाया है लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार द्वारा GST लांच कार्यक्रम के दौरान इन 17 दलों में से कई दल ऐसे भी थे जो सोनिया गाँधी और उनकी पार्टी की परवाह न करते हुए इस कार्यक्रम में पहुंचे l जिसमें विपक्ष के बड़े नेता नीतीश कुमार, तारिक अनवर, प्रफुल्ल पटेल, और  एनसीपी के चीफ शरद पवार ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इस कार्यक्रम को लेकर तारिक अनवर ने कहा था कि हम जीएसटी का समर्थन करते हैं. इसलिए ही वो जीएसटी लांच में शामिल होगें.

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जिस तरीके से GST लांच के दौरान विपक्षी दलों में फूट दिखी उससे यही माना जा रहा है कि मोदी सरकार यहां भी विपक्ष को फेल करने में कामयाब रहा है. इन सबको लेकर सोनिया गांधी के लिए चिंता की बात तो ये है कि सरकार के सामने वो पहले से ही कमजोर दिख रही थी ऐसे में बाकी दलों का सरकार के समर्थन में दिखाना उसके लिए कहीं और भी परेशानी का सबब बन जाये.

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आपको बता दें की जीएसटी लांच कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस सुप्रीमो एच डी देवेगौड़ा भी कार्यक्रम में शामिल हुए और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ मंच साझा किया.

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सूत्र तो ये भी कह रहे हैं कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने जीएसटी लांच कार्यक्रम में न जाने के लिए विपक्षी दलों से संपर्क भी साधा था लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं मानी और GST कानून लागू होने के कार्यक्रम में शामिल हुए. अब आप इसी से समझ सकते हैं की कांग्रेस के साथ बाकी दलों का कैसा तालमेल है और सोनिया गाँधी के नेतृत्व उन्हें कितना विश्वास है. पीएम मोदी के नेतृत्व में जिस तरीके से देश का विकास हो रहा है और दुनिया में भारत का डंका बज रहा है उसे देखते हुए ये कहना मुश्किल है की कांग्रेस दुबारा सत्ता में लौट सकती है और यही सोनिया गांधी के लिए चिंता का विषय है.

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