क्या आप जानते हैं भगवान श्री राम की कैसे हुई थी मौत, नहीं जानते तो पढि़ए यह हैरान कर देने वाली खबर

मर्यादा-पुरुषोत्तम राम भगवान का हिन्दू संस्कृति में क्या और कितना महत्व है ये शायद हमें आपको बताने की ज़रूरत नहीं है. आपने कई कहानी सुनी होंगी जिसमे भगवान राम ने अपने जीवन काल में क्या कुछ नहीं किया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान राम की मृत्यु कैसे हुयी थी? नहीं? तो चलिए हम आपको बताते हैं आपके इस सवाल का जवाब.

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भगवान श्री राम का अंत कैसे हुआ शायद ये बात हम में से कोई भी जानता हो. आखिर उन्होंने इस धरा धाम को क्यों और कैसे छोड़ा इस बात की भी जानकारी बहुत ही कम लोगों को है. तो चलिए अगर अप भी जानना चाहते हैं इन सवालो के जवाब तो ज़रूर पढ़िए इस ख़ास खबर को. जानकारी के लिए बता दें कि ये खबर अयोध्या के विद्वान साधु-संतो द्वारा बताई गयी है और साथ ही ये कथा शास्त्रों में भी वर्णित है.

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भगवान श्री राम की मौत से जुड़ी इस कहानी के बारे में जगद्गुरु श्री रामदिनेशाचार्य कहते हैं कि, “कोई भी भगवान प्रकृति से बाध्य नहीं होते हैं. हर भगवान प्रकृति से परे होते हैं इसलिए किसी भगवान के जीवन मरण की प्रक्रिया यहीं पर समाप्त हो जाती है. यहाँ ये भी गौर करने वाली बता है कि अगर आम मनुष्य की ही तरह ईश्वर को वृद्धावस्था और सामान्य मनुष्य की तरह जीवन-मृत्यु का खेल खेलना पड़ेगा तो आखिर वो भगवान कैसे रह जायेंगें? उदाहरण के तौर पर समझिये कि भगवान श्री-कृष्ण के सभी पुत्र बूढ़े हो गए लेकिन भगवान कृष्ण की उम्र हमेशा ही 20 से 25 वर्ष की ही रही.

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शास्त्रों में लिखा है कि, “जन्मं कर्मम च दिव्यम जिसका मतलब हुआ कि भगवान का जन्म भी दिव्य है, उनका कर्म भी दिव्य है, उनका अंत भी दिव्य है और इसलिए भगवान की मृत्यु कैसे हुई यह कोई नहीं कह सकता. हाँ लेकिन एक बात है कि भगवान धरती पर अलग-अलग रूपों में धरती पर दानवों का नाश करने के लिए अवतरित होते हैं और अपनी दिव्य लीला समाप्त करने के बाद वह एक बार फिर अपने परम धाम के लिए चले जाते हैं. कहा जाता है कि इसी तरह भगवान राम भी अपनी लीलाओं के समाप्त होने के बाद अयोध्या में ही अदृश्य हो गए थे, वो कभी मरे नहीं थे.

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जगतगुरु श्री रामदिनेशाचार्य इस विषय पर अपना पक्ष रखते हुए बताते हैं कि भगवान श्री राम की जब सभी लीलाएं समाप्त हो गयीं और उनका आखिरी काम रावण का संहार भी पूरा हो गया उन्होंने इस धरा धाम को छोड़ दिया. उनकी मृत्यु कैसे हुई, उनका दाह संस्कार कैसे हुआ? ऐसा कहीं भी नही लिखा गया है. जायज़ है ऐसे में उनका क्रिया कर्म भी कभी नहीं किया गया. हाँ लेकिन यहाँ ये जान लीजिये कि जिस स्थान पर भगवान श्री राम सशरीर अदृश्य हुए थे आज वह स्थान फैजाबाद के सरयू तट के किनारे मौजूद है और इसे गुप्तार घाट के नाम से जाना जाता है.

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श्री राम जन्म भूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सतेन्द्र दास इस विषय पर बताते हैं कि, “जब भगवान राम का ग्यारह हज़ार वर्ष राज करने के बाद बारहवां हज़ार वर्ष शुरू हुआ था उस वक़्त काल आया था और उसने भगवान राम से कहा था कि प्रभु आपकी धरती की लीला समाप्त हो गयी है अब आप अपने परम धाम को चलें. इतना सुनकर भगवान राम ने अपने परिवार के सभी सदस्यों को अलग-अलग राज्य दिया लेकिन अयोध्या किसी को नहीं दिया. शास्त्रों के अनुसार भगवान राम चाहते थे कि अयोध्या उनके प्रिय हनुमान जी को दिया जाये लेकिन, हनुमान जी ने यह राज्य लेना अस्वीकार कर दिया. बताया जाता है कि तब भगवान ने यह निर्णय लिया की अब वह अपने परमधाम को प्रस्थान करेंगे और मन में यही इच्छा लेकर भगवान राम अयोध्या के अंतिम छोर पश्चिम दिशा में ऋषि महर्षियों के साथ पहुंचे.

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कहा जाता है कि यहाँ पहुँचने के बाद भगवान राम पवित्र सरयू नदी में प्रवेश कर गए जिसके बाद वहां एक दिव्य विमान आया और उस समय भगवान का स्वरुप बदल गया और उनकी चार भुजाएं हो गयीं जिसे भगवान श्री राम का विष्णु अवतार कहा जाता है. उस रूप में आने के बाद जैसे ही भगवान उस विमान में बैठे, तो उन्हें जाता देख अयोध्या की प्रजा ने भगवान से एकस्वर में कहा कि,”हे प्रभु आप अपने परम धाम को तो जा रहे हैं लेकिन आपके बिना हमारी क्या दशा होगी?” लोगों की बात जायज़ समजते हुए तब प्रभु ने अपनी प्रजा से कहा कि, ” आप सभी मेरे बहुत प्रिय हैं इसलिए आप सब मेरे साथ चलें.”  इस तरह पूरी अयोध्या सरयू नदी के जल में समा गयी.

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